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उद्यमियों के साथ बिजली विभाग कर रहा धोखा
Unnao
Updated Sun, 14 Sep 2014 05:31 AM IST
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उन्नाव। उत्तर प्रदेश सरकार ऊर्जा अनुभाग-3 के शासनादेश संख्या 765/24-3-2009-2000 (124/09) जिसे ऊर्जा सचिव नवनीत सहगल ने 2010 में जारी किया था। आदेश में कहा गया है कि 21 अगस्त 2010 के बाद प्रोडक्शन चालू करने वाले भारी उद्योगों को इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी में छूट दी जाएगी। यह छूट पांच से दस वर्षों तक के लिए होगी। वर्तमान में इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी 7.5 प्रतिशत है। जिससे इस नियम के दायरे में आने वाले उद्योगों को छूट मिलनी चाहिए, लेकिन इस नियम की जानकारी ही सभी उद्यमियों तक नहीं पहुंच सकी। हालत यह है कि उद्यमी पहले को बिलों को सौ फीसदी भुगतान करते रहे और जब उन्हें शासनादेश की जानकारी हुई तो अब वह विभाग से पैसा वापसी के लिए चक्कर लगा रहे हैं।
अधिशासी अभियंता द्वितीय रामबुजारत के मुताबिक बिजली बिल में यूनिट चार्ज (कुल बिजली खपत), रेग्यूलेटरी चार्ज, फिक्स चार्ज व इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी शामिल होते हैं। शासन द्वारा जारी आदेश में अगस्त 2010 से प्रोडक्शन चालू करने वाले भारी उद्योगों को केवल इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी पर छूट दी जानी थी। जो हर साल परिवर्तित होती रहती है। वर्तमान में 7.5 प्रतिशत के आसपास है। बताया कि बिजली की ज्यादा खपत होने के कारण कई भारी उद्योगों को स्वतंत्र फीडर उपलब्ध कराए गए हैं। ताकि इन्हें बिना रुकावट बिजली उपलब्ध कराई जा सके। इन्होंने दावा किया कि हमारे क्षेत्र में शासनादेश का पालन किया जा रहा है। 2010 के बाद के उद्यमियों को छूट दी जा रही है।
केस-1
भारी उद्योगों में शामिल जगदंबा स्टील से बिजली विभाग हर माह डेढ़ करोड़ रुपये से भी ज्यादा का बिजली का बिल के रूप में लेता है। कंपनी को मिलने वाले बिल में हर माह करीब 12 से 15 लाख रुपये इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी (ईडी) के रूप में जाता है। नियमानुसार ईडी से कंपनी को छूट मिलनी चाहिए। जो नहीं मिल रही थी। अभी करीब दो माह पहले ही कंपनी मालिक को साथी उद्यमी के जरिए जानकारी हुई कि ईडी में छूट का शासनादेश भी है। इसके बाद कंपनी ने ईडी के रूप में किए गए भुगतान को वापस लेने के लिए प्रक्रिया शुरू की। कंपनी प्रबंधक मनमोहन सिंह ने बकाया कि शासनादेश की जानकारी न होने के कारण उन्होंने ईडी का भुगतान किया, अब इस पैसा को वापस लेने के लिए बिजली अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
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केस-2
कनिष्क आयरन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक बृजकिशोर यादव अभी तक लगातार ईडी का भुगतान करते आ रहे थे। उन्हें भी जब जानकारी हुई तो करंट लगा। उसमें उन्हें करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की छूट मिलनी चाहिए थे। उन्होंने अधिशासी अभियंता प्रथम एसके मिश्र से संपर्क किया। पहले तो उन्होंने नियम की जानकारी न होने की बात कही लेकिन बाद में कहा कि देखेंगे कि क्या हो सकता है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्य बृजकिशोर यादव ने बताया कि बिजली विभाग इस शासनादेश को छुपाकर उद्यमियों का करोड़ों रुपये दबा गया है। जिसे वापस लेने के लिए वह लोग अब प्रयास कर रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
1-शासनदेश की जानकारी है और भारी उद्योगों से जुड़े उद्यमियों को भी इस बारे में बता दिया गया है। नियमों के दायरे में जो भी भारी उद्योग आता है उसे ईडी में छूट दी जा रही है। अगर किसी से ईडी के रूप में भुगतान लिया गया है तो उसकी वापसी कराई जाएगी। - एसके सक्सेना, अधीक्षण अभियंता, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
