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दस करोड़ की कंपोजिट ग्रांट से बेसिक शिक्षा में होगा सुधार
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उन्नाव। बेसिक शिक्षा से संचालित स्कूलों में सुधार के लिए शिक्षा महानिदेशक ने 10 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट जिले को जारी की है। धनराशि का दस प्रतिशत स्वच्छता पर खर्च करना है। 90 प्रतिशत धनराशि को कब और कैसे खर्च किया जाना है, इसकी गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है।
जिले के 3137 परिषदीय स्कूलों के रख-रखाव के साथ बेसिक शिक्षा में सुधार हो इसके लिए जिले को 10 करोड़ 62 लाख 500 रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि का 10 फीसदी स्वच्छता संबंधी कार्यों पर खर्च करना है। कोरोना संक्रमण में हाथ धोने की मल्टीपल व्यवस्था के साथ शौचालय में पानी की व्यवस्था की जाएगी। जिन विद्यालयों में शौचालय क्रियाशील नहीं है उन्हें दुरुस्त कराने के लिए इस मद का प्रयोग किया जाएगा। हर स्कूल में स्वच्छता का संदेश लिखवाया जाए। बच्चों की पढ़ाई में प्रयोग की जाने वाली विज्ञान किट, गणित किट, ग्लोब, मानचित्र भी इसी मद से खरीदा जाएगा। जिन स्कूलों में अलमारी नहीं हैं वह इस मद से खरीद सकते हैं। आग से बचाव के लिए विद्यालयों में लगे अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग कराई जा सकेगी।
बीमारी को देखते हुए फर्स्टएड बॉक्स में जरूरत दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। यह ध्यान रखा जाए कि दवाएं एक्सपायरी न हों। विद्यालयों के अक्रियाशील उपकरणों की रिपेयरिंग, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर शिक्षा से संबंधी उपकरणों का रख-रखाव इसी मद से किया जाएगा। विद्यालय की आवश्यकतानुसार उच्च गुणवत्तायुक्त सामग्री ही खरीदी जाए। यदि अन्य मद से इनमें कोई कार्य कराया जा चुका है या अनुमोदित है तो ऐसे काम के लिए कंपोजिट ग्रांट का प्रयोग नहीं किया जाएगा। धनराशि का प्रयोग विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष व प्रधान शिक्षक के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। उपभोग प्रमाणपत्र बीईओ को उपलब्ध कराया जाएगा। बीईओ प्रेरणा पोर्टल पर उपलब्ध कंपोजिट ग्रांट विद्यालयवार, मदवार त्रुटिरहित सूचना अपलोड कराएंगे।
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बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि बीईओ व प्रधान शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट खर्च करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में कंपोजिट ग्रांट में जमकर हुई थी लूट
वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस जिले के लिए 9 करोड़ रुपये की कंपोजिट ग्रांट जारी की गई थी। जिसमें बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ था। विधान परिषद सदस्य सुनील साजन ने मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तब शासन ने इसकी जांच कराई थी। सामग्री की आपूर्ति करने वाली संस्था को चेक से भुगतान तो कर दिया गया लेकिन हकीकत यह रही कि स्कूलों में सामान पहुंचा तक नहीं। शासनादेश का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त सामग्री क्रय की गई और सामग्री भी घटिया किस्म की थी। इसपर जालौन जिले की मां वैष्णो एजेंसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही तत्कालीन डीएम देवेंद्र पांडेय व बीएसए बीके शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। इस घपले की जांच पुलिस की ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) कर रही है।
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जिले के 3137 परिषदीय स्कूलों के रख-रखाव के साथ बेसिक शिक्षा में सुधार हो इसके लिए जिले को 10 करोड़ 62 लाख 500 रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। इस धनराशि का 10 फीसदी स्वच्छता संबंधी कार्यों पर खर्च करना है। कोरोना संक्रमण में हाथ धोने की मल्टीपल व्यवस्था के साथ शौचालय में पानी की व्यवस्था की जाएगी। जिन विद्यालयों में शौचालय क्रियाशील नहीं है उन्हें दुरुस्त कराने के लिए इस मद का प्रयोग किया जाएगा। हर स्कूल में स्वच्छता का संदेश लिखवाया जाए। बच्चों की पढ़ाई में प्रयोग की जाने वाली विज्ञान किट, गणित किट, ग्लोब, मानचित्र भी इसी मद से खरीदा जाएगा। जिन स्कूलों में अलमारी नहीं हैं वह इस मद से खरीद सकते हैं। आग से बचाव के लिए विद्यालयों में लगे अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग कराई जा सकेगी।
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बीमारी को देखते हुए फर्स्टएड बॉक्स में जरूरत दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। यह ध्यान रखा जाए कि दवाएं एक्सपायरी न हों। विद्यालयों के अक्रियाशील उपकरणों की रिपेयरिंग, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर शिक्षा से संबंधी उपकरणों का रख-रखाव इसी मद से किया जाएगा। विद्यालय की आवश्यकतानुसार उच्च गुणवत्तायुक्त सामग्री ही खरीदी जाए। यदि अन्य मद से इनमें कोई कार्य कराया जा चुका है या अनुमोदित है तो ऐसे काम के लिए कंपोजिट ग्रांट का प्रयोग नहीं किया जाएगा। धनराशि का प्रयोग विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष व प्रधान शिक्षक के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। उपभोग प्रमाणपत्र बीईओ को उपलब्ध कराया जाएगा। बीईओ प्रेरणा पोर्टल पर उपलब्ध कंपोजिट ग्रांट विद्यालयवार, मदवार त्रुटिरहित सूचना अपलोड कराएंगे।
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बीएसए प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि बीईओ व प्रधान शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट खर्च करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में कंपोजिट ग्रांट में जमकर हुई थी लूट
वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस जिले के लिए 9 करोड़ रुपये की कंपोजिट ग्रांट जारी की गई थी। जिसमें बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ था। विधान परिषद सदस्य सुनील साजन ने मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तब शासन ने इसकी जांच कराई थी। सामग्री की आपूर्ति करने वाली संस्था को चेक से भुगतान तो कर दिया गया लेकिन हकीकत यह रही कि स्कूलों में सामान पहुंचा तक नहीं। शासनादेश का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त सामग्री क्रय की गई और सामग्री भी घटिया किस्म की थी। इसपर जालौन जिले की मां वैष्णो एजेंसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के साथ ही तत्कालीन डीएम देवेंद्र पांडेय व बीएसए बीके शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। इस घपले की जांच पुलिस की ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) कर रही है।