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Sultanpur News: ताइवानी अमरूद ने बदली प्रगतिशील किसान की किस्मत

Wed, 25 Dec 2024 09:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Wed, 25 Dec 2024 09:01 PM IST
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Taiwanese guava changed the fortunes of a progressive farmer
अमरूद दिखाते प्रदीप
विंदेश्वरीगंज (सुल्तानपुर)। पारंपरिक खेती को छोड़ क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान ने बागवानी को अपनाया तो उनकी किस्मत ही बदल गई। किसान को अब सालाना 10 से 15 लाख रुपये की कमाई हो रही है। इन्होंने ताइवान पिंक, ताइवान व्हाइट और रेड डायमंड जैसी उन्नत किस्मों के अमरूद की बागवानी की है। इसके साथ ही कागजी नींबू, चीकू, किन्नू और एप्पल बेर के भी पौधे लगाए हैं, जो अब पेड़ का रूप लेकर फल दे रहे हैं।
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धनपतगंज विकास खंड के मायंग निवासी किसान प्रदीप सिंह ने 15 बीघा खेत में लगभग 2700 ताइवान पिंक और ताइवान व्हाइट अमरूद के पौधे लगाए हैं। इनकी बाग के अमरूद में प्रत्येक फल 250 ग्राम से अधिक वजन का होता है। साल में तीन बार फरवरी, जुलाई और नवंबर में फल आते हैं। प्रदीप ने बीएनआर बीही और रेड डायमंड के भी 200-200 अमरूद के पौधे लगाए हैं।
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साथ ही खेत के किनारों पर मौसंबी और चीकू के पेड़ भी लगाए हैं। उन्होंने सुरक्षा के लिए खेतों के चारों तरफ घेराबंदी की है। इसमें उनका 15 लाख रुपये का खर्च हुआ है। पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप पद्धति का उपयोग करते हैं। उनकी बागवानी को देखने के लिए दूर-दूर के किसान आते हैं और सलाह लेते हैं।
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आम की विभिन्न प्रजातियों का किया रोपण
प्रगतिशील किसान प्रदीप सिंह बताते हैं कि सेब, नींबू, और नाशपाती के पौधों का भी परीक्षण के रूप में रोपण किया है। यदि ये परीक्षण सफल हुआ तो और अधिक पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने आम की प्रजातियों में हुस्नआरा, टामी, अरुणिमा, अनामिका और स्वर्णरेखा के पौधे लगाए हैं।

मिल रहा सरकारी सहयोग
प्रदीप को बागवानी की प्रेरणा बल्दीराय तहसील क्षेत्र के पारा बाजार में अमरूद की खेती देखकर मिली। इसके अलावा उद्यान विभाग का भी उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। विभाग की ओर से उन्हें बागवानी की सिंचाई के लिए ड्रिप मशीन की खरीदारी पर अनुदान मिला है। प्रदीप कहते हैं कि बागवानी से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। इस दिशा में और भी आगे बढ़ना चाहते हैं।

खेत से हो जाती है फलों की बिक्री
प्रदीप सिंह बताते हैं कि ज्यादातर अमरूद और बेर के फलों की बिक्री खेत से ही हो जाती है। जब बड़ी मात्रा में फल तैयार होते हैं तो उन्हें जिले की अमहट मंडी में पिकअप पर लादकर भेजा जाता है।


खेत में लगाए फूलगोभी और बंदगोभी के पौधे
किसान प्रदीप ने सितंबर के आखिरी सप्ताह में फूलगोभी और बंदगोभी की नर्सरी खेत में डाली। उन्होंने अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में इन पौधों की खेत में रोपाई करा दी। उनके खेत में 2000 पौधे फूलगोभी के और 2500 पौधे बंदगोभी के लगे हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने में फूलगोभी और बंदगोभी तैयारी हो जाएगी।

शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन  करते बसपा कार्यकर्ता  । संवाद

शामली कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते बसपा कार्यकर्ता  । संवाद

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