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Sultanpur News: छात्रों की सामाजिक-भावनात्मक सेहत और गणितीय सोच होगी मजबूत
Sat, 10 Oct 2026 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:05 AM IST
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सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावी बनाने और सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए शिक्षण व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। निपुण भारत और समग्र शिक्षा के तहत जिले के 2061 परिषदीय विद्यालयों में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य, समझ, लेखन क्षमता और गणितीय सोच को मजबूत करना है।
इसके लिए कक्षा शिक्षण में बदलाव के 10 सूत्र तय किए गए हैं। शिक्षकों को कक्षा का वातावरण सहज, सुरक्षित और सकारात्मक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमित अभ्यास कार्य देने, विद्यार्थियों की समझ का आकलन करने और प्रभावी फीडबैक देने पर जोर दिया गया है।
बीएसए उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि बच्चों के सीखने के स्तर की नियमित जांच की जाएगी। इसमें अलग-अलग शिक्षण रणनीतियों का इस्तेमाल होगा। पढ़ाई में पिछड़ रहे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। शिक्षण प्रक्रिया की योजना इस तरह तैयार की जाएगी कि बच्चे कक्षा में सक्रिय भागीदारी कर सकें।
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खुले प्रश्नों से विकसित होगी तार्किक क्षमता
पठन और मौखिक भाषा के विकास के लिए बच्चों से खुले प्रश्न पूछे जाएंगे। जिससे उनकी सोचने और तर्क करने की क्षमता बढ़ेगी। विद्यार्थियों को स्वतंत्र लेखन का अभ्यास कराने के साथ जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन दिया जाएगा। शिक्षक के निर्देशन में बच्चे जोड़ी, छोटे समूह और व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अभ्यास करेंगे। गणितीय अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का नियमित उपयोग होगा। बच्चों से क्यों और कैसे जैसे सवाल पूछकर विषय की समझ विकसित की जाएगी।
पठन संस्कृति और समाचार पत्र अभियान
बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए पठन संस्कृति और समाचार पत्र पठन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत शैक्षिक कैलेंडर का पालन, समाचार पत्रों का विश्लेषण और चर्चा, स्थानीय लेखकों से संवाद तथा पुस्तकालयों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। बुक अभियान, रीडिंग क्लब, पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव, सुपर-20 व सुपर-30 पाठक अभियान, चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर और स्वतंत्र लेखन प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
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इसके लिए कक्षा शिक्षण में बदलाव के 10 सूत्र तय किए गए हैं। शिक्षकों को कक्षा का वातावरण सहज, सुरक्षित और सकारात्मक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमित अभ्यास कार्य देने, विद्यार्थियों की समझ का आकलन करने और प्रभावी फीडबैक देने पर जोर दिया गया है।
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बीएसए उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि बच्चों के सीखने के स्तर की नियमित जांच की जाएगी। इसमें अलग-अलग शिक्षण रणनीतियों का इस्तेमाल होगा। पढ़ाई में पिछड़ रहे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। शिक्षण प्रक्रिया की योजना इस तरह तैयार की जाएगी कि बच्चे कक्षा में सक्रिय भागीदारी कर सकें।
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खुले प्रश्नों से विकसित होगी तार्किक क्षमता
पठन और मौखिक भाषा के विकास के लिए बच्चों से खुले प्रश्न पूछे जाएंगे। जिससे उनकी सोचने और तर्क करने की क्षमता बढ़ेगी। विद्यार्थियों को स्वतंत्र लेखन का अभ्यास कराने के साथ जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन दिया जाएगा। शिक्षक के निर्देशन में बच्चे जोड़ी, छोटे समूह और व्यक्तिगत रूप से पढ़ने का अभ्यास करेंगे। गणितीय अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) का नियमित उपयोग होगा। बच्चों से क्यों और कैसे जैसे सवाल पूछकर विषय की समझ विकसित की जाएगी।
पठन संस्कृति और समाचार पत्र अभियान
बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए पठन संस्कृति और समाचार पत्र पठन अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत शैक्षिक कैलेंडर का पालन, समाचार पत्रों का विश्लेषण और चर्चा, स्थानीय लेखकों से संवाद तथा पुस्तकालयों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। बुक अभियान, रीडिंग क्लब, पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव, सुपर-20 व सुपर-30 पाठक अभियान, चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर और स्वतंत्र लेखन प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी।