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सपा और भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर
सुल्तानपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:25 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में सपा और भाजपा आमने-सामने हैं। सपा से ऊषा सिंह व भाजपा से यशभद्र सिंह मोनू प्रत्याशी हैं। 46 सदस्यीय जिला पंचायत में जीत के लिए 24 का न्यूनतम आंकड़ा चाहिए। पार्टीगत आंकड़ों के आधार पर फिलवक्त यह आंकड़ा किसी के पास नहीं दिखता लेकिन दोनों दल जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल का दावा कर रहे हैं।
सत्तासीन समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बन गया है। दोनों दल साम, दाम दंड, भेद का हर हथकंडा अपना रहे हैं। वर्तमान में जिले के सभी पांच विधायक समाजवादी पार्टी के हैं। पूर्व में पार्टी के घोषित प्रत्याशी व निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव भी सपा में हैं।
दो दर्जा प्राप्त मंत्री भी पार्टी की ताकत माने जाते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सत्ता की इतनी बड़ी सियासी लाव लश्कर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसके अलावा सपा के धुर विरोधी दल के एक पूर्व मंत्री ने पर्दे के पीछे अपनी चौसर बिछा रखी है।
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वे भी भाजपा प्रत्याशी की शिकस्त के लिए अपने तरकश के हर तीर इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, भाजपा इस चुनाव को करो या मरो का सवाल मानकर चल रही है। पार्टी धन और बाहुबल से संपन्न प्रत्याशी के पीछे एकजुटता का दावा कर रही है।
भाजपा प्रत्याशी का सकारात्मक पक्ष यह भी है कि समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेताओं से उनके प्रगाढ़ संबंध माने जाते हैं। आशंका इस बात की भी है कि भाजपा प्रत्याशी के करीबी माने जाने वाले इन सपाई दिग्गजों की पार्टी निष्ठा ऐन वक्त पर डगमगा न जाए।
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सत्तासीन समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बन गया है। दोनों दल साम, दाम दंड, भेद का हर हथकंडा अपना रहे हैं। वर्तमान में जिले के सभी पांच विधायक समाजवादी पार्टी के हैं। पूर्व में पार्टी के घोषित प्रत्याशी व निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव भी सपा में हैं।
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दो दर्जा प्राप्त मंत्री भी पार्टी की ताकत माने जाते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सत्ता की इतनी बड़ी सियासी लाव लश्कर की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसके अलावा सपा के धुर विरोधी दल के एक पूर्व मंत्री ने पर्दे के पीछे अपनी चौसर बिछा रखी है।
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वे भी भाजपा प्रत्याशी की शिकस्त के लिए अपने तरकश के हर तीर इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, भाजपा इस चुनाव को करो या मरो का सवाल मानकर चल रही है। पार्टी धन और बाहुबल से संपन्न प्रत्याशी के पीछे एकजुटता का दावा कर रही है।
भाजपा प्रत्याशी का सकारात्मक पक्ष यह भी है कि समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेताओं से उनके प्रगाढ़ संबंध माने जाते हैं। आशंका इस बात की भी है कि भाजपा प्रत्याशी के करीबी माने जाने वाले इन सपाई दिग्गजों की पार्टी निष्ठा ऐन वक्त पर डगमगा न जाए।