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Sultanpur News: हटाएंगे क्यूआर कोड, नकद भुगतान पर लौटेंगे व्यापारी
Sun, 20 Sep 2026 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 20 Sep 2026 12:33 AM IST
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किराना दुकान से हटाया गया क्यूआर कोड। संवाद
सुल्तानपुर। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। आगामी 15 अक्तूबर से शुल्क लागू होने की घोषणा के बाद फुटकर से लेकर थोक कारोबारियों में नाराजगी है। कई दुकानदारों ने क्यूआर कोड हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। अभी कुछ दुकानदार आग्रह करने पर ऑनलाइन भुगतान ले रहे हैं लेकिन ग्राहकों से नकद लेकर चलने की सलाह दे रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई अब रोजमर्रा के कारोबार का अहम माध्यम बन चुका है। सराफा, इलेक्ट्रॉनिक, किराना, होटल और निर्माण सामग्री के कारोबार में बड़ी संख्या में ग्राहक डिजिटल भुगतान करते हैं। ऐसे में भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगने से कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। उनका तर्क है कि जिन उत्पादों में पहले से ही मुनाफा कम है, उनमें शुल्क सीधे लाभ को प्रभावित करेगा।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कारोबारियों और ग्राहकों को प्रोत्साहित किया था। अब शुल्क लगाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि नई व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो सप्ताह भर के भीतर कई दुकानों से क्यूआर कोड हटाकर नकद लेन-देन शुरू कर दिया जाएगा।
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कम मुनाफे वाले कारोबार पर पड़ेगा असर
व्यापारी श्रवण प्रजापति ने कहा कि यूपीआई भुगतान ने लेन-देन को आसान बनाया है। शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। खासकर कम मुनाफे वाले उत्पाद बेचने वालों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
फैसला तत्काल वापस लेने की मांग
व्यापारी सुरेश अग्रवाल ने 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने के निर्णय का विरोध किया। उन्होंने सरकार से नई व्यवस्था तत्काल वापस लेने की मांग की है।
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व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई अब रोजमर्रा के कारोबार का अहम माध्यम बन चुका है। सराफा, इलेक्ट्रॉनिक, किराना, होटल और निर्माण सामग्री के कारोबार में बड़ी संख्या में ग्राहक डिजिटल भुगतान करते हैं। ऐसे में भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगने से कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। उनका तर्क है कि जिन उत्पादों में पहले से ही मुनाफा कम है, उनमें शुल्क सीधे लाभ को प्रभावित करेगा।
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व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कारोबारियों और ग्राहकों को प्रोत्साहित किया था। अब शुल्क लगाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि नई व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो सप्ताह भर के भीतर कई दुकानों से क्यूआर कोड हटाकर नकद लेन-देन शुरू कर दिया जाएगा।
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कम मुनाफे वाले कारोबार पर पड़ेगा असर
व्यापारी श्रवण प्रजापति ने कहा कि यूपीआई भुगतान ने लेन-देन को आसान बनाया है। शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। खासकर कम मुनाफे वाले उत्पाद बेचने वालों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
फैसला तत्काल वापस लेने की मांग
व्यापारी सुरेश अग्रवाल ने 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने के निर्णय का विरोध किया। उन्होंने सरकार से नई व्यवस्था तत्काल वापस लेने की मांग की है।