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रिपोर्ट के 20 दिन बाद भी बयान नहीं कराए
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उन्नाव। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास के निजी सचिव के खुदकुशी के प्रयास में औरास पुलिस द्वारा की गई लापरवाही की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। निजी सचिव की बहन द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट के 20 दिन बीतने के बाद भी पुलिस ने कलमबंद बयान तक कराना उचित नहीं समझा। अब विभागीय जांच में यही लापरवाही निलंबित एसओ और विवेचक के गले की फांस बन सकती हैं।
उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार महिला संबंधी अपराधों में मेडिकल व कलमबंद बयान की प्रकिया जल्द से जल्द पूर्ण की जानी चाहिए। निजी सचिव की बहन द्वारा 7 अगस्त को दर्ज कराई रिपोर्ट में पुलिस ने मेडिकल परीक्षण तो कराया पर न्यायालय में कलमबंद बयान नहीं कराए। कलमबंद बयान न होने से इंसाफ के लिए पीड़िता पुलिस के चक्कर लगाती रही। निजी सचिव से जुड़े मामले में बरती गई लापरवाही अब निलंबित किए गए एसओ व विवेचक को भारी पड़ सकती है। दोनों पुलिस कर्मियों की विभागीय जांच शुरू हो गई है। एएसपी ने शशिशेखर सिंह ने बताया कि निलंबित पुलिस कर्मियों को जल्द बुलाकर प्रकरण से जुड़े बिंदुओं पर जवाब मांगा जाएगा। वर्ष 2020 में इसी प्रकरण में दर्ज की गई एक और रिपोर्ट पर तत्कालीन एसओ सतीश गौतम से भी पूछताछ होगी।
निजी सचिव द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के बाद उच्चाधिकारियों के गंभीर होने पर अब औरास पुलिस बहन के कलमबंद बयान कराने की तैयारी में जुट गई है। नए एसओ औरास अतुल तिवारी ने बताया कि भाई के साथ हुई घटना से महिला परेशान हैं। उसे कलमबंद बयान के लिए बुलाया गया है। उसके आते ही बयान कराए जाएंगे।
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निलंबित प्रभारी निरीक्षक औरास हरप्रसाद अहरवार का दावा है कि निजी सचिव ने इस प्रकरण में उन्हें अप्रैल में फोन किया था। उन्होंने मांग की थी कि प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर गलत तरीके से दर्ज नामों को हटाया जाए। जांच में उनका, बहन व भांजी का नाम निकाला गया था। इसके बाद से उन्होंने न ही फोन पर और न ही मिलकर कोई वार्ता की। अधिकारी चाहें तो उनकी कॉल डिटेल निकलवा लें। रुपये मांगने व धमकी देने के लग रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
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उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार महिला संबंधी अपराधों में मेडिकल व कलमबंद बयान की प्रकिया जल्द से जल्द पूर्ण की जानी चाहिए। निजी सचिव की बहन द्वारा 7 अगस्त को दर्ज कराई रिपोर्ट में पुलिस ने मेडिकल परीक्षण तो कराया पर न्यायालय में कलमबंद बयान नहीं कराए। कलमबंद बयान न होने से इंसाफ के लिए पीड़िता पुलिस के चक्कर लगाती रही। निजी सचिव से जुड़े मामले में बरती गई लापरवाही अब निलंबित किए गए एसओ व विवेचक को भारी पड़ सकती है। दोनों पुलिस कर्मियों की विभागीय जांच शुरू हो गई है। एएसपी ने शशिशेखर सिंह ने बताया कि निलंबित पुलिस कर्मियों को जल्द बुलाकर प्रकरण से जुड़े बिंदुओं पर जवाब मांगा जाएगा। वर्ष 2020 में इसी प्रकरण में दर्ज की गई एक और रिपोर्ट पर तत्कालीन एसओ सतीश गौतम से भी पूछताछ होगी।
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निजी सचिव द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के बाद उच्चाधिकारियों के गंभीर होने पर अब औरास पुलिस बहन के कलमबंद बयान कराने की तैयारी में जुट गई है। नए एसओ औरास अतुल तिवारी ने बताया कि भाई के साथ हुई घटना से महिला परेशान हैं। उसे कलमबंद बयान के लिए बुलाया गया है। उसके आते ही बयान कराए जाएंगे।
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निलंबित प्रभारी निरीक्षक औरास हरप्रसाद अहरवार का दावा है कि निजी सचिव ने इस प्रकरण में उन्हें अप्रैल में फोन किया था। उन्होंने मांग की थी कि प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर गलत तरीके से दर्ज नामों को हटाया जाए। जांच में उनका, बहन व भांजी का नाम निकाला गया था। इसके बाद से उन्होंने न ही फोन पर और न ही मिलकर कोई वार्ता की। अधिकारी चाहें तो उनकी कॉल डिटेल निकलवा लें। रुपये मांगने व धमकी देने के लग रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।