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Sultanpur News: ओपीडी में तीन घंटे लगी लाइन, बेहाल हुईं गर्भवती
Tue, 16 Jan 2024 01:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 16 Jan 2024 01:05 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की ओपीडी के सामने लगी महिलाओं की भीड़। - संवाद
सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में रातभर चीखती रही गर्भवती की बिना इलाज मौत हो जाने के बावजूद अस्पताल में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। सोमवार सुबह इमरजेंसी के नाम पर दो घंटे तक चिकित्सक ओपीडी से नदारद रहे। इसके चलते गर्भवती महिलाओं को तीन घंटे से ज्यादा समय तक लाइन में खड़ी रहना पड़ा। इससे कई गर्भवती की हालत खराब हो गई।
महिला अस्पताल की हालत लंबे समय से खराब चल रही है। यहां मरीजों को समय से इलाज और सुविधाएं मिल पाने में दिक्कतों की शिकायतें आम हैं। करीब एक माह पहले ही यहां एक गर्भवती महिला रातभर चीखती रही लेकिन कोई डॉक्टर या स्टाफ उसे देखने नहीं आया जिससे उसकी मौत हो गई थी। उसके बाद प्राचार्य और पुरुष अस्पताल के सीएमएस तो सक्रिय हुए लेकिन महिला अस्पताल में इसके बावजूद कोई सुधार नहीं दिखा।
सोमवार को गर्भवती महिलाओं के लिए खुले एंटेनाटल केयर (एएनसी) ओपीडी में दो घंटे से ज्यादा समय तक चिकित्सक नहीं बैठे। ऐसे में मरीजों की लंबी लाइन लग गई। नंबर न आने के भय से गर्भवती महिलाएं लाइन में लगी रहीं। बाद में चिकित्सकों के आने के बाद तीन-तीन घंटे बाद मरीजों का नंबर आया।
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लाइन में लगकर बेचैन नजर आ रहीं साबिरा बानो ने बताया कि खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। टांगें कांप रही हैं क्योंकि वे एक माह की गर्भवती हैं। उनके आगे लाइन में लगे महिला मरीज के पति ने बताया कि तीन घंटे हो गए लाइन में लगे हुए, चिकित्सक इमरजेंसी बताकर दो घंटे के लिए कहीं चले गए हैं।
आए दिन बने रहते हैं यही हालात
सोमवार को एएनसी में जो नजारा दिखाई दिया, वह नया नहीं है। चिकित्सकों के देर से आने, कम बैठने के कारण मरीजों को रोज यह संकट झेलना पड़ता है। किसी दिन एक घंटे की लाइन लगती है तो किसी दिन दो घंटे की।
लंबी लाइन से बिगड़ सकती है सेहत
कई-कई महीने की गर्भवती महिलाओं को महिला अस्पताल में जिस तरह लाइन लगानी पड़ती है, उससे किसी दिन बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। वहां मौजूद एक महिला मरीज ने बताया कि एक-दो बार कुछ मरीजों को इस वजह से चक्कर आ गया। यहां पर कुर्सियां लगी हैं लेकिन नंबर न देने की वजह से सबको लाइन में लगना पड़ता है।
चिकित्सकों की बहुत कमी
महिला अस्पताल में चिकित्सकों की बहुत कमी है। इसलिए यह समस्या आ रही है। जैसे ही चिकित्सकों की कमी दूर होगी, यह समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
- डॉ. आरके यादव, सीएमएस, महिला अस्पताल
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महिला अस्पताल की हालत लंबे समय से खराब चल रही है। यहां मरीजों को समय से इलाज और सुविधाएं मिल पाने में दिक्कतों की शिकायतें आम हैं। करीब एक माह पहले ही यहां एक गर्भवती महिला रातभर चीखती रही लेकिन कोई डॉक्टर या स्टाफ उसे देखने नहीं आया जिससे उसकी मौत हो गई थी। उसके बाद प्राचार्य और पुरुष अस्पताल के सीएमएस तो सक्रिय हुए लेकिन महिला अस्पताल में इसके बावजूद कोई सुधार नहीं दिखा।
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सोमवार को गर्भवती महिलाओं के लिए खुले एंटेनाटल केयर (एएनसी) ओपीडी में दो घंटे से ज्यादा समय तक चिकित्सक नहीं बैठे। ऐसे में मरीजों की लंबी लाइन लग गई। नंबर न आने के भय से गर्भवती महिलाएं लाइन में लगी रहीं। बाद में चिकित्सकों के आने के बाद तीन-तीन घंटे बाद मरीजों का नंबर आया।
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लाइन में लगकर बेचैन नजर आ रहीं साबिरा बानो ने बताया कि खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। टांगें कांप रही हैं क्योंकि वे एक माह की गर्भवती हैं। उनके आगे लाइन में लगे महिला मरीज के पति ने बताया कि तीन घंटे हो गए लाइन में लगे हुए, चिकित्सक इमरजेंसी बताकर दो घंटे के लिए कहीं चले गए हैं।
आए दिन बने रहते हैं यही हालात
सोमवार को एएनसी में जो नजारा दिखाई दिया, वह नया नहीं है। चिकित्सकों के देर से आने, कम बैठने के कारण मरीजों को रोज यह संकट झेलना पड़ता है। किसी दिन एक घंटे की लाइन लगती है तो किसी दिन दो घंटे की।
लंबी लाइन से बिगड़ सकती है सेहत
कई-कई महीने की गर्भवती महिलाओं को महिला अस्पताल में जिस तरह लाइन लगानी पड़ती है, उससे किसी दिन बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। वहां मौजूद एक महिला मरीज ने बताया कि एक-दो बार कुछ मरीजों को इस वजह से चक्कर आ गया। यहां पर कुर्सियां लगी हैं लेकिन नंबर न देने की वजह से सबको लाइन में लगना पड़ता है।
चिकित्सकों की बहुत कमी
महिला अस्पताल में चिकित्सकों की बहुत कमी है। इसलिए यह समस्या आ रही है। जैसे ही चिकित्सकों की कमी दूर होगी, यह समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
- डॉ. आरके यादव, सीएमएस, महिला अस्पताल