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बेकाबू होते जा रहे खाद्य सामग्री व सब्जियों के दाम
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सुल्तानपुर। लगातार बढ़ रही महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। राशन से लेकर तेल, रिफाइंड ऑयल और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। फल भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया। गृहणियों के अनुसार कोरोना काल से अब तक पहले की तुलना में रसोई का खर्च दस से बीस फीसदी बढ़ गया है।
महंगाई ने लोगों को बेहाल कर दिया है। 80 रुपये में बिकने वाली अरहर की दाल 110 से 120 रुपये प्रति किलो बिक रही है। सरसों का तेल भी 170 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया गया है। उधर, आसमान छू रहे सब्जियों के दाम ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
गृहणियों के मुताबिक महंगाई की वजह से अब छौंकी दाल और उबली सब्जियां भी दूर होने लगी हैं। सब्जियों के दाम कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। गरीब व मजदूर परिवार के लोग सब्जी खरीदने के लिए दुकान पर जाते हैं लेकिन सब्जी के आसमान छूते दाम सुनकर लौट आते हैं। आम आदमी सस्ती सब्जियां खरीद कर घर लौट आता है।
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गृहणियों के अनुसार पहले की तुलना में खाद्य वस्तुएं हों या फल या फिर सब्जी सब पर दस से बीस फीसदी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। शहर के चौक स्थित किराना की दुकान चलाने वाले मुकेश ने बताया कि खाद्य सामग्रियों के दाम में अभी तक कोई गिरावट नहीं आई है। जब सामान महंगा मिलेगा तो ग्राहकों को भी उसी हिसाब से दिया जाएगा।
डीजल-पेट्रोल, खाद्य सामग्री, रसोई गैस आदि वस्तुओं में आई महंगाई के चलते घरेलू खर्च दोगुने हो गए हैं। बाइक चलाने से उसका भी खर्च बढ़ा है। इसके साथ आने-जाने का अन्य भाड़ा भी बढ़ गया है। सरसों तेल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री आदि के चलते भी घरेलू खर्च में इजाफा हुआ है। एक परिवार का घरेलू खर्च एक वर्ष पहले जितने में चल जाता था, अब वह दोगुना हो गया है।
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महंगाई ने लोगों को बेहाल कर दिया है। 80 रुपये में बिकने वाली अरहर की दाल 110 से 120 रुपये प्रति किलो बिक रही है। सरसों का तेल भी 170 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया गया है। उधर, आसमान छू रहे सब्जियों के दाम ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
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गृहणियों के मुताबिक महंगाई की वजह से अब छौंकी दाल और उबली सब्जियां भी दूर होने लगी हैं। सब्जियों के दाम कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। गरीब व मजदूर परिवार के लोग सब्जी खरीदने के लिए दुकान पर जाते हैं लेकिन सब्जी के आसमान छूते दाम सुनकर लौट आते हैं। आम आदमी सस्ती सब्जियां खरीद कर घर लौट आता है।
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गृहणियों के अनुसार पहले की तुलना में खाद्य वस्तुएं हों या फल या फिर सब्जी सब पर दस से बीस फीसदी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। शहर के चौक स्थित किराना की दुकान चलाने वाले मुकेश ने बताया कि खाद्य सामग्रियों के दाम में अभी तक कोई गिरावट नहीं आई है। जब सामान महंगा मिलेगा तो ग्राहकों को भी उसी हिसाब से दिया जाएगा।
डीजल-पेट्रोल, खाद्य सामग्री, रसोई गैस आदि वस्तुओं में आई महंगाई के चलते घरेलू खर्च दोगुने हो गए हैं। बाइक चलाने से उसका भी खर्च बढ़ा है। इसके साथ आने-जाने का अन्य भाड़ा भी बढ़ गया है। सरसों तेल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री आदि के चलते भी घरेलू खर्च में इजाफा हुआ है। एक परिवार का घरेलू खर्च एक वर्ष पहले जितने में चल जाता था, अब वह दोगुना हो गया है।