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आज मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
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13. चांदा में हो रही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां रविवार को पूरी कर ली गईं। विभिन्न पूजा समितियों की ओर से जन्माष्टमी की तैयारी को लेकर आकर्षक झांकियां सजाई गई हैं। पुलिस लाइन में जन्माष्टमी पर होने वाला कार्यक्रम आकर्षकण का केंद्र रहेगा। बाजार में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा व मुकुट खरीदने के लिए लोगों की रविवार को जन्माष्टमी के एक दिन पहले भीड़ लगी रही।
पुलिस लाइन में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पुलिस कर्मियों की ओर से रात में रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाता है। मंदिर में राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकी निकाली जाती है।
इसके अलावा शहर के पयागीपुर चौराहा, गभडिय़ा, सब्जी मंडी, चौक, गंदानाला रोड, शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहे पर भी आकर्षक झांकी निकाली जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर बस स्टेशन स्थित गोपी गली की झांकी आकर्षण का केंद्र होती है।
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शाहगंज चौराहा स्थित लाला बैजूशाह मंदिर में पुजारी बृजेशाचार्य महराज ने जन्माष्टमी की तैयारी को लेकर साफ-सफाई की। इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के मंदिरों में भी जन्माष्टमी मनाने को लेकर रविवार को दिन भर लोग साज-सज्जा की सजावट में जुटे रहे।
गुप्तारगंज में नहीं लगेगा मेला
कूरेभार। इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर स्थित गुप्तारगंज कस्बे में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जाता है। यह लगने वाले मेले में दूरदराज से हस्तकला के उत्पाद और झूले लेकर व्यापारी आकर्षण बढ़ाते हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार प्रशासन से जन्माष्टमी पर मेला लगाने की अनुमति नहीं मिली है। सभी लोग अपने-अपने घरों में कान्हा का जन्मदिन मनाएंगे।
इस बार सही नक्षत्र में मनाया जाएगा जन्मोत्सव
कथा व्यास बृजेशाचार्य महराज कहते हैं कि हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व बेहद खास होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी भादों माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भादों माह कृष्ण पक्ष रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे हुआ था। यह तिथि इस बार सोमवार को पड़ रही है। यह योग शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
चार दशक से मनाई जा रही जन्माष्टमी
चांदा। स्थानीय कस्बे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं। दर्जन भर से अधिक स्थानों पर झांकियां निकाली जाती हैं। दो दिनों तक चलने वाले कृष्ण जन्म महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। कस्बे में जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावा प्रसाद वितरण का विशेष प्रबंध किया जाता है। कस्बे में कृष्ण जन्मोत्सव मनाए जाने का इतिहास लगभग चार दशक पुराना है।
कस्बे के चौक स्थित शिव मंदिर पर तकरीबन चालीस साल पहले सेठ सूर्यलाल ने बाजार में जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह त्योहार कस्बे का सबसे प्रमुख उत्सव हो गया। अब दो दर्जन से अधिक स्थानों पर झांकी सजाई जाती है। झांकियों की खास बात यह होती है कि यह स्वचलित होती हैं। शुभम साहू, मनोराज यादव, शानू यादव व अमन बताते हैं कि झांकियों को और आकर्षक बनाने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। कस्बे के सभी रोडों को सजाया जा रहा है।
गोसाईगंज में 1980 से मनाई जा रही जन्माष्टमी
गोसाईगंज। स्थानीय बाजार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर तीन दिन मेला लगता है। स्थानीय थाने से अन्नपूर्णानगर तक करीब तीन किलोमीटर के दायरे में राधा-कृष्ण की झांकी सजती है।
