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दिवंगत पुलिस कर्मियों को अंतिम विदाई देते नम हुईं आंखें

Sat, 09 Dec 2017 11:22 PM IST
unnao
unnao Updated Sat, 09 Dec 2017 11:22 PM IST
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Lying to give late farewell to late police personnel eyes
दरोगा योगेश के रोते-बिलखते बच्चे व परिजन। - फोटो : amar ujala
अमर उजाला ब्यूरो
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उन्नाव। एक ही रात दो पुलिस कर्मियों की मौत ने पुलिस महकमे को गमगीन कर दिया। सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए दरोगा को देखने कानपुर जा रहे बारासगवर थाने में तैनात सिपाही की भी देर रात बीघापुर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई।

दिवंगत दरोगा और सिपाही को पुलिस लाइन में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दिवंगत पुलिस कर्मियों के परिजन और बच्चे भी पुलिस लाइन पहुंचे। उन्हें बिलखते देख सभी की आंखें नम हो गईं। 
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दरोगा व सिपाही को श्रृद्धा सुमन अर्पित करने वालों में जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा एसपी, एएसपी और सैकड़ों पुलिस कर्मियों के अलावा आम लोग पहुंचे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
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शुक्रवार रात सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बदरका पुलिस चौकी इंचार्ज मूलत: इटावा जिले के गांव निहाल सिंह के चंदपुरा गांव के रहने वाले थे। वह काफी समय से कानपुर के कोयलानगर वाई-1 ब्लॉक में परिवार सहित रह रहे थे। शुक्रवार रात बंथर बाईपास के छतुरिया कुआं मोड़ के निकट टेंपो से बाइक टकराने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

कानपुर रीजेंसी में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। योगेश 1993 बैच के सिपाही थे। पहली पोस्टिंग बांदा जिले में मिली थी। 2013 में सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नत हुए थे। प्रमोशन के बाद पहली पोस्टिंग उन्नाव की नवाबगंज चौकी में हुई थी। वह काफी समय मगरवारा में रहे। इसके बाद सिविल लाइन चौकी इंचार्ज बनाया गया। 

