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Sultanpur News: कला भवन परिसर में नहीं होगा निर्माण कार्य
Sun, 02 Mar 2025 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 02 Mar 2025 12:35 AM IST
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सुल्तानपुर। जिलाधिकारी आवास के निकट स्थित कला भवन परिसर में निर्माण कार्य पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। सिविल जज प्रवर खंड शुभम वर्मा ने दोनों पक्षों को मुकदमे की सुनवाई के दौरान विवादित भूमि की यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि विवादित भूमि को सुरक्षित और संरक्षित किया जाना उपयुक्त है। मकान मालिक ने बिना सहमति के निर्माण कराने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी। इस मामले में अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
शहर के रोडवेज बस स्टेशन के पास स्थित राज होटल निवासी नूपुर राजवर्धन ने जिलाधिकारी आवास के निकट स्थित कला भवन की शीला शाही, वैभव शाही समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ वर्ष 2022 में कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। वादी नूपुर राजवर्धन का कहना है कि उनके पूर्वज राय साहब रामसरन प्रसाद ने 12 नवंबर 1932 को 14,500 रुपये में कला भवन परिसर व उससे सटी भूमि नीलामी में ईस्ट इंडिया रेलवे कंपनी से लिया था। इसकी पुष्टि डिप्टी कमिश्नर की ओर से किए जाने पर राय साहब रामसरन प्रसाद को जमीन का मालिक मान लिया गया था। इसी भूमि का पट्टा 99 साल के लिए दियरा स्टेट के कौशलेंद्र प्रताप शाही ने पुत्र महेंद्र प्रताप शाही व नागेंद्र प्रताप शाही के नाम ले लिया था। बाद में किरायेदारी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया था, और नूपुर राजवर्धन ने अदालत की शरण ली थी।
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नूपुर राजवर्धन का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के विपक्षी की ओर से विवादित जमीन पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट में अर्जी देकर भूमि की स्थिति में परिवर्तन न करने व निर्माण करने पर रोक लगाने की मांग की थी।
वहीं, विपक्षी शीला शाही व अन्य ने कहा कि वादी नूपुर राजवर्धन को विवादित जमीन का कोई अधिकार नहीं है। जमीन नजूल की संपत्ति थी जिसका पट्टा लिया गया है। इसकी एंट्री नजूल रजिस्टर में व नगर पालिका के एससेमेंट रजिस्टर में हुई है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों पक्षों को आदेश दिया है कि वे दौरान मुकदमा विवादित भूमि की यथा स्थिति बनाए रखें।
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अदालत ने कहा कि विवादित भूमि को सुरक्षित और संरक्षित किया जाना उपयुक्त है। मकान मालिक ने बिना सहमति के निर्माण कराने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी। इस मामले में अगली सुनवाई एक अप्रैल को होगी।
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शहर के रोडवेज बस स्टेशन के पास स्थित राज होटल निवासी नूपुर राजवर्धन ने जिलाधिकारी आवास के निकट स्थित कला भवन की शीला शाही, वैभव शाही समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ वर्ष 2022 में कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। वादी नूपुर राजवर्धन का कहना है कि उनके पूर्वज राय साहब रामसरन प्रसाद ने 12 नवंबर 1932 को 14,500 रुपये में कला भवन परिसर व उससे सटी भूमि नीलामी में ईस्ट इंडिया रेलवे कंपनी से लिया था। इसकी पुष्टि डिप्टी कमिश्नर की ओर से किए जाने पर राय साहब रामसरन प्रसाद को जमीन का मालिक मान लिया गया था। इसी भूमि का पट्टा 99 साल के लिए दियरा स्टेट के कौशलेंद्र प्रताप शाही ने पुत्र महेंद्र प्रताप शाही व नागेंद्र प्रताप शाही के नाम ले लिया था। बाद में किरायेदारी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया था, और नूपुर राजवर्धन ने अदालत की शरण ली थी।
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नूपुर राजवर्धन का आरोप है कि बिना उनकी सहमति के विपक्षी की ओर से विवादित जमीन पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट में अर्जी देकर भूमि की स्थिति में परिवर्तन न करने व निर्माण करने पर रोक लगाने की मांग की थी।
वहीं, विपक्षी शीला शाही व अन्य ने कहा कि वादी नूपुर राजवर्धन को विवादित जमीन का कोई अधिकार नहीं है। जमीन नजूल की संपत्ति थी जिसका पट्टा लिया गया है। इसकी एंट्री नजूल रजिस्टर में व नगर पालिका के एससेमेंट रजिस्टर में हुई है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों पक्षों को आदेश दिया है कि वे दौरान मुकदमा विवादित भूमि की यथा स्थिति बनाए रखें।