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किसानों को बिवाई जैसा दर्द दे रही शारदा नहर
Unnao
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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बीघापुर (उन्नाव)। कभी बीघापुर क्षेत्र के किसानों की भाग्य रेखा रही शारदा नहर अब उन्हेें बिवाइयों जैसा दर्द दे रही है। विभागीय उपेक्षा का दंश झेल रहे क्षेत्रीय किसानोें की ओर किसी का भी ध्यान नहीं है। हजारों बीघा जमीन बिना पलेवा के परती पड़ी है। किसानों के माथे पर गेहूं न बो पाने से चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।
शारदा नहर बीघापुर खंड की टेल बीघापुर हो जाने से कई साल से टेल तक पानी नहीं पहुंच सका। इसके कारण पहाड़पुर से लेकर बारा तक पचास गांवों की हजारोें एकड़ भूमि बिना पानी पलेवा से परती पड़ी है। किसानों के हितों की आवाज उठाने का दम भरने वाले चुनाव तक ही अपनी आवाज बुलंद करते हैं। चावल उत्पादन में अग्रणी रहे पहाड़ापुर, मेहरवानखेड़ा, कुलहा, पाही, बीघापुर, आशाखेड़ा, घाटमपुर खुर्द, टेढ़ा, बारा आदि गांवों में एक दशक से चावल उत्पादन नहीं हो सका है। नहर की तली में खड़ी बड़ी-बड़ी झाड़ियां नहर में दशकों से पानी न आने की कहानी बयां कर रही हैं। किसानों के आगे भुखमरी मुंह बाए खड़ी है। दर्जनों किसान क्षेत्र से शहर पलायन कर चुके हैं। नहर विभाग के अधिकारियों को सरकार के आदेशों पर अमल करना मुनासिब नहीं लग रहा। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद महज कागज तक ही सीमित होकर रह गई है।
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शारदा नहर बीघापुर खंड की टेल बीघापुर हो जाने से कई साल से टेल तक पानी नहीं पहुंच सका। इसके कारण पहाड़पुर से लेकर बारा तक पचास गांवों की हजारोें एकड़ भूमि बिना पानी पलेवा से परती पड़ी है। किसानों के हितों की आवाज उठाने का दम भरने वाले चुनाव तक ही अपनी आवाज बुलंद करते हैं। चावल उत्पादन में अग्रणी रहे पहाड़ापुर, मेहरवानखेड़ा, कुलहा, पाही, बीघापुर, आशाखेड़ा, घाटमपुर खुर्द, टेढ़ा, बारा आदि गांवों में एक दशक से चावल उत्पादन नहीं हो सका है। नहर की तली में खड़ी बड़ी-बड़ी झाड़ियां नहर में दशकों से पानी न आने की कहानी बयां कर रही हैं। किसानों के आगे भुखमरी मुंह बाए खड़ी है। दर्जनों किसान क्षेत्र से शहर पलायन कर चुके हैं। नहर विभाग के अधिकारियों को सरकार के आदेशों पर अमल करना मुनासिब नहीं लग रहा। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद महज कागज तक ही सीमित होकर रह गई है।
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