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संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड में पूर्व विधायक सोनू समेत तीन के खिलाफ नोटिस
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सुल्तानपुर। संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड के चर्चित मामले में इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके ब्लॉक प्रमुख भाई समेत तीन आरोपियों के खिलाफ नोटिस जारी की गई है। सीजेएम किरन गौड़ ने डीएम, एसपी व एसओ कूरेभार को जारी की गई नोटिस को तामील कराने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि नियत की गई है। मामले में पूर्व विधायक समेत अन्य आरोपियों की दोषमुक्ति के निर्णय को संत ज्ञानेश्वर के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी है। कोर्ट के आदेश से पूर्व विधायक समेत अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
माघ मेला से अपने मठ को वापस जा रहे संत ज्ञानेश्वर पर 10 फरवरी 2006 को इलाहाबाद के हंडिया क्षेत्र में अत्याधुनिक असलहों से हमला कर दिया गया था। हमले में संत ज्ञानेश्वर व उनके सात शिष्यों ओमप्रकाश, रामचंद्र, पुष्पा, पूजा, नीलम, गंगा व मिथिलेश की मौत हो गई, जबकि दिव्या, मीरा, संतोषी, अनीता व मीनू गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।
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संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी निवासी देवरिया ने इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यशभद्र सिंह मोनू समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
इलाहाबाद के जिला न्यायालय ने चश्मदीद गवाहों के होस्टाइल होने (गवाही देने से मुकर जाने पर) पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके भाई यशभद्र सिंह मोनू, सहयोगी विजय यादव व आजमगढ़ निवासी अखिलेश सिंह समेत अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।
सेशन कोर्ट के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आरोपियों को बरी करने के निर्णय को सही करार दिया था और उसके खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट के निर्णय को संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों जिला जज व सीजेएम को आरोपियों को नोटिस तामील कराने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किरन गौड़ ने पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यशभद्र सिंह मोनू व सहयोगी विजय यादव के खिलाफ जारी नोटिस को तामील कराने का आदेश डीएम, एसपी व कूरेभार एसओ को दिया है। सुप्रीम कोर्ट में मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि नियत की गई है।
आश्रम उजाड़ने से शुरू हुई थी दुश्मनी
कूरेभार क्षेत्र के मझवारा गांव में सदानंद तिवारी उर्फ संत ज्ञानेश्वर ने वर्ष 1994 में आश्रम बनाना शुरू किया था। आश्रम बनाने के दौरान गांव के चौकीदार रामजस यादव ने आश्रम के लिए अपनी जमीन देने का विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गई थी। पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह उस समय इसौली के विधायक थे।
उन्होंने रामजस के परिवार वालों का साथ दिया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने ज्ञानेश्वर के आश्रम को उखाड़ फेंका था। इसी के बाद से संत ज्ञानेश्वर और इंद्रभद्र सिंह में ठन गई थी। इसी रंजिश में 21 जनवरी 1999 को इंद्रभद्र सिंह की दीवानी न्यायालय के पास बम से मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें ज्ञानेश्वर के शिष्य दीनानाथ को मौके से दौड़ाकर पकड़ लिया गया था।
पूर्व विधायक की हत्या के इस मामले में संत ज्ञानेश्वर को भी अभियुक्त बनाया गया था। हालांकि, वर्ष 2006 में संत ज्ञानेश्वर सिंह की हत्या के बाद उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था, जबकि सेशन कोर्ट से दीनानाथ समेत अन्य को सजा हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि नियत की गई है। मामले में पूर्व विधायक समेत अन्य आरोपियों की दोषमुक्ति के निर्णय को संत ज्ञानेश्वर के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी है। कोर्ट के आदेश से पूर्व विधायक समेत अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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माघ मेला से अपने मठ को वापस जा रहे संत ज्ञानेश्वर पर 10 फरवरी 2006 को इलाहाबाद के हंडिया क्षेत्र में अत्याधुनिक असलहों से हमला कर दिया गया था। हमले में संत ज्ञानेश्वर व उनके सात शिष्यों ओमप्रकाश, रामचंद्र, पुष्पा, पूजा, नीलम, गंगा व मिथिलेश की मौत हो गई, जबकि दिव्या, मीरा, संतोषी, अनीता व मीनू गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।
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संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी निवासी देवरिया ने इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यशभद्र सिंह मोनू समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
इलाहाबाद के जिला न्यायालय ने चश्मदीद गवाहों के होस्टाइल होने (गवाही देने से मुकर जाने पर) पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके भाई यशभद्र सिंह मोनू, सहयोगी विजय यादव व आजमगढ़ निवासी अखिलेश सिंह समेत अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।
सेशन कोर्ट के इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के आरोपियों को बरी करने के निर्णय को सही करार दिया था और उसके खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट के निर्णय को संत ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों जिला जज व सीजेएम को आरोपियों को नोटिस तामील कराने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किरन गौड़ ने पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू, उनके ब्लॉक प्रमुख भाई यशभद्र सिंह मोनू व सहयोगी विजय यादव के खिलाफ जारी नोटिस को तामील कराने का आदेश डीएम, एसपी व कूरेभार एसओ को दिया है। सुप्रीम कोर्ट में मामले में अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि नियत की गई है।
आश्रम उजाड़ने से शुरू हुई थी दुश्मनी
कूरेभार क्षेत्र के मझवारा गांव में सदानंद तिवारी उर्फ संत ज्ञानेश्वर ने वर्ष 1994 में आश्रम बनाना शुरू किया था। आश्रम बनाने के दौरान गांव के चौकीदार रामजस यादव ने आश्रम के लिए अपनी जमीन देने का विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गई थी। पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह उस समय इसौली के विधायक थे।
उन्होंने रामजस के परिवार वालों का साथ दिया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने ज्ञानेश्वर के आश्रम को उखाड़ फेंका था। इसी के बाद से संत ज्ञानेश्वर और इंद्रभद्र सिंह में ठन गई थी। इसी रंजिश में 21 जनवरी 1999 को इंद्रभद्र सिंह की दीवानी न्यायालय के पास बम से मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें ज्ञानेश्वर के शिष्य दीनानाथ को मौके से दौड़ाकर पकड़ लिया गया था।
पूर्व विधायक की हत्या के इस मामले में संत ज्ञानेश्वर को भी अभियुक्त बनाया गया था। हालांकि, वर्ष 2006 में संत ज्ञानेश्वर सिंह की हत्या के बाद उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था, जबकि सेशन कोर्ट से दीनानाथ समेत अन्य को सजा हुई थी।