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स्वजलधारा घोटाले में दो एनजीओ पर मुकदमा
Unnao
Updated Sun, 06 Apr 2014 05:30 AM IST
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उन्नाव। हिलौली ब्लाक क्षेत्र की 9 ग्राम पंचायतों में स्वजलधारा योजना के तहत कागजों पर पानी की टंकियों का निर्माण दिखाकर लाखों रुपये हड़पने वाली दो एनजीओ पर बीडीओ ने मौरावां थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस दोनों स्वयंसेवी संगठनों के संचालकों की गिरफ्तारी में जुट गई है।
हिलौली ब्लाक क्षेत्र की 9 ग्राम पंचायतों में स्वजलधारा योजना के तहत 35 पानी की टंकियों का निर्माण होना था। सन् 2013 में इन टंकियों के निर्माण का जिम्मा बछरावां रायबरेली की प्रेमा ग्राम्य विकास संस्थान व किदवई नगर की मेसर्स उत्तम कंस्ट्रक्शन नामक एनजीओ को दिया गया था। एनजीओ ने विभाग के एक अधिकारी से सांठगांठ करके अधूरे निर्माण कार्यों को दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया। जांच में करीब 33 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ। करीब तीन माह पहले खुलासे के बाद एनजीओ पर एफआईआर की कवायद शुरू हुई। बाद में डीएम ने स्वयंसेवी संस्था को काम पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया। एनजीओ की ओर से कोई रिस्पांस न मिलने पर डीएम ने फिर एफआईआर के आदेश दिए। डीडीओ कार्यालय के एक बाबू ने सदर कोतवाली में तहरीर तो दे दी लेकिन तत्कालीन सीडीओ ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया। एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद फरवरी माह में प्रेमा ग्राम्य विकास संस्थान बछरावां रायबरेली को अंतिम मौका दे दिया गया। इसकी निगरानी के लिए 3 सदस्यीय टीम गठित कर दी गई। इसके बाद भी जब स्वयंसेवी संगठन ने कोई कार्य नहीं किया तो जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए खंड विकास अधिकारी को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए। बीडीओ हिलौली राबिया बेगम ने मौरावां थाने में दोनों एनजीओ के खिलाफ धोखाधड़ी कर पैसों का भुगतान कराने और मौके पर कोई काम न होने का मुकदमा दर्ज कराया।
एनजीओ ने नहीं कराया था एग्रीमेंट
जांच पड़ताल के दौरान मनरेगा उपायुक्त को पता चला था कि एनजीओ ने किसी की भी जमीन का एग्रीमेंट तक नहीं कराया। जनरेटर आदि क्रय नहीं किया। यहां तक की चेकबुक/पासबुक भी एनजीओ के पदाधिकारी अपने पास ही रखे रहें और धोखे से चेक काटकर भुगतान प्राप्त करते रहे। विभाग के एक अधिकारी के निर्देश पर एनजीओ को समय-समय पर भुगतान होता रहा और इस तरह से ठेकेदार ने योजना के मुख्य कर्ताधर्ता से सांठगांठ करके 33 लाख रुपये निकालकर हड़प लिया। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद ही जिला प्रशासन ने एनजीओ पर एफआईआर की कार्रवाई शुरू की थी।
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हिलौली ब्लाक क्षेत्र की 9 ग्राम पंचायतों में स्वजलधारा योजना के तहत 35 पानी की टंकियों का निर्माण होना था। सन् 2013 में इन टंकियों के निर्माण का जिम्मा बछरावां रायबरेली की प्रेमा ग्राम्य विकास संस्थान व किदवई नगर की मेसर्स उत्तम कंस्ट्रक्शन नामक एनजीओ को दिया गया था। एनजीओ ने विभाग के एक अधिकारी से सांठगांठ करके अधूरे निर्माण कार्यों को दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया। जांच में करीब 33 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ। करीब तीन माह पहले खुलासे के बाद एनजीओ पर एफआईआर की कवायद शुरू हुई। बाद में डीएम ने स्वयंसेवी संस्था को काम पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया। एनजीओ की ओर से कोई रिस्पांस न मिलने पर डीएम ने फिर एफआईआर के आदेश दिए। डीडीओ कार्यालय के एक बाबू ने सदर कोतवाली में तहरीर तो दे दी लेकिन तत्कालीन सीडीओ ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया। एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद फरवरी माह में प्रेमा ग्राम्य विकास संस्थान बछरावां रायबरेली को अंतिम मौका दे दिया गया। इसकी निगरानी के लिए 3 सदस्यीय टीम गठित कर दी गई। इसके बाद भी जब स्वयंसेवी संगठन ने कोई कार्य नहीं किया तो जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए खंड विकास अधिकारी को रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए। बीडीओ हिलौली राबिया बेगम ने मौरावां थाने में दोनों एनजीओ के खिलाफ धोखाधड़ी कर पैसों का भुगतान कराने और मौके पर कोई काम न होने का मुकदमा दर्ज कराया।
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एनजीओ ने नहीं कराया था एग्रीमेंट
जांच पड़ताल के दौरान मनरेगा उपायुक्त को पता चला था कि एनजीओ ने किसी की भी जमीन का एग्रीमेंट तक नहीं कराया। जनरेटर आदि क्रय नहीं किया। यहां तक की चेकबुक/पासबुक भी एनजीओ के पदाधिकारी अपने पास ही रखे रहें और धोखे से चेक काटकर भुगतान प्राप्त करते रहे। विभाग के एक अधिकारी के निर्देश पर एनजीओ को समय-समय पर भुगतान होता रहा और इस तरह से ठेकेदार ने योजना के मुख्य कर्ताधर्ता से सांठगांठ करके 33 लाख रुपये निकालकर हड़प लिया। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद ही जिला प्रशासन ने एनजीओ पर एफआईआर की कार्रवाई शुरू की थी।
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