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पॉलिथीन प्रतिबंध ने दी कुम्हार के चाक को रफ्तार
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 29 Jan 2016 01:39 AM IST
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सरकार के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने से अब कुम्हारों के दिन बहुरने की उम्मीद जाग गई है। पॉलिथीन बंदी के बाद अब चाय की दुकानों में मिट्टी के कुल्हड़ों की मांग बढ़ गई है।
अभी तक लोग चाय की दुकानों से पॉलिथीन में पैक करवाकर चाय ले जाते थे, लेकिन अब इस पर प्रतिबंध लगने से चाय दुकानदार दुकानों पर पॉलिथीन के साथ-साथ प्लास्टिक ग्लास रखने में डर रहे हैं। इससे चाय दुकानों पर कुल्हड़ की मांग बढ़ गई है। इसके चलते शहर के अलावा गांवों में भी कुम्हारों के ठप पडे़ कारोबार ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।
पॉलिथीन जहां एक ओर वातावरण व आम जनजीवन के लिए अभिशाप बनी हुई थी। वहीं यह गरीब तबके के लोगों की रोजी-रोटी को भी प्रभावित कर रही थी। पॉलिथीन के चलन से मिट्टी से कुल्हड़ आदि बनाने वाले कुम्हारों का व्यापार ठप हो गया था लेकिन, अब इन लोगों को अपने दिन बहुरने की उम्मीद जगी हैं।
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लोक नगर निवासी प्रसादी प्रजापति ने बताया कि वह चाक पर मिट्टी से कुल्हड़ बनाने का काम 20 साल से कर रहा है। पॉलिथीन के चलन से पहले वह दिन में एक हजार कुल्हड़ रोज तैयार कर बेच लेता था। बाजार में पॉलीथिन के बढ़े चलन से लोग चाय दूध आदि भी पॉलिथीन में ही ले जाने लगे और कुल्हड़ की मांग घटती गई।
प्रसादी की मानें तो दस साल से उसका कारोबार ठप पड़ा था। बताया कि पॉलिथीन कि की बंदी के बाद अब फिर से उसके पास कुल्हड़ की मांग आने लगी है और उसने फिर से चाक संभाल ली है। बताया मौजूदा समय में वह दिन में 400-500 कुल्हड़ तैयार कर रहा है और इसे वह 40 रुपये सैकड़ा के हिसाब से बेचकर रोजी-रोटी की व्यवस्था करने लगा है।
यहीं के निवासी मूलचंद्र प्रजापति, परमेश्वर प्रजापति, आशीष प्रजापति, सूरज, मोनू, दीपक, दिलीप व कुलदीप जैसे युवा जो अपने पुश्तैनी काम को छोड़कर अन्य किसी काम को करने लगे थे, अब इसी काम को फिर से करने का मन बना रहे हैं।
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अभी तक लोग चाय की दुकानों से पॉलिथीन में पैक करवाकर चाय ले जाते थे, लेकिन अब इस पर प्रतिबंध लगने से चाय दुकानदार दुकानों पर पॉलिथीन के साथ-साथ प्लास्टिक ग्लास रखने में डर रहे हैं। इससे चाय दुकानों पर कुल्हड़ की मांग बढ़ गई है। इसके चलते शहर के अलावा गांवों में भी कुम्हारों के ठप पडे़ कारोबार ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।
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पॉलिथीन जहां एक ओर वातावरण व आम जनजीवन के लिए अभिशाप बनी हुई थी। वहीं यह गरीब तबके के लोगों की रोजी-रोटी को भी प्रभावित कर रही थी। पॉलिथीन के चलन से मिट्टी से कुल्हड़ आदि बनाने वाले कुम्हारों का व्यापार ठप हो गया था लेकिन, अब इन लोगों को अपने दिन बहुरने की उम्मीद जगी हैं।
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लोक नगर निवासी प्रसादी प्रजापति ने बताया कि वह चाक पर मिट्टी से कुल्हड़ बनाने का काम 20 साल से कर रहा है। पॉलिथीन के चलन से पहले वह दिन में एक हजार कुल्हड़ रोज तैयार कर बेच लेता था। बाजार में पॉलीथिन के बढ़े चलन से लोग चाय दूध आदि भी पॉलिथीन में ही ले जाने लगे और कुल्हड़ की मांग घटती गई।
प्रसादी की मानें तो दस साल से उसका कारोबार ठप पड़ा था। बताया कि पॉलिथीन कि की बंदी के बाद अब फिर से उसके पास कुल्हड़ की मांग आने लगी है और उसने फिर से चाक संभाल ली है। बताया मौजूदा समय में वह दिन में 400-500 कुल्हड़ तैयार कर रहा है और इसे वह 40 रुपये सैकड़ा के हिसाब से बेचकर रोजी-रोटी की व्यवस्था करने लगा है।
यहीं के निवासी मूलचंद्र प्रजापति, परमेश्वर प्रजापति, आशीष प्रजापति, सूरज, मोनू, दीपक, दिलीप व कुलदीप जैसे युवा जो अपने पुश्तैनी काम को छोड़कर अन्य किसी काम को करने लगे थे, अब इसी काम को फिर से करने का मन बना रहे हैं।