अफसरों की खींचतान में फंसा मस्तिष्क ज्वर का इलाज

लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 21 Dec 2012 01:29 PM IST
treatment of meningitis being neglected by medical officers
उत्तर प्रदेश में मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित बच्चों का इलाज अफसरों की खींचतान में फंस गया है। करीब साल भर से गोरखपुर मेडिकल कालेज समेत नौ जिलों में बच्चों के लिए आईसीयू बनाने की कवायद चल रही है। लेकिन अब तक आईसीयू के लिए पीडियाट्रिक वेंटीलेटर ही नहीं खरीदे गए हैं।

ऐसा तब है जबकि एनआरएचएम की ओर से 7.86 करोड़ रुपए गोरखपुर की जिला स्वास्थ्य समिति को भेजे जा चुके हैं। जिलाधिकारी गोरखपुर की अगुवाई वाली इस समिति ने अब तक वेंटीलेटर और उपकरणों की खरीद पर कोई फैसला ही नहीं लिया है।

मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने खुद जापानी इंसेफ्लाइटिस और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम के उपचार के लिए वक्त से पहले ही आईसीयू बनाने और वेंटीलेटर लगाने के निर्देश दिए थे। एनआरएचएम की ओर से आनन-फानन में पैसा भी जिला स्वास्थ्य समिति को भेज दिया गया। दरअसल जून से ही जेई और एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर देते हैं। इस साल भी 2000 से ज्यादा बच्चे दोनों बीमारियों का शिकार हुए और 550 बच्चे मौत के मुंह में पहुंच गए।

इन आईसीयू का निर्माण और वेंटीलेटर की खरीद सिंतबर तक कर ली जानी थी, लेकिन जिला स्वास्थ्य समिति के पास वेंटीलेटर खरीद की प्रक्रिया अटकी हुई है। सूत्रों का कहना है कि इन वेंटीलेटर और उपकरणों की स्थापना के लिए सरकार की ओर से भी लगातार दबाव बन रहा था और हाईकोर्ट भी बच्चों की लगातार हो रही मौतों पर गंभीर था। वेंटीलेटर खरीद के लिए तीन कंपनियों के टेंडर फाइनल भी कर लिए गए थे, लेकिन बिना फाइनेंशियल बिड देखे ही जिला स्वास्थ्य समिति ने अपनी आपत्ति दर्ज करा दी।

जानकारों का कहना है कि सीबीआई जांच के खौफ से पूरा गोरखपुर जिला प्रशासन खरीद को मंजूरी देने से कतरा रहा है। गुरुवार को भी वेंटीलेटर खरीद को लेकर बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इसमें कोई फैसला नहीं लिया जा सका।

कौन है बच्चों की मौत का जिम्मेदार
बच्चों की मौतों को रोकने के लिए ही वेंटीलेटर युक्त आईसीयू बनाने का फैसला सरकार ने किया था। बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने की वजह से गोरखपुर मंडल के सातों जिलों के अलावा बहराइच, लखीमपुर के जिला अस्पतालों और ओपेके चिकित्सालय कैली, बस्ती में दस बिस्तरों वाली आईसीयू वार्ड का काम पूरा हो गया था।

जिन नौ जिलों में आईसीयू बनाए जाने थे, उनमें संत कबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बहराइच, लखीमपुर और बस्ती शामिल हैं। इनमें सिर्फ वेंटीलेटर और दूसरे उपकरण लगना बाकी था। लगातार बच्चों की मौत होती रही, लेकिन जिला प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बच्चों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बच्चों को इलाज मुहैया कराने के लिए सात दिसंबर को वेंटीलेटर लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने भी 11 दिसंबर को पत्र लिखकर सरकार को इस फैसले से अवगत कराया।

12 दिसंबर को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की ओर से भी महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. के के गुप्ता को पत्र लिखकर 24 पीडियाट्रिक वेंटीलेटर की खरीद प्रक्रिया को तत्काल निस्तारित करने के लिए पत्र भी लिखा, लेकिन जिला स्वास्थ्य समिति ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

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