वर्ष 1980 में वैश्य समाज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी। तब से लगातार यह सिलसिला चला आ रहा है। गोसाईगंज थाने से अन्नपूर्णानगर तक झांकियों की तैयारी में लोग जुटते हैं। खास बात यह है कि यहां की जन्माष्टमी में सभी धर्म के लोग हिस्सा लेते हैं। पिछले दो साल से कोरोना की वजह से सिर्फ औपचारिक तरीके से जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार भी सोमकवार को सादगी से जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
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पुलिस लाइन में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पुलिस कर्मियों की ओर से रात में रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाता है। मंदिर में राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकी निकाली जाती है।
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इसके अलावा शहर के पयागीपुर चौराहा, गभडिय़ा, सब्जी मंडी, चौक, गंदानाला रोड, शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहे पर भी आकर्षक झांकी निकाली जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर बस स्टेशन स्थित गोपी गली की झांकी आकर्षण का केंद्र होती है।
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शाहगंज चौराहा स्थित लाला बैजूशाह मंदिर में पुजारी बृजेशाचार्य महराज ने जन्माष्टमी की तैयारी को लेकर साफ-सफाई की। इसके साथ ही ग्रामीण अंचल के मंदिरों में भी जन्माष्टमी मनाने को लेकर रविवार को दिन भर लोग साज-सज्जा की सजावट में जुटे रहे।
गुप्तारगंज में नहीं लगेगा मेला
कूरेभार। इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग पर स्थित गुप्तारगंज कस्बे में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जाता है। यह लगने वाले मेले में दूरदराज से हस्तकला के उत्पाद और झूले लेकर व्यापारी आकर्षण बढ़ाते हैं। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार प्रशासन से जन्माष्टमी पर मेला लगाने की अनुमति नहीं मिली है। सभी लोग अपने-अपने घरों में कान्हा का जन्मदिन मनाएंगे।
इस बार सही नक्षत्र में मनाया जाएगा जन्मोत्सव
कथा व्यास बृजेशाचार्य महराज कहते हैं कि हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व बेहद खास होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी भादों माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भादों माह कृष्ण पक्ष रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे हुआ था। यह तिथि इस बार सोमवार को पड़ रही है। यह योग शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
चार दशक से मनाई जा रही जन्माष्टमी
चांदा। स्थानीय कस्बे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं। दर्जन भर से अधिक स्थानों पर झांकियां निकाली जाती हैं। दो दिनों तक चलने वाले कृष्ण जन्म महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। कस्बे में जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावा प्रसाद वितरण का विशेष प्रबंध किया जाता है। कस्बे में कृष्ण जन्मोत्सव मनाए जाने का इतिहास लगभग चार दशक पुराना है।
कस्बे के चौक स्थित शिव मंदिर पर तकरीबन चालीस साल पहले सेठ सूर्यलाल ने बाजार में जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह त्योहार कस्बे का सबसे प्रमुख उत्सव हो गया। अब दो दर्जन से अधिक स्थानों पर झांकी सजाई जाती है। झांकियों की खास बात यह होती है कि यह स्वचलित होती हैं। शुभम साहू, मनोराज यादव, शानू यादव व अमन बताते हैं कि झांकियों को और आकर्षक बनाने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। कस्बे के सभी रोडों को सजाया जा रहा है।
गोसाईगंज में 1980 से मनाई जा रही जन्माष्टमी
गोसाईगंज। स्थानीय बाजार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर तीन दिन मेला लगता है। स्थानीय थाने से अन्नपूर्णानगर तक करीब तीन किलोमीटर के दायरे में राधा-कृष्ण की झांकी सजती है।
वर्ष 1980 में वैश्य समाज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी। तब से लगातार यह सिलसिला चला आ रहा है। गोसाईगंज थाने से अन्नपूर्णानगर तक झांकियों की तैयारी में लोग जुटते हैं। खास बात यह है कि यहां की जन्माष्टमी में सभी धर्म के लोग हिस्सा लेते हैं। पिछले दो साल से कोरोना की वजह से सिर्फ औपचारिक तरीके से जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार भी सोमकवार को सादगी से जन्माष्टमी मनाई जाएगी।