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एक ही पैन नंबर पर नौकरी करते पाए गए दो शिक्षक
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सुल्तानपुर। एक ही पैन (परमानेंट अकाउंट नंबर) पर दो लोगों के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने का मामला सामने आया है। बीएसए बस्ती के पत्र पर इसका खुलासा हुआ है। एक शिक्षक बस्ती व दूसरा सुल्तानपुर जिले के प्रतापपुर कमैचा विकास खंड क्षेत्र में तैनात है।
जाली शैक्षिक दस्तावेज पर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी करने के मामले आए दिन प्रकाश में आते रहे हैं। अब एक ही पैन नंबर पर वेतन लेने का मामला सामने आया है। बस्ती जनपद के बीएसए ने पत्र भेजकर शिवाकांत नाम के व्यक्ति के पैन नंबर पर दोहरी सैलरी भुगतान किए जाने की सूचना दी थी।
उन्होंने कहा था कि बस्ती में कार्यरत शिक्षक के पैन नंबर पर सुल्तानपुर जनपद से भी वेतन निर्गत हो रहा है। इसके बाद मामले की तहकीकात लेखा विभाग से की गई तो पता चला कि शिवाकांत प्रतापपुर कमैचा के मूसेपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी सीएम शुक्ल के पत्र पर बीएसए ने शिवाकांत का वेतन रोक दिया था। इस मामले में बीएसए की ओर से संबंधित शिक्षक से मूल अभिलेख मांगा गया लेकिन उसने अभी तक नहीं दिया है।
नोटिस मिलने के बाद लापता हुआ शिक्षक
प्रतापपुर कमैचा के मूसेपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में शिवाकांत का वेतन छह माह से अधिक समय से रुका हुआ है। उसे नवंबर 2020 और जनवरी 2021 में स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजी जा चुकी है।
बावजूद इसके उसकी तरफ से कोई जबाब नहीं दिया गया। पीपी कमैचा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी गुलाब चंद ने बताया कि सहायक अध्यापक शिवाकांत 21 जनवरी से अपने विद्यालय नहीं आ रहा है। हेडमास्टर ने बताया है कि वह मेडिकल लीव लेकर चला गया है।
अंतिम बार दिया गया नोटिस
बीएसए दीवान सिंह यादव ने बताया कि एक ही पैन नंबर पर दो लोगों के परिषदीय विद्यालय में नौकरी करने के मामले में दो बार नोटिस जारी की गई है। तीसरी बार और अंतिम बार फिर से नोटिस भेजी गई है। जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
कादीपुर में एक साथ बर्खास्त हो चुके तीन शिक्षक
फर्जी अंकपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने के मामले में करीब तीन साल में अब तक करीब 15 लोगों के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा चुकी है। कादीपुर तहसील क्षेत्र के तीन अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत तीन शिक्षकों को एक साथ बर्खास्त किया गया था।
इन सभी ने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी बरेली से बीएड का फर्जी अंकपत्र लगाया था। वहीं, भोपाल माध्यमिक शिक्षा परिषद की फर्जी मार्कशीट के जरिए पांच लोगों ने 16,448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियुक्ति पाई थी। जांच के बाद इन सभी की सेवा समाप्त कर दी गई थी।
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जाली शैक्षिक दस्तावेज पर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी करने के मामले आए दिन प्रकाश में आते रहे हैं। अब एक ही पैन नंबर पर वेतन लेने का मामला सामने आया है। बस्ती जनपद के बीएसए ने पत्र भेजकर शिवाकांत नाम के व्यक्ति के पैन नंबर पर दोहरी सैलरी भुगतान किए जाने की सूचना दी थी।
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उन्होंने कहा था कि बस्ती में कार्यरत शिक्षक के पैन नंबर पर सुल्तानपुर जनपद से भी वेतन निर्गत हो रहा है। इसके बाद मामले की तहकीकात लेखा विभाग से की गई तो पता चला कि शिवाकांत प्रतापपुर कमैचा के मूसेपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी सीएम शुक्ल के पत्र पर बीएसए ने शिवाकांत का वेतन रोक दिया था। इस मामले में बीएसए की ओर से संबंधित शिक्षक से मूल अभिलेख मांगा गया लेकिन उसने अभी तक नहीं दिया है।
नोटिस मिलने के बाद लापता हुआ शिक्षक
प्रतापपुर कमैचा के मूसेपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में शिवाकांत का वेतन छह माह से अधिक समय से रुका हुआ है। उसे नवंबर 2020 और जनवरी 2021 में स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजी जा चुकी है।
बावजूद इसके उसकी तरफ से कोई जबाब नहीं दिया गया। पीपी कमैचा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी गुलाब चंद ने बताया कि सहायक अध्यापक शिवाकांत 21 जनवरी से अपने विद्यालय नहीं आ रहा है। हेडमास्टर ने बताया है कि वह मेडिकल लीव लेकर चला गया है।
अंतिम बार दिया गया नोटिस
बीएसए दीवान सिंह यादव ने बताया कि एक ही पैन नंबर पर दो लोगों के परिषदीय विद्यालय में नौकरी करने के मामले में दो बार नोटिस जारी की गई है। तीसरी बार और अंतिम बार फिर से नोटिस भेजी गई है। जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
कादीपुर में एक साथ बर्खास्त हो चुके तीन शिक्षक
फर्जी अंकपत्रों के सहारे नौकरी हासिल करने के मामले में करीब तीन साल में अब तक करीब 15 लोगों के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा चुकी है। कादीपुर तहसील क्षेत्र के तीन अलग-अलग विद्यालयों में कार्यरत तीन शिक्षकों को एक साथ बर्खास्त किया गया था।
इन सभी ने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी बरेली से बीएड का फर्जी अंकपत्र लगाया था। वहीं, भोपाल माध्यमिक शिक्षा परिषद की फर्जी मार्कशीट के जरिए पांच लोगों ने 16,448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियुक्ति पाई थी। जांच के बाद इन सभी की सेवा समाप्त कर दी गई थी।