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चीनी मिल पर कर्मियों का साढ़े 16 करोड़ बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Dec 2016 11:32 PM IST
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भारी घाटे में चल रही जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल अपने कर्मचारियों को वेतन व अन्य देय नहीं दे पा रही है। कई वर्षों से लटके फंड और वेतन को जोड़कर मिल पर कर्मचारियों का बकाया करीब साढ़े 16 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। मिल की हालत को देखते हुए कर्मचारियों का बकाया अभी मिल पाने की उम्मीद नहीं दिख रही है। ऐसे में नौकरी करते हुए भी मिल कर्मियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
इंडस्ट्री के नाम पर जिले को पहचान दिलाने वाली इकलौती किसान चीनी मिल की स्थापना 1984 में हुई थी। मिल की एक दिन की गन्ना पेराई क्षमता 12.5 क्विंटल है। मिल में 450 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें 150 कर्मचारी स्थायी और शेष सीजनल कर्मचारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। करीब तीन दशक पुरानी हो चुकी मिल के कल-पुर्जे जर्जर हो गए हैं। पेराई सत्र के दौरान तकनीकी खराबी से मिल में गन्ना की पेराई बंद होना आम बात हो गई है।
सही ढंग से गन्ना पेराई नहीं होने से मिल लगातार घाटे में चल रही है। चीनी मिल फेडरेशन के कर्मचारियों और चीनी मिल के कर्मियों का 16 करोड़ 38 लाख 65 हजार 162 रुपये पीएफ, ग्रेच्युटी समेत अन्य बकाया है। इसमें चीनी मिल फेडरेशन के कर्मियों का बकाया चार करोड़ 36 लाख 59 हजार 822 रुपये है, जबकि चीनी मिल कर्मियों का 12 करोड़ दो लाख पांच हजार 340 रुपये बकाया है।
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अक्तूबर 2012 से अभी तक मिल कर्मियों का पीएफ ऑफिस नहीं भेजा गया है। इससे कर्मियों को न तो पीएफ का भुगतान मिल पा रहा है और न ही उन्हें पेंशन का लाभ ही मिल रहा है। सेवानिवृत्त हो चुके 140 कर्मियों को 2001 से अक्तूबर 2016 तक ग्रेच्युटी का पेमेंट नहीं हुआ है। मिल में कार्यरत कर्मियों को जून 2016 से और अधिकारियों को नवंबर 2016 से वेतन नहीं मिल पाया है। मिल की खस्ता हालत को देखते हुए अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके बकाया का भुगतान होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
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इंडस्ट्री के नाम पर जिले को पहचान दिलाने वाली इकलौती किसान चीनी मिल की स्थापना 1984 में हुई थी। मिल की एक दिन की गन्ना पेराई क्षमता 12.5 क्विंटल है। मिल में 450 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें 150 कर्मचारी स्थायी और शेष सीजनल कर्मचारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। करीब तीन दशक पुरानी हो चुकी मिल के कल-पुर्जे जर्जर हो गए हैं। पेराई सत्र के दौरान तकनीकी खराबी से मिल में गन्ना की पेराई बंद होना आम बात हो गई है।
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सही ढंग से गन्ना पेराई नहीं होने से मिल लगातार घाटे में चल रही है। चीनी मिल फेडरेशन के कर्मचारियों और चीनी मिल के कर्मियों का 16 करोड़ 38 लाख 65 हजार 162 रुपये पीएफ, ग्रेच्युटी समेत अन्य बकाया है। इसमें चीनी मिल फेडरेशन के कर्मियों का बकाया चार करोड़ 36 लाख 59 हजार 822 रुपये है, जबकि चीनी मिल कर्मियों का 12 करोड़ दो लाख पांच हजार 340 रुपये बकाया है।
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अक्तूबर 2012 से अभी तक मिल कर्मियों का पीएफ ऑफिस नहीं भेजा गया है। इससे कर्मियों को न तो पीएफ का भुगतान मिल पा रहा है और न ही उन्हें पेंशन का लाभ ही मिल रहा है। सेवानिवृत्त हो चुके 140 कर्मियों को 2001 से अक्तूबर 2016 तक ग्रेच्युटी का पेमेंट नहीं हुआ है। मिल में कार्यरत कर्मियों को जून 2016 से और अधिकारियों को नवंबर 2016 से वेतन नहीं मिल पाया है। मिल की खस्ता हालत को देखते हुए अधिकारियों व कर्मचारियों को उनके बकाया का भुगतान होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।