2-21 अगस्त 2010 के बाद प्रोडक्शन चालू करने वाले भारी उद्योगों को इस शासनादेश में ईडी में छूट देने के आदेश दिए गए थे लेकिन कई उद्यमियों को इस बारे में जानकारी ही नहीं थी। भारी उद्योगों को बढ़ावा देने वाले इस आदेश की जानकारी विभाग द्वारा उद्यमियों तक पहुंचाई जा रही है। - रवि शर्मा, सहायक प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, उन्नाव
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अधिशासी अभियंता द्वितीय रामबुजारत के मुताबिक बिजली बिल में यूनिट चार्ज (कुल बिजली खपत), रेग्यूलेटरी चार्ज, फिक्स चार्ज व इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी शामिल होते हैं। शासन द्वारा जारी आदेश में अगस्त 2010 से प्रोडक्शन चालू करने वाले भारी उद्योगों को केवल इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी पर छूट दी जानी थी। जो हर साल परिवर्तित होती रहती है। वर्तमान में 7.5 प्रतिशत के आसपास है। बताया कि बिजली की ज्यादा खपत होने के कारण कई भारी उद्योगों को स्वतंत्र फीडर उपलब्ध कराए गए हैं। ताकि इन्हें बिना रुकावट बिजली उपलब्ध कराई जा सके। इन्होंने दावा किया कि हमारे क्षेत्र में शासनादेश का पालन किया जा रहा है। 2010 के बाद के उद्यमियों को छूट दी जा रही है।
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केस-1
भारी उद्योगों में शामिल जगदंबा स्टील से बिजली विभाग हर माह डेढ़ करोड़ रुपये से भी ज्यादा का बिजली का बिल के रूप में लेता है। कंपनी को मिलने वाले बिल में हर माह करीब 12 से 15 लाख रुपये इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी (ईडी) के रूप में जाता है। नियमानुसार ईडी से कंपनी को छूट मिलनी चाहिए। जो नहीं मिल रही थी। अभी करीब दो माह पहले ही कंपनी मालिक को साथी उद्यमी के जरिए जानकारी हुई कि ईडी में छूट का शासनादेश भी है। इसके बाद कंपनी ने ईडी के रूप में किए गए भुगतान को वापस लेने के लिए प्रक्रिया शुरू की। कंपनी प्रबंधक मनमोहन सिंह ने बकाया कि शासनादेश की जानकारी न होने के कारण उन्होंने ईडी का भुगतान किया, अब इस पैसा को वापस लेने के लिए बिजली अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
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केस-2
कनिष्क आयरन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक बृजकिशोर यादव अभी तक लगातार ईडी का भुगतान करते आ रहे थे। उन्हें भी जब जानकारी हुई तो करंट लगा। उसमें उन्हें करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की छूट मिलनी चाहिए थे। उन्होंने अधिशासी अभियंता प्रथम एसके मिश्र से संपर्क किया। पहले तो उन्होंने नियम की जानकारी न होने की बात कही लेकिन बाद में कहा कि देखेंगे कि क्या हो सकता है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्य बृजकिशोर यादव ने बताया कि बिजली विभाग इस शासनादेश को छुपाकर उद्यमियों का करोड़ों रुपये दबा गया है। जिसे वापस लेने के लिए वह लोग अब प्रयास कर रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
1-शासनदेश की जानकारी है और भारी उद्योगों से जुड़े उद्यमियों को भी इस बारे में बता दिया गया है। नियमों के दायरे में जो भी भारी उद्योग आता है उसे ईडी में छूट दी जा रही है। अगर किसी से ईडी के रूप में भुगतान लिया गया है तो उसकी वापसी कराई जाएगी। - एसके सक्सेना, अधीक्षण अभियंता, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
2-21 अगस्त 2010 के बाद प्रोडक्शन चालू करने वाले भारी उद्योगों को इस शासनादेश में ईडी में छूट देने के आदेश दिए गए थे लेकिन कई उद्यमियों को इस बारे में जानकारी ही नहीं थी। भारी उद्योगों को बढ़ावा देने वाले इस आदेश की जानकारी विभाग द्वारा उद्यमियों तक पहुंचाई जा रही है। - रवि शर्मा, सहायक प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, उन्नाव