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पांच माह में जिले में 284 नवजात ने तोड़ा दम

Tue, 14 Jan 2020 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 12:27 AM IST
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284 newborn deaths in district in five months
जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात । - फोटो : UNNAO
उन्नाव। गर्भवती महिलाओं के संस्थागत व सुरक्षित प्रसव को लेकर सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं। उसके बाद भी बच्चों की मौत के आंकड़ों में कमी नहीं आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के पिछले पांच महीने के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पूरे जिले में प्रसव के बाद 284 नवजात की मौत हो गई। वहीं, महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 11 बच्चों ने दम तोड़ दिया। यही कुछ हाल कोल्ड निमोनिया में शामिल बच्चों का है जिसमें 29 बच्चों ने दम तोड़ा। जबकि अस्पताल के रजिस्टर में 18 बच्चों की ही मौत दर्ज है।
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बच्चों के इलाज का मुद्दा इस समय बहस का विषय बना हुआ है। राजस्थान के कोटा में 130 बच्चों की मौत के बाद खलबली मची हुई है। उन्नाव शहर भी इससे अछूता नहीं है। जिले में महिला अस्पताल के साथ 16 सीएचसी व 9 न्यू पीएचसी संचालित हैं। अगस्त, सितंबर, अक्तूबर नवंबर व दिसंबर महीने में 17,165 प्रसव हुए। जिसमें 284 नवजातों ने दम तोड़ दिया। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग दर्शा रहा है। वहीं 153 बच्चे ऐसे रहे जिनकी हालत गंभीर देख उन्हें सीएचसी से जिला महिला अस्पताल और यहां से कानपुर रेफर कर दिया गया। रास्ते में दस बच्चों ने दम तोड़ दिया। यह अस्पताल के आंकड़ों में दर्ज ही नहीं हुए।
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मौत का आंकड़ा कम करने के लिए स्टाफ नर्स व एएनएम को स्पेशल ट्रेनिंग कराई जाएगी। इसमें कुछ बच्चे ऐेसे भी हैं जो स्वास्थ्य केंद्रों से जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इन आंकड़ों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
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-कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार, सीएमओ
बच्चों को जन्म के तत्काल बाद अक्सर बच्चों को परिजन चाय व पानी रुई के फीहे से पिला देते हैं यह उन्हें गंभीर बीमार कर देता है। समय से इलाज न मिलने पर बच्चों की मौत हो जाती है। पुरवा सीएचसी में तैनात महिला डॉ. सीमारानी कहती हैं कि प्रसूता व उनके साथ के परिजनों को रोजाना अलर्ट किया जाता है कि बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाएं। दिक्कत होने पर डॉक्टर को दिखाएं। उसके बाद भी परिजन बच्चों को ऊपर का दूध व ठंडा पानी तक पिला देते हैं। इससे दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि जन्म लेने वाले बच्चों में करीब दस फीसदी की मौत हो जाती है। सर्दियाें के मौसम में रेडियंट वार्मर न मिल पाना एक बड़ी वजह है। कई बार ऐसे बच्चे भी भर्ती होते हैं जिनकी हालत बेहद नाजुक होती है। वह निमोनिया, हार्ट, ब्रेन व इंफेक्शन जैसी बीमारियों से ग्रसित होते हैं। महिला अस्पताल के एसएनसीयू में नवंबर महीने में 90 बच्चे भर्ती हुए जिसमें 5 ने दम तोड़ दिया। वहीं दिसंबर महीने में 85 बच्चे भर्ती हुए जिसमें 6 की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में सारी व्यवस्था होने के बाद भी कई बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें काफी प्रयास के बाद भी नहीं बचाया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए संचालित प्रमुख योजनाएं
1- रिप्रेजेंटेटिव चाइल्ड हेल्थ।
2- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना। (इसमें पहली लड़की होने पर 5 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है)
3- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना।
4- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम।
5- जननी सुरक्षा योजना। (इसमें ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूता को 1400 व शहरी क्षेत्र में दिए जाते हैं 1000 रुपये)
बीते पांच माह में प्रसव व नवजात की मौत के आंकड़े
महीना कुल प्रसव नवजात मृत्यु
अगस्त 3954 59
सितंबर 3908 60
अक्तूबर 3269 59
नवंबर 3215 44
दिसंबर 3269 62
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