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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Politicians consider Cartoonist enemy : Abid Surti

कार्टूनिस्ट को दुश्मन समझते राजनेता:आबिद सुरती

Thu, 05 Nov 2015 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Thu, 05 Nov 2015 10:33 PM IST
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पहले राजनेता कार्टून से सीखते थे, अब राजनेता भी कार्टूनिस्ट को दुश्मन समझने लगे हैं। एक रचनाकार पहले जानता है, तब मानता है। लोग पहले मानते हैं, फिर समझाने पर जानते हैं।

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ये बातें प्रसिद्घ कार्टूनिस्ट व राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता आबिद सुरती ने कहीं। वे बृहस्पतिवार को कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान में साहित्य में कार्टून का योगदान; और केएनजीआई फरीदीपुर में द प्लेसमेंट कॉरीडोर के तत्वावधान में आयोजित नीरा द व्यू एरा विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
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ड्रॉप डेड मिशन के तहत जिले में आए प्रसिद्घ कार्टूनिस्ट आबिद सुरती ने कार्टून की रचना प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि किसी कार्टून के वैचारिक संप्रेषण के दो स्तर होते हैं। एक सामान्य जन के लिए और दूसरा वैचारिक लोगों के लिए। दोनों अपना-अपना पाठ तय करते हैं। एक कार्टून का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ईद मनाने के लिए ढब्बू जी एक किलोग्राम मुर्गा घर ले जा रहा था।
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रास्ते में चील ने हाथ से छीन लिया। ढब्बू नाच रहा था तो मित्र ने पूछा कि क्यूं नाच रहे हो, तुम्हें दुखी होना चाहिए। ढब्बू ने उत्तर दिया कि चील के पास मांस है। रेसेपी तो मेरे घर में है। इसकी व्याख्या आचार्य रजनीश ने किया है कि लोग धर्म के मुर्दे चिपकाकर बैठे हैं, पर धर्म का मूल तत्व तो संतों के पास है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि व्यक्ति के खून का रंग लाल है, पर व्यक्ति समुदाय के खून का रंग नीला है। यही जल का रंग है। वे जल को ब्ल्यू डायमंड कहते हैं। इसीलिए वे रिसते हुए नलों को घर-घर जाकर निशुल्क ठीक करते हैं।

जापानी लेखक मसारू इमोटो को उद्घृत करते हुए उन्होंने बताया कि पानी में भी संवेदना होती है। उसे इज्जत न देकर मनुष्य अपनी संवेदना पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। पानी के संरक्षण के महत्व एवं उसके आसान तरीकों से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए आबिद सुर्ती ने लोगों को जल बचाव की मुहिम में शामिल होने का आह्वान किया।  कार्यक्रम का संचालन केएनआई के हिंदी के प्राध्यापक डॉ. राधेश्याम सिंह ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में एमबीए विभाग की डॉ. अर्चना सिंह का प्रमुख योगदान रहा।


इस मौके पर प्राचार्य डॉ. एके श्रीवास्तव, फार्मेसी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दिनेश त्रिपाठी, डॉ. रामनयन सिंह, डॉ. राकेश पांडेय, रंजना सिंह, वंदना सिंह, डॉ. प्रतिमा सिंह, अखिलेंद्र प्रताप सिंह, सत्येंद्र श्रीवास्तव, शोएब खान, अहमद अंसारी, अभिषेक पांडेय, प्रियंका, श्वेता, रितिका के साथ ही एमबीए, इंजीनियरिंग व केएनआईपीएसएस के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।

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