{"_id":"5803d1bc4f1c1b762b2914fe","slug":"at-dasharee-utsav-mass-gathered","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाभि में तीर लगते ही धरा पर गिरा रावण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाभि में तीर लगते ही धरा पर गिरा रावण
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 17 Oct 2016 12:45 AM IST
विज्ञापन
रामलीला मैदान पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मेघनाद, अहिरावण व कुंभकरण की युद्ध में मृत्यु होने के बाद रावण ने स्वयं राम से युद्ध करने का निर्णय लिया। इसके बाद वह युद्ध के मैदान में उतर गया और भगवान राम व महाप्रतापी रावण के बीच भीषण युद्ध होने लगा। दोनों ओर से तीरों की बौछार हो रही थी। दोनों योद्धा एक-दूसरे पर वार किए जा रहे थे। भगवान राम ने रावण पर सभी प्रकार के शस्त्रों का प्रयोग किया लेकिन रावण पर उनका कोई भी असर नहीं पड़ा। इसके बाद विभीषण ने प्रभु राम को बताया कि वह रावण की नाभि में प्रहार करें तो ही उसकी मृत्यु संभव है राम ने रावण की नाभि पर निशाना साधकर बांण चलाया तो रावण धरा पर गिर गया। रावण के पराजित होते ही चारों ओर राम-लक्ष्मण की जय-जयकार होने लगी। इसके बाद रावण के विशालकाय पुतले को आग के हवाले किया। साकेत धाम में आयोजकों ने दस सिर वाला आतंकवाद का पुतला भी बनवाया। यह पुतला लोगों में आकर्षण का केंद्र रहा।
शहर के साकेत धाम रामलीला मैदान में चल रहे 144वें श्री रामलीला महोत्सव में अंधकार पर उजाले के प्रतीक के रूप में दशानन के साथ आतंकवाद का भी पुतला जलाकर आतंकवाद का विरोध किया गया। इसके अलावा चाइना के उत्पादों का भी विरोध करने का आह्वान समिति के सदस्यों ने किया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष कांतिमोहन गुप्ता, महामंत्री चंद्रप्रकाश अवस्थी, कोषाध्यक्ष जगदीश महेश्वरी, संयोजक जयचंद्र जायसवाल, उपाध्यक्ष अशोक रस्तोगी, कन्हैया अवस्थी, संजय राठी, जगदीश गुप्ता, राजेश भारती, मंत्री प्रेम मिश्रा, महेश गुप्ता, प्रबंधक विनोद शर्मा, संजीव गुप्ता, शशिकांत गुप्ता, मयंक शुक्ला, गिरीश चंद्र शुक्ला, मनीष सिंह सेंगर, अरविंद कमल, गुरुवीर सिंह, सोहनलाल आर्या, अजय सिंह, नवीन चौरसिया, इंदुप्रकाश अवस्थी, केदार नाथ गुप्ता, महिला मंडल से रजनी रस्तोगी, राधा सिन्हा, शोभा पांडेय, राजू प्रजापति, पवन निगम, आलोक शर्मा भी मौजूद रहे। लीला के पूर्व वृंदावन के स्वामी रामशरण के नेतृत्व में मोहन श्याम, प्रेमचंद्र तिवारी व कान्हा ने मानस और भजन गायन से साकेतधाम को भक्तिमय बनाते हुए मौजूद लोगों को तालियां बजाने पर विवश किया। वहीं दिन में चल रही कृष्णलीला में रासलीला का मनमोहक मंचन वृंदावन धाम के कलाकारों ने किया। रामलीला में राम जी की सेना का रावण की सेना से युद्ध का बड़ा रोमांचक प्रस्तुतिकरण हुआ। इसके अलावा रामलीला मैदान वकील संघ में हो रही अधिवक्ताओं की रामलीला में भी रावणवध का सजीव मंचन किया गया।
विज्ञापन
मेले में लगे झूलों ने बच्चों को किया आकर्षित
दशहरा मेले में रावण वध व पुतला दहन के अलावा मेले में लगे झूलों ने भी बच्चों को अपनी ओर आकर्षित किया। लोग अपने बच्चों को झूला झुलाने के लिए लाइन में लगे रहे। इसके अलावा मेले में लगी दुकानों में भी खरीदारों की भीड़ लगी रही। मेले में लगे खाने पीने के स्टालों पर भी लोग अपनी पसंद की चीजों को तैयार करवाते रहे।
विज्ञापन
चाक चौबंद रही सुरक्षा व्यवस्था
मेले में अधिक भीड़ को देखते हुए पुलिस विभाग ने भी मेला परिसर में जगह-जगह पर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर रखा था। मेला परिसर के मुख्य गेट, रावण के पुतले के पास, लीला के मंच के अलावा परिसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस कर्मी तैनात रहे।
खोया-पाया में पहुंचे बच्चे
दशहरा मेले में मेला देखने को आने वाले भटक गए बच्चों की सूचना के लिए एक खोया-पाया केंद्र बनाया गया था। इसमें कई लोगों ने अपने बच्चों के उनसे बिछड़ जाने की जानकारी दी। इसके बाद खोया-पाया केंद्र से लाउडस्पीकर से एलाउंस करवाया गया और लोगों को उनसे बिछड़े लोगों से मिलवा दिया गया।