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Sultanpur News: नए भवन में एक्सरे विंग शिफ्ट नहीं होने से बढ़ रहा मरीजों का दर्द
Wed, 19 Nov 2025 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 19 Nov 2025 12:14 AM IST
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पुराने भवन में संचालित मेडिकल कॉलेज का डिजिटल एक्सरे विंग।
सुल्तानपुर। लगभग आठ महीने से मेडिकल कॉलेज का पुरुष अस्पताल नए भवन में संचालित हो रहा है। अभी तक एक्सरे विंग यहां शिफ्ट न हो पाने से मरीजों को पुराने भवन में आना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत अस्थि रोग विभाग में दिखाने आए मरीजों को होती है। चिकित्सक यहां पर देखकर एक्सरे की सलाह देते हैं, तो मरीजों को लगभग 250 मीटर ऊबड़-खाबड़ सड़क पर स्ट्रेचर के सहारे जाना पड़ता है।
पूर्व में जिला अस्पताल पुराने भवन में संचालित होती थी। यहीं पर ओपीडी के साथ एक्सरे विंग भी स्थापित थी। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मार्च में नए भवन में यह अस्पताल शिफ्ट हो गया। इसके बाद भी डिजिटल एक्सरे विंग पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस विंग में रोज 120-135 एक्सरे किया जाता है। अन्य मरीजों की अपेक्षा अस्थि रोग की ओपीडी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर से यहां तक लाने में परेशानी होती है। रास्ते में जाम भी लगा रहता है। सड़क भी खराब है।
परिजन का इलाज कराने आए पंकज ने बताया कि चचेरे भाई के पैर में फैक्चर होने पर प्लास्टर बांधने के लिए डॉक्टर ने एक्सरे कराने की सलाह दी। चलने में हो रही दिक्कत से स्ट्रेचर लेना पड़ा, साथ में और कोई न होने से अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ी। इसी प्रकार अंशू ने बताया कि स्ट्रेचर पर मरीज ले जाते समय जाम होने से दिक्कत हुई। सीएमएस डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि ऐसे मरीजों की सुविधाओं का ध्यान दिया जाता है। जल्दी ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
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पूर्व में जिला अस्पताल पुराने भवन में संचालित होती थी। यहीं पर ओपीडी के साथ एक्सरे विंग भी स्थापित थी। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मार्च में नए भवन में यह अस्पताल शिफ्ट हो गया। इसके बाद भी डिजिटल एक्सरे विंग पुराने भवन में ही संचालित हो रहा है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस विंग में रोज 120-135 एक्सरे किया जाता है। अन्य मरीजों की अपेक्षा अस्थि रोग की ओपीडी में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर से यहां तक लाने में परेशानी होती है। रास्ते में जाम भी लगा रहता है। सड़क भी खराब है।
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परिजन का इलाज कराने आए पंकज ने बताया कि चचेरे भाई के पैर में फैक्चर होने पर प्लास्टर बांधने के लिए डॉक्टर ने एक्सरे कराने की सलाह दी। चलने में हो रही दिक्कत से स्ट्रेचर लेना पड़ा, साथ में और कोई न होने से अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ी। इसी प्रकार अंशू ने बताया कि स्ट्रेचर पर मरीज ले जाते समय जाम होने से दिक्कत हुई। सीएमएस डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि ऐसे मरीजों की सुविधाओं का ध्यान दिया जाता है। जल्दी ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
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