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बीएड की फर्जी डिग्री मामले में शिक्षक पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार
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सुल्तानपुर। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से संबद्ध महाविद्यालय से बीएड उत्तीर्ण की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी कर रहे शिक्षक पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। एडी बेसिक के पत्र के बाद शिक्षक को नोटिस देकर अप्रैल में ही स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के बीएड सत्र 2005 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के अंक पत्रों की जांच हो रही है। मामले में एसआईटी की ओर से उपलब्ध कराए गए अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के बीएड सत्र 2005 के कुछ छात्रों का परीक्षा परिणाम अधिक अंकित कर दिया गया अथवा छेड़छाड़ कर अंक तालिका वितरित कर दी गई। इसके आधार पर कई छात्रों ने शिक्षक के रूप में चयन पा लिया। इस प्रकरण में मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक अयोध्या ने फर्जी छात्रों की सूची पेज संख्या-51 पर शिक्षक शंभूनाथ करवाल का नाम भेजा था। मामले में बीएसए ने 27 अप्रैल 2020 को नोटिस देकर 15 दिन के अंदर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोपी शिक्षक की ओर से कोई भी जवाब अब तक नहीं आया है।
एक शिक्षक पहले ही हो चुका बर्खास्त
फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी अर्जित करने के मामले में प्रतापपुर कमैचा के उच्च प्राथमिक विद्यालय ढाखापुर राजेपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत रहे मोहनलाल शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है। मोहनलाल शर्मा ने आगरा विश्वविद्यालय से 2005 में बीएड डिग्री हासिल की थी। इसी के आधार पर एसआईटी जांच में उनकी भी डिग्री फर्जी पाई गई थी। रामपुर जनपद में तैनाती के बाद मोहनलाल ने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के जरिए जिले में तबादला करा लिया था। मोहनलाल शर्मा जौनपुर जनपद के मछलीशहर तहसील क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी थे।
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फर्जी बीएड के अंकपत्र मामले में शिक्षक शंभूनाथ करवाल को अप्रैल में नोटिस जारी की गई थी, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है। एक बार फिर रिमाइंडर जारी होगा। इसके बाद भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आया तो बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार सक्सेना, बीएसए।
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हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के बीएड सत्र 2005 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के अंक पत्रों की जांच हो रही है। मामले में एसआईटी की ओर से उपलब्ध कराए गए अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के बीएड सत्र 2005 के कुछ छात्रों का परीक्षा परिणाम अधिक अंकित कर दिया गया अथवा छेड़छाड़ कर अंक तालिका वितरित कर दी गई। इसके आधार पर कई छात्रों ने शिक्षक के रूप में चयन पा लिया। इस प्रकरण में मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक अयोध्या ने फर्जी छात्रों की सूची पेज संख्या-51 पर शिक्षक शंभूनाथ करवाल का नाम भेजा था। मामले में बीएसए ने 27 अप्रैल 2020 को नोटिस देकर 15 दिन के अंदर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोपी शिक्षक की ओर से कोई भी जवाब अब तक नहीं आया है।
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एक शिक्षक पहले ही हो चुका बर्खास्त
फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी अर्जित करने के मामले में प्रतापपुर कमैचा के उच्च प्राथमिक विद्यालय ढाखापुर राजेपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत रहे मोहनलाल शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है। मोहनलाल शर्मा ने आगरा विश्वविद्यालय से 2005 में बीएड डिग्री हासिल की थी। इसी के आधार पर एसआईटी जांच में उनकी भी डिग्री फर्जी पाई गई थी। रामपुर जनपद में तैनाती के बाद मोहनलाल ने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के जरिए जिले में तबादला करा लिया था। मोहनलाल शर्मा जौनपुर जनपद के मछलीशहर तहसील क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी थे।
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फर्जी बीएड के अंकपत्र मामले में शिक्षक शंभूनाथ करवाल को अप्रैल में नोटिस जारी की गई थी, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है। एक बार फिर रिमाइंडर जारी होगा। इसके बाद भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आया तो बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।
- संतोष कुमार सक्सेना, बीएसए।