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पावर कारपोरेशन ने गड़ाई ‘गड़बड़’ बिल वाले उपभोक्ताओं पर नजरें
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:44 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। हर माह कम रीडिंग का बिल बनवाने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर पावर कारपोरेशन ने नजरें गड़ा दी हैं। इसके लिए टीमें गठित की गई हैं। टीम में शामिल इंजीनियर बिलों का डेटा माइनिंग करके गड़बड़ उपभोक्ताओं की सूची अधिकारियों को देते हैं। जिसके बाद ऐसे उपभोक्ताओं पर छापेमारी की जाती है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में मीटर रीडरों के जरिये रीडिंग लेकर बिजली विभाग बिल जारी करता है। रीडर उपभोक्ताओं से मिलकर रीडिंग कम दिखाकर बिल बनाते हैं। फिर चार से छह माह बाद मीटर गड़बड़ बताकर उसे बदलवा देते हैं। सभी उपभोक्ताओं का डेटा पावर कारपोरेशन के पास भी पहुंचता है। पावर कारपोरेशन जिनके बिल पिछले चार से पांच माह में गड़बड़ आ रहे हैं। ऐसे कनेक्शनों की डेटा माइनिंग के लिए टीमें गठित कर दी हैं। बड़े लोड वाले कनेक्शनों में गड़बड़ी मिलने पर तुरंत उसकी सूची विद्युत विजिलेंस टीम को दे जाती है। छोटे लोड वाले कनेक्शनों की लिस्ट संबंधित जिले के अधिकारियों को छापेमारी के लिए भेजी जाती है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दो माह में विजिलेंस के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बिजली अधिकारियों ने छापेमारी तेज कर दी है।
छंटनी के बाद मार्कर लगाकर भेजी जाती है लिस्ट
पावर कारपोरेशन में लगी टीमें डेटा माइनिंग करने के बाद उपभोक्ताओं की छंटनी करती हैं। फिर गड़बड़ी वाले उपभोक्ताओं के नाम के आगे मार्कर लगाकर लिस्ट भेजी जाती है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों को संबंधित के यहां भेजकर जांच कराई जाती है। गड़बड़ी मिलने पर बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जाता है।
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आरके कृष्णानी, अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम उन्नाव।
-लखनऊ स्थित कार्यालय में ऐसे उपभोक्ताओं की डेटा माइनिंग के लिए लगाई गई हैं टीमें
-टीम के इंजीनियर गड़बड़ वाले बिलों की डेटा माइनिंग करके जांच के लिए देते हैं सूची
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उन्नाव। हर माह कम रीडिंग का बिल बनवाने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर पावर कारपोरेशन ने नजरें गड़ा दी हैं। इसके लिए टीमें गठित की गई हैं। टीम में शामिल इंजीनियर बिलों का डेटा माइनिंग करके गड़बड़ उपभोक्ताओं की सूची अधिकारियों को देते हैं। जिसके बाद ऐसे उपभोक्ताओं पर छापेमारी की जाती है।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में मीटर रीडरों के जरिये रीडिंग लेकर बिजली विभाग बिल जारी करता है। रीडर उपभोक्ताओं से मिलकर रीडिंग कम दिखाकर बिल बनाते हैं। फिर चार से छह माह बाद मीटर गड़बड़ बताकर उसे बदलवा देते हैं। सभी उपभोक्ताओं का डेटा पावर कारपोरेशन के पास भी पहुंचता है। पावर कारपोरेशन जिनके बिल पिछले चार से पांच माह में गड़बड़ आ रहे हैं। ऐसे कनेक्शनों की डेटा माइनिंग के लिए टीमें गठित कर दी हैं। बड़े लोड वाले कनेक्शनों में गड़बड़ी मिलने पर तुरंत उसकी सूची विद्युत विजिलेंस टीम को दे जाती है। छोटे लोड वाले कनेक्शनों की लिस्ट संबंधित जिले के अधिकारियों को छापेमारी के लिए भेजी जाती है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दो माह में विजिलेंस के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बिजली अधिकारियों ने छापेमारी तेज कर दी है।
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छंटनी के बाद मार्कर लगाकर भेजी जाती है लिस्ट
पावर कारपोरेशन में लगी टीमें डेटा माइनिंग करने के बाद उपभोक्ताओं की छंटनी करती हैं। फिर गड़बड़ी वाले उपभोक्ताओं के नाम के आगे मार्कर लगाकर लिस्ट भेजी जाती है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों को संबंधित के यहां भेजकर जांच कराई जाती है। गड़बड़ी मिलने पर बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया जाता है।
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आरके कृष्णानी, अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम उन्नाव।
-लखनऊ स्थित कार्यालय में ऐसे उपभोक्ताओं की डेटा माइनिंग के लिए लगाई गई हैं टीमें
-टीम के इंजीनियर गड़बड़ वाले बिलों की डेटा माइनिंग करके जांच के लिए देते हैं सूची