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Sultanpur News: गोमती पुल की एक लेन बंद
Sat, 01 Jul 2023 12:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 01 Jul 2023 12:42 AM IST
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सुल्तानपुर। गोमती नदी के टाटियानगर पुल की छत टूटकर बिखर गई है। गर्डर व उसके आसपास छत टूटने से खतरा देख प्रशासन से एक लेन बंद करा दी है। दूसरी लेन से वाहनों को धीरे-धीरे गुजारा जा रहा है। इससे मार्ग पर वाहनों का जाम लग जा रहा है।
टांडा-बांदा हाईवे पर टाटियानगर स्थित गोमती पुल का एक गर्डर 20 जून को टूट गया था। मरम्मत न होने से आसपास की छत टूटनी शुरू हो गई थी। अमर उजाला ने इस लापरवाही का खुलासा 22 व 26 जून के अंक में किया था। इसके बाद भी एनएचएआई अफसर नहीं जागे। नतीजतन भारी वाहनों के गुजरने से गर्डर के आसपास आधे से अधिक हिस्से की छत टूटकर बिखर गई।
पुल की छत में डाली गई सरिया बाहर आ गई। इस खतरनाक स्थिति की सूचना पर जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को एक लेन पर बैरियर लगवा दिया। पुलिस लगाकर वाहनों को दूसरी लेन से धीरे-धीरे गुजारा जा रहा है। जिला प्रशासन ने एनएचएआई को मरम्मत का निर्देश दिया है। हालांकि एक लेन पर अधिक लोड से अब उसके भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है।
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अप्रैल में भी टूटा था गर्डर
टाटियानगर पुल के कई गर्डर व छत वर्ष 2022 में भी टूटे थे। पुल तकरीबन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। सेतु निगम व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की रिपोर्ट पर शासन के निर्देश पर एनएचएआई की रायबरेली इकाई ने पुल की मरम्मत नवंबर से लेकर जनवरी 2023 तक कराई थी। इसके लिए आवागमन बंद कर भारी वाहनों को शहर से गुजारा जा रहा था। जनवरी 2023 में आवागमन शुरू हुआ था और अप्रैल में फिर एक गर्डर टूट गया था। हालांकि एनएचएआई ने एक सप्ताह में इसकी मरम्मत करा दी थी।
50 लाख के मरम्मत कार्य पर फिरा पानी
एनएचएआई ने टाटियानगर पुल की मरम्मत पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए थे। सारे गर्डर बदले थे, पूरी छत को उखाड़कर नई छत डाली गई थी। अब छह माह में ही गर्डर व छत टूटने से घटिया मरम्मत की पोल खुल गई है। एनएचएआई के अभियंता विकल्प सिंह का कहना है कि भारी वाहनों का लोड अधिक होने से यह दिक्कत आई है।
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टांडा-बांदा हाईवे पर टाटियानगर स्थित गोमती पुल का एक गर्डर 20 जून को टूट गया था। मरम्मत न होने से आसपास की छत टूटनी शुरू हो गई थी। अमर उजाला ने इस लापरवाही का खुलासा 22 व 26 जून के अंक में किया था। इसके बाद भी एनएचएआई अफसर नहीं जागे। नतीजतन भारी वाहनों के गुजरने से गर्डर के आसपास आधे से अधिक हिस्से की छत टूटकर बिखर गई।
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पुल की छत में डाली गई सरिया बाहर आ गई। इस खतरनाक स्थिति की सूचना पर जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को एक लेन पर बैरियर लगवा दिया। पुलिस लगाकर वाहनों को दूसरी लेन से धीरे-धीरे गुजारा जा रहा है। जिला प्रशासन ने एनएचएआई को मरम्मत का निर्देश दिया है। हालांकि एक लेन पर अधिक लोड से अब उसके भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है।
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अप्रैल में भी टूटा था गर्डर
टाटियानगर पुल के कई गर्डर व छत वर्ष 2022 में भी टूटे थे। पुल तकरीबन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। सेतु निगम व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की रिपोर्ट पर शासन के निर्देश पर एनएचएआई की रायबरेली इकाई ने पुल की मरम्मत नवंबर से लेकर जनवरी 2023 तक कराई थी। इसके लिए आवागमन बंद कर भारी वाहनों को शहर से गुजारा जा रहा था। जनवरी 2023 में आवागमन शुरू हुआ था और अप्रैल में फिर एक गर्डर टूट गया था। हालांकि एनएचएआई ने एक सप्ताह में इसकी मरम्मत करा दी थी।
50 लाख के मरम्मत कार्य पर फिरा पानी
एनएचएआई ने टाटियानगर पुल की मरम्मत पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किए थे। सारे गर्डर बदले थे, पूरी छत को उखाड़कर नई छत डाली गई थी। अब छह माह में ही गर्डर व छत टूटने से घटिया मरम्मत की पोल खुल गई है। एनएचएआई के अभियंता विकल्प सिंह का कहना है कि भारी वाहनों का लोड अधिक होने से यह दिक्कत आई है।