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छुट्टा मवेशियों से किसान परेशान, अफसर अभयारण्य के लिए नहीं ढूढ़ पाए स्थान
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उन्नाव। किसानों को छुट्टा मवेशियों से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित अभयारण्य के लिए तहसील के अधिकारी जमीन नहीं खोज पा रहे हैं। एक माह बाद भी भूमि संबंधित जानकारी डीएम को नहीं दी गई। इस पर उन्होंने अफसरों को दोबारा पत्र भेजा है।
जिले की सभी छह तहसीलों में अभयारण्य का निर्माण होना है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत कम से कम पांच हजार छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किया जा सकेगा। अभयारण्य के लिए 50 एकड़ भूमि की जरूरत है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए डीएम रवींद्र कुमार ने करीब एक माह पूर्व सभी उपजिलाधिकारियों को पत्र जारी किया था। उन्हें सरकारी जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। अभी तक किसी तहसील से रिपोर्ट नहीं गई। डीएम ने फिर सभी एसडीएम को रिमाइंडर भेजा है। जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
ये होगी व्यवस्था
छुट्टा मवेशियों के लिए चारा, पानी व छाया समेत अन्य व्यवस्थाएं की जानी हैं। परिसर में ही हरे चारे की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए हैं। संरक्षित मवेशियों के गोबर व दूध से कमाई की भी योजना है।
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आंकड़ों की कहानी
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में छुट्टा मवेशियों की संख्या करीब 28 हजार है। इनमें 20 हजार मवेशियों को 201 पशु आश्रयस्थलों में संरक्षित करने का दावा है। शेष मवेशी अभी भी खुले में विचरण कर रहे हैं जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इनसे फसल बचाने के लिए किसान खेत में ही डेरा डालने पर मजबूर हैं।
जिले की छह तहसीलों में अभयारण्य का निर्माण होना है। पूर्व में जिलाधिकारी की ओर से सभी एसडीएम को पत्र भेजा गया था। जिस पर कोई रिपोर्ट नहीं आई। इसके बाद फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। - डॉ. निर्मल कुमार, सीवीओ।
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जिले की सभी छह तहसीलों में अभयारण्य का निर्माण होना है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक योजना के तहत कम से कम पांच हजार छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किया जा सकेगा। अभयारण्य के लिए 50 एकड़ भूमि की जरूरत है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए डीएम रवींद्र कुमार ने करीब एक माह पूर्व सभी उपजिलाधिकारियों को पत्र जारी किया था। उन्हें सरकारी जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। अभी तक किसी तहसील से रिपोर्ट नहीं गई। डीएम ने फिर सभी एसडीएम को रिमाइंडर भेजा है। जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
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ये होगी व्यवस्था
छुट्टा मवेशियों के लिए चारा, पानी व छाया समेत अन्य व्यवस्थाएं की जानी हैं। परिसर में ही हरे चारे की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए हैं। संरक्षित मवेशियों के गोबर व दूध से कमाई की भी योजना है।
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आंकड़ों की कहानी
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में छुट्टा मवेशियों की संख्या करीब 28 हजार है। इनमें 20 हजार मवेशियों को 201 पशु आश्रयस्थलों में संरक्षित करने का दावा है। शेष मवेशी अभी भी खुले में विचरण कर रहे हैं जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। इनसे फसल बचाने के लिए किसान खेत में ही डेरा डालने पर मजबूर हैं।
जिले की छह तहसीलों में अभयारण्य का निर्माण होना है। पूर्व में जिलाधिकारी की ओर से सभी एसडीएम को पत्र भेजा गया था। जिस पर कोई रिपोर्ट नहीं आई। इसके बाद फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। - डॉ. निर्मल कुमार, सीवीओ।