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मैरिज लॉनों में नहीं गूंजी शहनाई
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सुल्तानपुर। कोरोना संक्रमण को लेकर मार्च से किए गए लॉकडाउन ने मैरिज लॉन संचालकों को फर्श पर ला दिया। स्थिति यह रही कि पूरे सहालग के मौसम में मैरिज लॉनों में शहनाई की धुन नहीं गूंज सकी। सहालग के सीजन में लॉन सूने रहे। संचालकों को बुकिंग निरस्त करनी पड़ी।
एडवांस में लोगों से ली गई धनराशि वापस करनी पड़ी। कमाई के चक्कर में लॉन की साज-सज्जा में खर्च किया गया धन भी बेकार चला गया। अनलॉक में शर्तों के साथ मिली छूट में लोग लॉन में शादी करने को तैयार नहीं हुए। ऐसे में पूरा सीजन ऐसे ही गुजर गया। ऊपर से साल भर काम करने वाले लेबर, कर्मचारियों, बिजली बिल समेत अन्य खर्च संचालकों पर भारी पड़ रहा है।
महुअरिया रोड पर स्थित शिव वाटिका मैरिज लॉन भी इसी स्थिति से गुजरा। लॉन के संचालक अमित कुमार बताते हैं कि सहालग का मौसम शुरू होने के पहले लॉन को मन लगाकर तैयार करवाया था। लॉन की साज-सज्जा पर करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च हुए थे।
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25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ और धीरे-धीरे बढ़ता गया तो सभी बुकिंग निरस्त करनी पड़ी। इसमें 15 लाख का नुकसान उठाना पड़ा है। ऊपर से एडवांस में ली गई रकम भी वापस करनी पड़ी। अनलॉक में कोई मैरिज लॉन में प्रतिबंधों के साथ शादी का आयोजन करने को तैयार नहीं है। पूरा सीजन ऐसे ही चला गया।
गभड़िया स्थित श्रीबालाजी मंडप के संचालक राजेश कसौंधन का कहना है कि अप्रैल से 27 जून तक की बुकिंग निरस्त करनी पड़ी है। जुलाई में भी कुछ सही आसार नहीं दिख रहे हैं। सीजन में करीब 20 से 25 लाख का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। सहालग के मौसम में कमाई से साल भर रख-रखाव का खर्च चलता था। साल भर लॉन की सुरक्षा में खर्च होने वाली रकम भारी पड़ रही है। पहली बार ऐसा झटका मैरिज लॉन संचालकों को लगा है।
कुड़वार नाका पर स्थित मिलन मैरिज लॉन के संचालक कन्हैयालाल बताते हैं कि सहालग के पहले कमाई की उम्मीद में पूरी तैयारी की गई थी। लॉकडाउन से एक-एक करके सभी बुकिंग निरस्त करनी पड़ी। साल भर बिजली बिल, लेबर व कर्मचारियों समेत रख-रखाव पर हो रहा नियमित खर्च इस बार भारी पड़ रहा है। आगे भी अच्छे आसार नहीं दिख रहे हैं। इस बार बड़ी दयनीय स्थिति हो गई है।
दरियापुर स्थित दुल्हन व शगुन मैरिज लॉन के संचालक रवि प्रकाश जायसवाल का कहना है कि लॉकडाउन का असर सिर्फ ढाई माह ही नहीं रहा। नवंबर की बुकिंग भी अपेक्षा के अनुसार नहीं हो रही है। अगले वर्ष अप्रैल, मई तक सहालग नहीं है।
इसकी वजह से पूरा साल बर्बाद होने के कगार पर है। नियमित खर्च में बिजली बिल, जीएसटी, कर्मचारी व लेबर समेत अन्य खर्च ने पूरे व्यवसाय को झकझोर दिया है। सहालग के मौसम की कमाई से साल भर का खर्च चलता था। इस बार व्यवसाय को बचाए रखना मुश्किल हो गया है। अभी तक करीब 40 बुकिंग को निरस्त करना पड़ा है।
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एडवांस में लोगों से ली गई धनराशि वापस करनी पड़ी। कमाई के चक्कर में लॉन की साज-सज्जा में खर्च किया गया धन भी बेकार चला गया। अनलॉक में शर्तों के साथ मिली छूट में लोग लॉन में शादी करने को तैयार नहीं हुए। ऐसे में पूरा सीजन ऐसे ही गुजर गया। ऊपर से साल भर काम करने वाले लेबर, कर्मचारियों, बिजली बिल समेत अन्य खर्च संचालकों पर भारी पड़ रहा है।
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महुअरिया रोड पर स्थित शिव वाटिका मैरिज लॉन भी इसी स्थिति से गुजरा। लॉन के संचालक अमित कुमार बताते हैं कि सहालग का मौसम शुरू होने के पहले लॉन को मन लगाकर तैयार करवाया था। लॉन की साज-सज्जा पर करीब पांच से छह लाख रुपये खर्च हुए थे।
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25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ और धीरे-धीरे बढ़ता गया तो सभी बुकिंग निरस्त करनी पड़ी। इसमें 15 लाख का नुकसान उठाना पड़ा है। ऊपर से एडवांस में ली गई रकम भी वापस करनी पड़ी। अनलॉक में कोई मैरिज लॉन में प्रतिबंधों के साथ शादी का आयोजन करने को तैयार नहीं है। पूरा सीजन ऐसे ही चला गया।
गभड़िया स्थित श्रीबालाजी मंडप के संचालक राजेश कसौंधन का कहना है कि अप्रैल से 27 जून तक की बुकिंग निरस्त करनी पड़ी है। जुलाई में भी कुछ सही आसार नहीं दिख रहे हैं। सीजन में करीब 20 से 25 लाख का व्यवसाय प्रभावित हुआ है। सहालग के मौसम में कमाई से साल भर रख-रखाव का खर्च चलता था। साल भर लॉन की सुरक्षा में खर्च होने वाली रकम भारी पड़ रही है। पहली बार ऐसा झटका मैरिज लॉन संचालकों को लगा है।
कुड़वार नाका पर स्थित मिलन मैरिज लॉन के संचालक कन्हैयालाल बताते हैं कि सहालग के पहले कमाई की उम्मीद में पूरी तैयारी की गई थी। लॉकडाउन से एक-एक करके सभी बुकिंग निरस्त करनी पड़ी। साल भर बिजली बिल, लेबर व कर्मचारियों समेत रख-रखाव पर हो रहा नियमित खर्च इस बार भारी पड़ रहा है। आगे भी अच्छे आसार नहीं दिख रहे हैं। इस बार बड़ी दयनीय स्थिति हो गई है।
दरियापुर स्थित दुल्हन व शगुन मैरिज लॉन के संचालक रवि प्रकाश जायसवाल का कहना है कि लॉकडाउन का असर सिर्फ ढाई माह ही नहीं रहा। नवंबर की बुकिंग भी अपेक्षा के अनुसार नहीं हो रही है। अगले वर्ष अप्रैल, मई तक सहालग नहीं है।
इसकी वजह से पूरा साल बर्बाद होने के कगार पर है। नियमित खर्च में बिजली बिल, जीएसटी, कर्मचारी व लेबर समेत अन्य खर्च ने पूरे व्यवसाय को झकझोर दिया है। सहालग के मौसम की कमाई से साल भर का खर्च चलता था। इस बार व्यवसाय को बचाए रखना मुश्किल हो गया है। अभी तक करीब 40 बुकिंग को निरस्त करना पड़ा है।