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बासमती के निर्यात में कमी आने से राजस्व पर पड़ा असर
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 07 Jan 2015 12:37 AM IST
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उन्नाव। निर्यातकों की बेरुखी से बासमती चावल के दामों व निर्यात में आई कमी ने न सिर्फ किसान व व्यापारियों के होश उड़ा रखे हैं बल्कि वाणिज्य कर विभाग व मंडी समिति को भी करीब चार करोड़ का झटका दिया है।
सबसे ज्यादा नुकसान वाणिज्यकर विभाग को उठाना पड़ा है। जिसे करीब तीन करोड़ रुपये राजस्व का झटका लगा है। मंडी समिति को करीब एक करोड़ रुपये का हानि का सामना करना पड़ा है। दिसंबर अंत तक बासमती के व्यापार में जारी सुस्ती चालू वित्त वर्ष के अंतिम तीन माह में कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
पिछले वर्ष बासमती चावल की रिकार्ड बिकवाली और निर्यात से उत्साहित वाणिज्यकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में दिसंबर अंत तक करीब साढ़े बारह करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।
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पिछले वर्ष हुई रिकार्ड बिकवाली व निर्यात को देखते हुए इस वर्ष यह लक्ष्य पाना ज्यादा कठिन भी नहीं दिख रहा था, लेकिन व्यापार में आई अड़चनों व बासमती की गुणवत्ता में कमी के कारण इस बार निर्यातकों ने प्रदेश के प्रमुख बासमती बाजार से दूरी बना ली।
दिसंबर अंत की बात करें तो निर्यात से वाणिज्यकर विभाग को 12.5 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी जो घटकर 9.5 करोड़ ही रह गई। इसी प्रकार मंडी समिति को करीब डेढ़ करोड़ रुपये राजस्व मिलने की संभावना थी जो दिसंबर अंत तक 50 लाख ही पहुंच सकी।
यहां तक पहुंचने में भी मंडी समिति को भारी मशक्कत करनी पड़ी। बासमती चावल के व्यापार से जुड़े लोग फिलहाल फरवरी व मार्च में बासमती चावल के दामों में कुछ तेजी की भी उम्मीद व्यक्त कर रहे हैं।
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सबसे ज्यादा नुकसान वाणिज्यकर विभाग को उठाना पड़ा है। जिसे करीब तीन करोड़ रुपये राजस्व का झटका लगा है। मंडी समिति को करीब एक करोड़ रुपये का हानि का सामना करना पड़ा है। दिसंबर अंत तक बासमती के व्यापार में जारी सुस्ती चालू वित्त वर्ष के अंतिम तीन माह में कुछ हद तक दूर होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।
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पिछले वर्ष बासमती चावल की रिकार्ड बिकवाली और निर्यात से उत्साहित वाणिज्यकर विभाग ने चालू वित्त वर्ष में दिसंबर अंत तक करीब साढ़े बारह करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।
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पिछले वर्ष हुई रिकार्ड बिकवाली व निर्यात को देखते हुए इस वर्ष यह लक्ष्य पाना ज्यादा कठिन भी नहीं दिख रहा था, लेकिन व्यापार में आई अड़चनों व बासमती की गुणवत्ता में कमी के कारण इस बार निर्यातकों ने प्रदेश के प्रमुख बासमती बाजार से दूरी बना ली।
दिसंबर अंत की बात करें तो निर्यात से वाणिज्यकर विभाग को 12.5 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी जो घटकर 9.5 करोड़ ही रह गई। इसी प्रकार मंडी समिति को करीब डेढ़ करोड़ रुपये राजस्व मिलने की संभावना थी जो दिसंबर अंत तक 50 लाख ही पहुंच सकी।
यहां तक पहुंचने में भी मंडी समिति को भारी मशक्कत करनी पड़ी। बासमती चावल के व्यापार से जुड़े लोग फिलहाल फरवरी व मार्च में बासमती चावल के दामों में कुछ तेजी की भी उम्मीद व्यक्त कर रहे हैं।