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हृदयनारायण दीक्षित के गांव में जश्न शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Wed, 29 Mar 2017 12:02 AM IST
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वरिष्ठ भाजपा नेता व विधायक ह्रदयनारायण दीक्षित।
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा के वरिष्ठ नेता और भगवंतनगर से विधायक बने ह्रदयनारायण दीक्षित का विधानसभा अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है। अधिकारिक मुहर बुधवार को नामाकंन और निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगेगी। यह खबर मिलते ही जिले के भाजपाई जश्न में डूब गए। उनके पैतृक गांव पुरवा तहसील के लउवा में लोगों ने मिठाई बांटी और गाजे बाजे के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया।
पुरवा तहसील के हिलौली ब्लाक के लउवा गांव निवासी ह्रदयनारायण दीक्षित 1985 में पहली बार निर्दल विधायक बने। वह 1989 में जनतादल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पुरवा के विधायक बने। वह सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में 1995 में संसदीय कार्य एवं पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2010 से जून 2016 तक भाजपा के विधान परिषद सदस्य और भाजपा के नेता विधायक दल रहे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता बनाया। इस बार पार्टी ने उन्हें भगवंतनगर से उम्मीदवार बनाया और वह 53 हजार से अधिक वोट से विजयी हुए।
भाजपा के पूर्ण बहुमत से चुनाव जीतने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि दीक्षित को कैबिनेट में जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद से जिले के लोगों में मायूसी रही। लेकिन मंगलवार को जैसे ही भाजपा ने उनका नाम विधानसभा अध्यक्ष के लिए घोषित किया, जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों में भाजपा के इस दांव की खासी चर्चा है। राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण चेहरा देकर भाजपा ने दूरगामी परिणाम की पटकथा लिखने की तैयारी शुरू की है।
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पुरवा सीट से कब-कब जीते
1985-निर्दलीय
1989-जनता दल
1991-जनता पार्टी
1993-सपा
2017- भाजपा (भगवंतनगर से)
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पुरवा तहसील के हिलौली ब्लाक के लउवा गांव निवासी ह्रदयनारायण दीक्षित 1985 में पहली बार निर्दल विधायक बने। वह 1989 में जनतादल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पुरवा के विधायक बने। वह सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में 1995 में संसदीय कार्य एवं पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2010 से जून 2016 तक भाजपा के विधान परिषद सदस्य और भाजपा के नेता विधायक दल रहे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता बनाया। इस बार पार्टी ने उन्हें भगवंतनगर से उम्मीदवार बनाया और वह 53 हजार से अधिक वोट से विजयी हुए।
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भाजपा के पूर्ण बहुमत से चुनाव जीतने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि दीक्षित को कैबिनेट में जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद से जिले के लोगों में मायूसी रही। लेकिन मंगलवार को जैसे ही भाजपा ने उनका नाम विधानसभा अध्यक्ष के लिए घोषित किया, जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों में भाजपा के इस दांव की खासी चर्चा है। राजनीति से जुड़े लोगों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण चेहरा देकर भाजपा ने दूरगामी परिणाम की पटकथा लिखने की तैयारी शुरू की है।
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पुरवा सीट से कब-कब जीते
1985-निर्दलीय
1989-जनता दल
1991-जनता पार्टी
1993-सपा
2017- भाजपा (भगवंतनगर से)