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Unnao News: आठ महीने में दो बार बीएसए, पांच बार बीईओ ने किया निरीक्षण लेकिन नहीं दिखीं खामियां
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उन्नाव। टीकरगढ़ी उच्च प्राथमिक स्कूल के तीन शिक्षकों का साल में 400 दिनों का सीसीएल और मेडिकल लीव लेने का मामला चर्चा में है। बीएसए ने रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है। हकीकत यह है कि आठ महीनों में पांच बार बीईओ, दो बार बीएसए, दो बार डीसी बालिका व निर्माण और कई बार एआरपी ने इस स्कूल का निरीक्षण किया लेकिन खामियों को दबा दिया गया।
बिछिया ब्लॉक के टीकरगढ़ी उच्च प्राथमिक स्कूल में साल के 365 दिन में 400 दिन का सीसीएल और मेडिकल का मामला राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य की जांच में उजागर होने के बाद अधिकारी में सकते में हैं। अप्रैल महीने से शिक्षण कार्य शुरू होने के बाद कई बार अधिकारियों का निरीक्षण हुआ लेकिन एमडीएम न बनने के साथ खाद्यान सड़ने पर उनकी नजर नहीं पड़ी। जमीनी हकीकत देखी जाए तो एक साल में सीसीएल तीन बार से अधिक देय नहीं होता लेकिन साल 2020-21 में चार बार दिया गया। स्कूल में शिक्षक देरी से आए और जबरन हस्ताक्षर किए गए।
साल 2019 से विद्यालय में रंगाई-पुताई नहीं हुई। कंपोजिट धनराशि मनमाने तरीके से प्रयोग की गई। जांच की जाए तो पता चलेगा कि खेल का सामन कभी खरीदा ही नहीं गया। पांच महीने से एमडीएम नहीं बन रहा था। करीब एक सप्ताह पहले बीएसए ने खुद निरीक्षण किया था। इसके बाद भी दबाव या कोई अन्य कारण से कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा तो यह भी है कि डीबीटी के माध्यम से छात्रों को भेजे जाने वाला पैसा भी तीन साल से नहीं भेजा गया। पूर्व में शिक्षिका अल्का सिंह का झगड़ा दूसरी शिक्षक आभा त्रिवेदी व अन्य शिक्षिकाओं से हुआ। इसमें कई बार जांच हुई, लेकिन अधिकारी आज तक कोई हल नहीं निकाल पाए। शिक्षकों के अखाड़े के चलते छात्र संख्या लगातार घटती जा रही। मौजूदा समय में 37 छात्र संख्या पर तीन की तैनाती है।
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बीईओ विनोद पांडेय ने बताया कि अभी जांच आख्या नहीं आई है। आख्या आने पर आगे की जांच की जाएगी।
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बिछिया ब्लॉक के टीकरगढ़ी उच्च प्राथमिक स्कूल में साल के 365 दिन में 400 दिन का सीसीएल और मेडिकल का मामला राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य की जांच में उजागर होने के बाद अधिकारी में सकते में हैं। अप्रैल महीने से शिक्षण कार्य शुरू होने के बाद कई बार अधिकारियों का निरीक्षण हुआ लेकिन एमडीएम न बनने के साथ खाद्यान सड़ने पर उनकी नजर नहीं पड़ी। जमीनी हकीकत देखी जाए तो एक साल में सीसीएल तीन बार से अधिक देय नहीं होता लेकिन साल 2020-21 में चार बार दिया गया। स्कूल में शिक्षक देरी से आए और जबरन हस्ताक्षर किए गए।
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साल 2019 से विद्यालय में रंगाई-पुताई नहीं हुई। कंपोजिट धनराशि मनमाने तरीके से प्रयोग की गई। जांच की जाए तो पता चलेगा कि खेल का सामन कभी खरीदा ही नहीं गया। पांच महीने से एमडीएम नहीं बन रहा था। करीब एक सप्ताह पहले बीएसए ने खुद निरीक्षण किया था। इसके बाद भी दबाव या कोई अन्य कारण से कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा तो यह भी है कि डीबीटी के माध्यम से छात्रों को भेजे जाने वाला पैसा भी तीन साल से नहीं भेजा गया। पूर्व में शिक्षिका अल्का सिंह का झगड़ा दूसरी शिक्षक आभा त्रिवेदी व अन्य शिक्षिकाओं से हुआ। इसमें कई बार जांच हुई, लेकिन अधिकारी आज तक कोई हल नहीं निकाल पाए। शिक्षकों के अखाड़े के चलते छात्र संख्या लगातार घटती जा रही। मौजूदा समय में 37 छात्र संख्या पर तीन की तैनाती है।
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बीईओ विनोद पांडेय ने बताया कि अभी जांच आख्या नहीं आई है। आख्या आने पर आगे की जांच की जाएगी।