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सड़कें गड्ढों में तब्दील, चलना दुश्वार
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Tue, 04 Apr 2017 11:26 PM IST
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जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के मोतिगरपुर से दियरा जाने वाला तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में करीब चार हजार किलोमीटर सड़कों के फैले जाल के बीच मुख्य मार्ग से लेकर ग्रामीण अंचल तक की अधिकांश सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। मरम्मत व निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिए जाने से बनते ही सड़कें उखड़ जा रही हैं। जिला मार्गों में शामिल कुछ मार्ग तो कई वर्षों से खराब पड़े हैं।
ग्राम पंचायतों को जोडने वाले खराब संपर्क मार्गों की गणना ही नहीं है। सडक़ों की बदतर स्थिति से प्रत्येक वर्ष दर्जनों लोग मौत के शिकार हो रहे हैं लेकिन इसके बाद भी प्रशासन व निर्माण विभाग नहीं चेत रहा है। जिले में स्थित 1727 राजस्व गांवों में अभी करीब 241 गांव व मजरे मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ सके हैं।
जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के मोतिगरपुर से दियरा जाने वाला तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग भी कई वर्ष से गड्ढों में तब्दील है। कुछ माह पूर्व इस मार्ग पर लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने कुछ दूर सडक़ की मरम्मत का कार्य कराया लेकिन अधिकांश हिस्सा फिर उखड़ गया। तीन चौथाई मार्ग पहले से ही गड्ढे में तब्दील है। इस मार्ग पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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इसमें अधिकांश तराई व दूर-दराज के मजरे व गांव हैं। संपर्क मार्ग के अभाव में इन गांवों के ग्रामीणों का सफर मुश्किल भरा रहता है। जिले के पूर्वी छोर पर स्थित सूरापुर से इब्राहिमपुर होते ही प्रतापगढ़ के ढखवा कस्बे को जोड़ने वाला मार्ग करीब छह वर्ष से जर्जर है।
इस पर मरम्मत के नाम पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये कागजों पर खर्च हो रहे हैं लेकिन सड़क के गड्ढ़े अभी नहीं पटे। सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से सूरापुर से इब्राहिमपुर तक करीब 12 किलोमीटर का सफर खासकर बाइक सवारों के लिए जोखिम भरा रहता है।
करीब 95 किमी लंबे हलियापुर-बेलवाई मार्ग की स्थिति भी करीब पांच वर्षों से जर्जर हो गई है। ऐसा नहीं है कि इस मार्ग पर कोई कार्य नहीं कराया गया। पिछले वर्ष ही लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने इस मार्ग पर लाखों का वारा-न्यारा कर दिया लेकिन सडक़ के गड्ढे नहीं भर सके। पूरी सडक़ गड्ढों में तब्दील होने से इस मार्ग पर 95 किलोमीटर का सफर पांच घंटे से ज्यादा समय में पूरा होता है।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के एक्सईएन संजय कुमार का कहना है कि सड़कों के मुताबिक बजट नहीं मिलने से कार्य नहीं हो पाता है। गड्ढामुक्त सड़कों के लिए और बजट की जरूरत होती है।
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ग्राम पंचायतों को जोडने वाले खराब संपर्क मार्गों की गणना ही नहीं है। सडक़ों की बदतर स्थिति से प्रत्येक वर्ष दर्जनों लोग मौत के शिकार हो रहे हैं लेकिन इसके बाद भी प्रशासन व निर्माण विभाग नहीं चेत रहा है। जिले में स्थित 1727 राजस्व गांवों में अभी करीब 241 गांव व मजरे मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ सके हैं।
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जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के मोतिगरपुर से दियरा जाने वाला तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग भी कई वर्ष से गड्ढों में तब्दील है। कुछ माह पूर्व इस मार्ग पर लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड ने कुछ दूर सडक़ की मरम्मत का कार्य कराया लेकिन अधिकांश हिस्सा फिर उखड़ गया। तीन चौथाई मार्ग पहले से ही गड्ढे में तब्दील है। इस मार्ग पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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इसमें अधिकांश तराई व दूर-दराज के मजरे व गांव हैं। संपर्क मार्ग के अभाव में इन गांवों के ग्रामीणों का सफर मुश्किल भरा रहता है। जिले के पूर्वी छोर पर स्थित सूरापुर से इब्राहिमपुर होते ही प्रतापगढ़ के ढखवा कस्बे को जोड़ने वाला मार्ग करीब छह वर्ष से जर्जर है।
इस पर मरम्मत के नाम पर प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये कागजों पर खर्च हो रहे हैं लेकिन सड़क के गड्ढ़े अभी नहीं पटे। सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से सूरापुर से इब्राहिमपुर तक करीब 12 किलोमीटर का सफर खासकर बाइक सवारों के लिए जोखिम भरा रहता है।
करीब 95 किमी लंबे हलियापुर-बेलवाई मार्ग की स्थिति भी करीब पांच वर्षों से जर्जर हो गई है। ऐसा नहीं है कि इस मार्ग पर कोई कार्य नहीं कराया गया। पिछले वर्ष ही लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने इस मार्ग पर लाखों का वारा-न्यारा कर दिया लेकिन सडक़ के गड्ढे नहीं भर सके। पूरी सडक़ गड्ढों में तब्दील होने से इस मार्ग पर 95 किलोमीटर का सफर पांच घंटे से ज्यादा समय में पूरा होता है।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के एक्सईएन संजय कुमार का कहना है कि सड़कों के मुताबिक बजट नहीं मिलने से कार्य नहीं हो पाता है। गड्ढामुक्त सड़कों के लिए और बजट की जरूरत होती है।