एक सपा नेता से विवाद होने पर यहां से हटाकर कालूखेड़ा चौकी इंचार्ज बनाया गया। इस समय वह अचलगंज थानाक्षेत्र के मगरवारा में चौकी इंचार्ज थे। योगेश के पिता महेशचंद्र हेड कांस्टेबल के पद से कानपुर पुलिस लाइन से सेवानिवृत्त हुए थे। योगेश की पत्नी पूनम के अलावा तीन बच्चों में बेटा सजल (11), बेटी पूचू (8) व नानू (6) है। सजल नि:शक्त है। पिता की मौत से बच्चे व परिजन रो-रो कर बेहाल रहे। मृतक योगेश पांच भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बड़े भाई राजीव पेशे से वकील हैं। संजीव कुमार पुलिस विभाग की शाखा एलआईयू में कानपुर में तैनात हैं। मुकेश कुमार आचार्य हैं। सबसे छोटे भाई बृजेश कुमार दीक्षित कानपुर में ही एक दैनिक अखबार में फोटो जर्नलिस्ट हैं।
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पापा कह रहे थे, अब बन जाएंगे एसओ
एसओ पद पर प्रमोशन पाने वालों की जो सूची एसपी पुष्पांजलि ने आईजी के यहां भेजी थी। उसमें एसआई योगेश दीक्षित का भी नाम था। अभी सूची स्वीकृत नहीं हुई है। पुलिस लाइन पहुंची मृतक योगेश की बेटी पूचू पिता का शव देख कर चीख पड़ी। वह बोली, पापा ने कहा था कि अब एसओ बन जाएंगे। बड़ी बहन को रोता देख छोटी बहन नानू भी कह उठी, अब मुझे कौन प्यार करेगा। पापा की तरह चिज्जी कौन लाएगा। दोनों बेटियां पापा की मौत से व्याकुल थीं।
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आगरा से लौटी पत्नी, मां व बच्चे
एसआई योगेश दीक्षित की पत्नी पूनम व मां प्रेमलता बच्चों के साथ राजस्थान बालाजी के लिए शुक्रवार दोपहर को निकली थीं। सभी आगरा पहुंच चुके थे। रास्ते में एक्सीडेंट की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही यह सभी कानपुर रीजेंसी पहुंचे। परिजनों के पहुंचने से पहले ही योगेश ने दम तोड़ दिया था।
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पुलिस विभाग ने खोया अपना सिंघम
जिले में आने के बाद नवाबगंज चौकी में मिली तैनाती के बाद योगेश के कार्य सराहनीय रहे। घटनाओं के खुलासे के अलावा उनके तेवरों से घटते क्राइम के चलते लोगों ने उन्हें सिंघम नाम दिया था। वह नाम से ही नहीं अपने काम से भी सिंघम थे। सब इंस्पेक्टर होने के बाद भी उनका व्यवहार जनता में आम लोगों जैसा था। इससे जहां भी रहते, सबके प्रिय बन जाते थे।
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भगवतदास घाट पर किया गया अंतिम संस्कार
पुलिस लाइन से शव कोयलानगर के वाई वन ब्लॉक पहुंचा। वहां से  शव यात्रा भगवतदास घाट पहुंची। यहां गार्ड ऑफ ऑनर के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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दरोगा को देखने जा रहे सिपाही की सड़क हादसे में मौत
बीघापुर (उन्नाव)। बारासगवर थाने में तैनात सिपाही अनिल कुमार यादव (34) पुत्र रोशन सिंह की बाइक शुक्रवार रात बीघापुर के ऊंचगांव मोड़ के निकट अज्ञात वाहन से टकरा गई। इससे यह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बीघापुर थानाध्यक्ष मनोज मिश्र उन्हें स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए। हालत गंभीर देख कानपुर रीजेंसी लेकर पहुंचे। यहां रात डेढ़ बजे इलाज के दौरान मौत हो गई। अनिल हेलमेट  लगाए थे। अनिल मूलत: कानपुर देहात जिले के थाना भोगनीपुर के गांव सिंगरसीपुर के रहने वाले थे। वर्ष 2006 के बैच में  सिपाही हुए थे। पहली पोस्टिंग बाराबंकी जिले में हुई थी। इसके बाद उन्नाव आ गए थे। यहां सिविल लाइन चौकी में सिपाही रहे। चौकी इंचार्ज योगेश दीक्षित के एक्सीडेंट की खबर सुनकर अनिल उन्हें देखने रीजेंसी जा रहे थे। मृतक के पिता रोशन सिंह गोंडा जिले से हेड कांस्टेबल के पद से सेवा निवृत्त हुए थे। बेटे की मौत की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी अर्चना के अलावा दो बच्चों में पूजा (6) व दीक्षा (4) हैं। बेटे की मौत से मां रजपति के अलावा अन्य परिजन रो-रो केर बेहाल रहे। पुलिस लाइन से राजकीय सम्मान के बाद शव मृतक के गांव भेजा गया। वहीं गार्ड ऑफ ऑनर के साथ ही अंतिम विदाई दी गई।
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चौकी इंचार्ज व सिपाही में थी गहरी मित्रता
हादसे का शिकार हुए एसआई योगेश दीक्षित व सिपाही अनिल कुमार यादव में गहरी मित्रता थी। योगेश जब सिविल लाइन में चौकी इंचार्ज थे तब अनिल वहीं सिपाही थे। दोनों में खूब घनिष्ठता थी। मार्ग दुर्घटना में योगेश के घायल होने की सूचना पर वह उन्हें देखने जा रहे थे।
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मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी थे अनिल
हादसे का शिकार अनिल चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। अनिल बहनों की आंखों का तारा तो मां राजपती व पिता रोशन सिंह यादव की बुढ़ापे की लाठी थे। पुलिस लाइन पहुंचे मृतक के माता-पिता ने जैसे ही बेटे का शव देखा, बेसुध हो गए। लाइन में उपस्थित महिला व पुरुष सिपाहियों ने उन्हें संभाला।
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पुलिस अंकल, किसने मारा मेरे पापा को
पुलिस लाइन पहुंची सिपाही अनिल की बच्ची पूजा रोते हुए मौजूद सिपाहियों से पूछ रही थी, कि पुलिस अंकल ये बताओ मेरे पापा को किसने मारा। मेरे पापा अब नहीं मिलेंगे। मुझे कौन घुमाएगा। फोन से कौन प्यार करेगा। पूजा की यह तड़प देख सभी की आंखों से आंसू छलक रहे थे।
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जिसने भी देखा मंजर, आंखों में छलके आंसू
पुलिस लाइन में दरोगा व सिपाही के राजकीय सम्मान में जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर के साथ ही एसपी पुष्पांजलि, एसपी अष्टभुजा प्रसाद सभी क्षेत्रों के सीओ, एसओ के अलावा पुरुष महिला आरक्षी व लाइन कॉलोनी में रहने वाले शामिल हुए। इस मंजर को जिसने भी देखा उसकी आंखों में आंसू छलक आए।

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बिना हेलमेट बाइक चलाई तो होगी कार्रवाई
एक ही रात दो पुलिस कर्मियों की सड़क हादसे में मौत के बाद एसपी पुष्पांजलि ने सभी पुलिस कर्मियों को हेलमेट पहनकर बाइक चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वायरलेस पर सभी थानों और पुलिस कर्मियों को हिदायत दी है कि अगर कोई पुलिस कर्मी बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाता नजर आया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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