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Unnao News: डी-फार्मा कराने के नाम पर 53 छात्रों से 23 लाख लेकर थमाई फर्जी डिग्री
Thu, 05 Jun 2025 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Thu, 05 Jun 2025 11:43 PM IST
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बेहटामुजावर। डी-फार्मा कराने के नाम पर लखनऊ के एक कॉलेज प्रबंधक ने 53 छात्रों से 23 लाख रुपये हड़प लिए। बाद में छात्रों को जो डिग्री दी गई वह फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकरण से पहले हुए ऑनलाइन सत्यापन में फर्जी निकली। न्यायालय के आदेश पर कॉलेज प्रबंधक पर रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है।
बेहटामुजावर थानाक्षेत्र के गांव अटवावैक स्थित दुर्गाप्रसाद रामस्वरूप विद्यालय के प्रबंधक तेजकुमार ने न्यायालय में शिकायती पत्र देकर बताया था कि वह अपने काॅलेज से पढ़कर निकलने वाले छात्रों का प्रवेश तकनीकी संस्थानों में कराते हैं। दो साल पहले स्कूल में हुए सम्मान समारोह में उनकी मुलाकात लखनऊ के हजरतगंज के गुडलक अपार्टमेंट नजरबाग निवासी आयुष तिवारी से हुई थी। आयुष ने अपने को अटल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट का प्रबंधक बताते हुए कहा था कि उनके यहां भी डी-फार्मा का कोर्स कराया जाता है। उनके कहने पर करीब 53 छात्रों का डी-फार्मा में उनके कॉलेज में दाखिला कराया और 23 लाख रुपये फीस जमा कर दी। इसकी रसीद भी दी गई। दो साल का कोर्स पूरा होने पर कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को डी-फार्मा का प्रमाणपत्र और अंकपत्र दिए।
छात्रों ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में जब पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया तो डिग्री के सत्यापन में वह फर्जी मिली। न्यायालय ने प्रबंधक पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। प्रबंधक तेज कुमार ने बताया कि लखनऊ के प्रबंधक आयुष तिवारी ने 53 फर्जी मार्कशीट दी हैं, उन्हें न्यायालय में लगाया गया है। थानाध्यक्ष मुन्ना कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर प्रबंधक आयुष तिवारी पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।
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यह था मामला
हरदोई जिले के थाना कासिमपुर निवासी प्रशांत मिश्रा ने 29 सितंबर 2024 को बांगरमऊ सीओ अरविंद कुमार चौरसिया को प्रार्थना देकर बताया था कि अटवावैक के दुर्गाप्रसाद रामरूप एलोपैथिक फार्मेसी कॉलेज में डी-फाॅर्मा के लिए संपर्क किया था। कॉलेज प्रबंधक तेज कुमार और कॉलेज के प्रधान लिपिक अवध प्रकाश ने दो साल के कोर्स के लिए प्रति साल की 90 हजार रुपये फीस बताई थी। पहले साल की फीस जमा कर अक्तूबर 2021 को प्रवेश लिया था। दूसरे साल की भी फीस जमा करा ली गई थी। कोर्स पूरा होने पर मुरादाबाद की आईएफटीएम यूनिवर्सिटी की डी-फाॅर्मा प्रथम वर्ष 2018-19 और द्वितीय वर्ष 2019-20 की मार्कशीट भी दी गई। दो साल पुरानी मार्कशीट देख फर्जी होने का शक हुआ तो आरटीआई के माध्यम से यूनिवर्सिटी से सूचना मांगी। प्रबंधक ने अप्रैल 2024 को जो जवाब दिया उसमें मार्कशीट फर्जी निकली। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर 29 नवंबर 2024 को कॉलेज प्रबंधक और प्रधान लिपिक को जेल भेजा था, हालांकि जेल जाने के 14 वें दिन प्रबंधक की और लिपिक को 19 वें दिन कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
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बेहटामुजावर थानाक्षेत्र के गांव अटवावैक स्थित दुर्गाप्रसाद रामस्वरूप विद्यालय के प्रबंधक तेजकुमार ने न्यायालय में शिकायती पत्र देकर बताया था कि वह अपने काॅलेज से पढ़कर निकलने वाले छात्रों का प्रवेश तकनीकी संस्थानों में कराते हैं। दो साल पहले स्कूल में हुए सम्मान समारोह में उनकी मुलाकात लखनऊ के हजरतगंज के गुडलक अपार्टमेंट नजरबाग निवासी आयुष तिवारी से हुई थी। आयुष ने अपने को अटल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट का प्रबंधक बताते हुए कहा था कि उनके यहां भी डी-फार्मा का कोर्स कराया जाता है। उनके कहने पर करीब 53 छात्रों का डी-फार्मा में उनके कॉलेज में दाखिला कराया और 23 लाख रुपये फीस जमा कर दी। इसकी रसीद भी दी गई। दो साल का कोर्स पूरा होने पर कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को डी-फार्मा का प्रमाणपत्र और अंकपत्र दिए।
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छात्रों ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया में जब पंजीकरण कराने के लिए आवेदन किया तो डिग्री के सत्यापन में वह फर्जी मिली। न्यायालय ने प्रबंधक पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। प्रबंधक तेज कुमार ने बताया कि लखनऊ के प्रबंधक आयुष तिवारी ने 53 फर्जी मार्कशीट दी हैं, उन्हें न्यायालय में लगाया गया है। थानाध्यक्ष मुन्ना कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर प्रबंधक आयुष तिवारी पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है।
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यह था मामला
हरदोई जिले के थाना कासिमपुर निवासी प्रशांत मिश्रा ने 29 सितंबर 2024 को बांगरमऊ सीओ अरविंद कुमार चौरसिया को प्रार्थना देकर बताया था कि अटवावैक के दुर्गाप्रसाद रामरूप एलोपैथिक फार्मेसी कॉलेज में डी-फाॅर्मा के लिए संपर्क किया था। कॉलेज प्रबंधक तेज कुमार और कॉलेज के प्रधान लिपिक अवध प्रकाश ने दो साल के कोर्स के लिए प्रति साल की 90 हजार रुपये फीस बताई थी। पहले साल की फीस जमा कर अक्तूबर 2021 को प्रवेश लिया था। दूसरे साल की भी फीस जमा करा ली गई थी। कोर्स पूरा होने पर मुरादाबाद की आईएफटीएम यूनिवर्सिटी की डी-फाॅर्मा प्रथम वर्ष 2018-19 और द्वितीय वर्ष 2019-20 की मार्कशीट भी दी गई। दो साल पुरानी मार्कशीट देख फर्जी होने का शक हुआ तो आरटीआई के माध्यम से यूनिवर्सिटी से सूचना मांगी। प्रबंधक ने अप्रैल 2024 को जो जवाब दिया उसमें मार्कशीट फर्जी निकली। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर 29 नवंबर 2024 को कॉलेज प्रबंधक और प्रधान लिपिक को जेल भेजा था, हालांकि जेल जाने के 14 वें दिन प्रबंधक की और लिपिक को 19 वें दिन कोर्ट से जमानत मिल गई थी।