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अधिकारियों की मनमानी, तालाबों में नहीं बूंद भर पानी

Thu, 14 Apr 2022 11:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Apr 2022 11:36 PM IST
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no water in ponds
दोस्तपुर मार्ग पर स्थित सूखे तालाब में खेल रहे बच्चे। - फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। तालाबों को लबालब भरने के सरकार के आदेश पर अधिकारियों की मनमानी भारी पड़ रही है। हालत यह है कि ग्रामीण अंचल के तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है। इन तालाबों में सुबह शाम बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। तालाबों के सूखने से जंगली जानवर व पक्षी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पानी की तलाश में जंगली जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
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गांव के पुुराने तालाब धीरे-धीरे काफी पट गए हैं, जिससे उनकी गहराई काफी कम हो गई है। गहराई कम होने से बारिश के दिनों में भरा पानी जल्दी सूख जा रहा है। मनरेगा से खुुदवाए जाने वाले तालाब नाममात्र के गहरे बनवाए जा रहे हैं। इसकी वजह से भरा जाने वाला पानी उसमें काफी दिनों तक नहीं टिक पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहले तालाब 10 से लेकर 25 फिट तक गहरे होते थे। बारिश के दिनों में ये तालाब लबालब भर जाते थे। इतनी गहराई होने की वजह से तालाब सूखते नहीं थे। अब बनवाए जाने वाले तालाबों की गहराई नाममात्र की रह गई है। इसकी वजह से तालाब सूख रहे हैं।
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मोतिगरपुर ब्लॉक के बगल एक तालाब बनवाया गया है। अप्रैल माह में ही तालाब सूख गया है। पानी के अभाव में तालाब में हरी घास हो गई है। तालाब चरागाह के साथ खेल का मैैदान बन गया है। बच्चे उसमें खेल रहे हैं और बकरियां व जानवर उसमें रोज घास चरते हैं। कस्बे के पास दोस्तपुर मार्ग पर स्थित तालाब में पानी सूखने से सिर्फ जलकुंभी बची है। ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश तालाबों का यही हाल है। दूबेपुर क्षेत्र के पलिया गांव में काफी बड़े हिस्से में स्थित तालाब भी जलकुंभी से पट गया है। तालाब में गांव के पालतू जानवरों से लेकर जंगली जानवरों व पक्षियों को भी पानी नहीं मिल पा रहा है। पछुआ हवा के बीच आधे अप्रैल में ही गर्मी उफान पर पहुंचने से ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश तालाब सूख गए हैं। कुछ तालाबों में कीचड़ तो कुछ में जलकुंभी बची है। पानी की खोज में दिन भर जंगली जानवर इधर से उधर भटकते रहते हैं।
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कुड़वार क्षेत्र के भी अधिकांश तालाब सूख गए हैं। चितईपुर में काफी बड़े हिस्से में स्थित तालाब में पानी सूखने से हरी घास उगने लगी है। यही हाल अधिकांश ग्राम पंचायतों में स्थित तालाबों का है। गांव के बाहर स्थित तालाबों में पानी नहीं मिलने से पशु-पक्षी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। उनके गांव की ओर से रुख करने का अंदेशा बना है।
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