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Sultanpur News: स्टेडियम चमक रहे... दम तोड़ रहे हैं खेल मैदान

Sat, 25 Jul 2026 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Sat, 25 Jul 2026 12:01 AM IST
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Stadiums are shining... while sports grounds are dying
शहर में जीआईसी का बदहाल पड़ा खेल मैदान। संवाद
सुल्तानपुर। जिले में सरकार की खेल नीति और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई दिखाई दे रही है। एक तरफ सरकार खेलो इंडिया, फिट इंडिया और ओलंपिक मिशन की बात कर रही है, दूसरी तरफ माध्यमिक विद्यालयों में खेलों की बुनियाद ही दरक रही है।
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जिले के अधिकांश सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में या तो खेल मैदान ही नहीं हैं, या फिर अतिक्रमण, रखरखाव के अभाव में खेल योग्य नहीं बचे हैं। ऐसे में बच्चों की प्रतिभा स्कूल से निकलने से पहले ही दम तोड़ रही है।
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जिले के जीजीआईसी में खेल पीरियड केवल टाइम-टेबल तक सिमट गया है। बच्चों के पास दौड़ने के लिए ट्रैक नहीं, फुटबॉल खेलने के लिए मैदान नहीं और एथलेटिक्स की तैयारी के लिए खुली जगह तक नहीं है। जीआईसी में प्रार्थना स्थल ही खेल मैदान का विकल्प बना है। खिलाड़ियों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेडियम बना रही है, लेकिन जिन स्कूलों से खिलाड़ियों की पहली खेप निकलनी चाहिए, वहां पर खेल का आधार खत्म होता जा रहा है। हर बच्चा स्टेडियम तक नहीं पहुंच सकता, लेकिन हर बच्चा स्कूल जरूर पहुंचता है।
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स्कूल के मैदान में सबसे पहले बनती है पहचान
उत्तर प्रदेश पुलिस एथलेटिक्स के मुख्य प्रशिक्षक रहे सेवानिवृत्त डीएसपी नरेंद्र कुमार मिश्रा कहते हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी किसी अकादमी में नहीं, बल्कि स्कूल के मैदान में पहली बार पहचाने जाते हैं। यदि स्कूलों में अभ्यास की व्यवस्था ही नहीं होगी तो खेलो इंडिया जैसी योजनाएं केवल नारे बनकर रह जाएंगी।


पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी आरबी पांडेय का कहना है कि माध्यमिक विद्यालयों के खेल मैदानों के संरक्षण के लिए अलग बजट, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय किए बिना खेल संस्कृति विकसित नहीं हो सकती। बड़े स्टेडियमों का निर्माण स्वागतयोग्य है, लेकिन उनकी उपयोगिता तभी है, जब गांव और कस्बों के स्कूलों से प्रतिभाएं वहां तक पहुंचें।
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