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एक माह तक गंगा जल पर रहेगी कड़ी नजर
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:00 AM IST
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उन्नाव। कुंभ से पहले गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद शुरू कर दी गई है। प्रदूषण विभाग लगातार एक माह तक गंगा के पानी पर नजर रखेगा। गंगा तक पहुंचने वाले नालों की 24 घंटे मानीटरिंग की जाएगी। शासन ने कुंभ स्नानशुरू होने से पहले गंगाजल को हर हाल में शुद्ध करने के निर्देश दिए हैं। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन व प्रदूषण विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
15 दिसंबर से 15 मार्च तक चलने वाले कुंभ स्नान से पहले गंगा के पानी को शुद्ध किया जा सके इसके लिए शासन गंभीर है। शासन ने गंगा व इसकी सहायक नदियों के जल की गुणवत्ता जांचने व प्रदूषण फैला रहे नालों की टेपिंग करने के निर्देश दे दिए हैं। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पानी के नमूने लेने, प्रदूषित पानी का उत्प्रवाह कर रही टेनरियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। शासन ने निर्देश दिया है कि कुंभ स्नान से एक माह पहले से ही गंगा के पानी का सप्ताह में कम से कम दो बार नमूना जरूर लिया जाए। जांच में अगर पानी प्रदूषित मिलता है या प्रदूषण की मात्रा बढ़ती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएग। उधर एनजीटी ने भी अपने आदेश में साफ कहा है कि गंगा के पानी की जांच रिपोर्ट उस तक भेजी जाए। जिम्मेदार अधिकारी अगर प्रदूषण पर लगाम नहीं लगा सके तो उन पर कार्रवाई होगी।
आदेश का होगा पालन
जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर नजर रखी जा सके इसके लिए जिलास्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है। टीम में प्रदूषण विभाग के अलावा प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। यह समिति चर्म इकाइयों का निरीक्षण करेगी। प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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-15 दिसंबर से शुरू होगा कुंभ स्नान, हर सप्ताह गंगाजल की होगी जांच
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15 दिसंबर से 15 मार्च तक चलने वाले कुंभ स्नान से पहले गंगा के पानी को शुद्ध किया जा सके इसके लिए शासन गंभीर है। शासन ने गंगा व इसकी सहायक नदियों के जल की गुणवत्ता जांचने व प्रदूषण फैला रहे नालों की टेपिंग करने के निर्देश दे दिए हैं। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पानी के नमूने लेने, प्रदूषित पानी का उत्प्रवाह कर रही टेनरियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। शासन ने निर्देश दिया है कि कुंभ स्नान से एक माह पहले से ही गंगा के पानी का सप्ताह में कम से कम दो बार नमूना जरूर लिया जाए। जांच में अगर पानी प्रदूषित मिलता है या प्रदूषण की मात्रा बढ़ती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएग। उधर एनजीटी ने भी अपने आदेश में साफ कहा है कि गंगा के पानी की जांच रिपोर्ट उस तक भेजी जाए। जिम्मेदार अधिकारी अगर प्रदूषण पर लगाम नहीं लगा सके तो उन पर कार्रवाई होगी।
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आदेश का होगा पालन
जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर नजर रखी जा सके इसके लिए जिलास्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया है। टीम में प्रदूषण विभाग के अलावा प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। यह समिति चर्म इकाइयों का निरीक्षण करेगी। प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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-15 दिसंबर से शुरू होगा कुंभ स्नान, हर सप्ताह गंगाजल की होगी जांच