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प्रधानमंत्री आवास योजना में तीन हजार से अधिक मिले अपात्र
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सुल्तानपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों की साठगांठ से आवास का लाभ हथियाने की कोशिश का खुलासा हुआ है। सूची में करीब तीन हजार से अधिक अपात्रों का चयन करके उसे पंचायतों व ब्लॉकों से अंतिम रूप दे दिया गया था।
चौपाल में सत्यापन व जांच में मामला प्रकाश में आने पर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। अब उनका नाम सूची से हटवाने की प्रक्रिया चल रही है।
चालू वित्तीय वर्ष मेें शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य करीब 20,065 निर्धारित किया है। ग्राम पंचायतों को लक्ष्य आवंटित होते ही प्रधानों व पंचायत सचिवों से साठगांठ करके बड़ी संख्या में अपात्रों ने अपना नाम पात्रता सूची में डलवा लिया।
चर्चा आम है कि अपात्रों का नाम सूची में शामिल कर उन्हें आवास का लाभ दिलाने के लिए धनउगाही भी की गई। इसके बाद सूची को ग्राम पंचायत से ब्लॉक मुख्यालय पर भेजकर ऑनलाइन करा दी गई। पात्रता सूची का जब जिला मुख्यालय से अधिकारियों ने चौपाल लगाकर स्वयं सत्यापन कराना शुरू किया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाकर पात्रता सूची ग्रामीणों के समक्ष पढ़कर सुनाए जाने के बाद बड़ी संख्या में अपात्रों के नाम आने लगे। जांच में अपात्रों की पुष्टि हुई। अभी तक लगाई गई चौपाल व शिकायतों पर कराई गई जांच में करीब तीन हजार से अधिक अपात्रों के नामों का खुलासा हुआ है। अधिकारियों व कर्मचारियों से साठगांठ करके अपात्र आवास का लाभ लेने की फिराक में लगे थे।
अभी इसकी संख्या और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल किए गए अपात्रों की संख्या चार हजार तक पहुंच सकती है। बड़ी संख्या में सूची में अपात्रों का नाम पाए जाने पर परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण ने ऐसे नामों को कटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आवास निर्माण पर खर्च होते 1.40 लाख रुपये
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति आवास निर्माण के लिए शासन की ओर से लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये दिया जाता है। इसके साथ ही लाभार्थी को आवास निर्माण के लिए 90 दिन की मनरेगा मजदूरी उपलब्ध कराई जाती है। इस तरीके से करीब एक लाख 40 हजार रुपये पीएम आवास के निर्माण पर शासन की ओर से धनराशि खर्च की जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में करीब तीन हजार से अधिक अपात्र सूची में मिल चुके हैं। चौपाल व जांच के माध्यम से सूची को दुरुस्त किया जा रहा है। अपात्रों का नाम सूची से कटवाने की प्रक्रिया चल रही है। आवास का लाभ पात्रों को ही दिया जाएगा।
-राम उदरेज यादव, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण
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चौपाल में सत्यापन व जांच में मामला प्रकाश में आने पर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। अब उनका नाम सूची से हटवाने की प्रक्रिया चल रही है।
चालू वित्तीय वर्ष मेें शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य करीब 20,065 निर्धारित किया है। ग्राम पंचायतों को लक्ष्य आवंटित होते ही प्रधानों व पंचायत सचिवों से साठगांठ करके बड़ी संख्या में अपात्रों ने अपना नाम पात्रता सूची में डलवा लिया।
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चर्चा आम है कि अपात्रों का नाम सूची में शामिल कर उन्हें आवास का लाभ दिलाने के लिए धनउगाही भी की गई। इसके बाद सूची को ग्राम पंचायत से ब्लॉक मुख्यालय पर भेजकर ऑनलाइन करा दी गई। पात्रता सूची का जब जिला मुख्यालय से अधिकारियों ने चौपाल लगाकर स्वयं सत्यापन कराना शुरू किया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाकर पात्रता सूची ग्रामीणों के समक्ष पढ़कर सुनाए जाने के बाद बड़ी संख्या में अपात्रों के नाम आने लगे। जांच में अपात्रों की पुष्टि हुई। अभी तक लगाई गई चौपाल व शिकायतों पर कराई गई जांच में करीब तीन हजार से अधिक अपात्रों के नामों का खुलासा हुआ है। अधिकारियों व कर्मचारियों से साठगांठ करके अपात्र आवास का लाभ लेने की फिराक में लगे थे।
अभी इसकी संख्या और बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल किए गए अपात्रों की संख्या चार हजार तक पहुंच सकती है। बड़ी संख्या में सूची में अपात्रों का नाम पाए जाने पर परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण ने ऐसे नामों को कटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
आवास निर्माण पर खर्च होते 1.40 लाख रुपये
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति आवास निर्माण के लिए शासन की ओर से लाभार्थी को एक लाख 20 हजार रुपये दिया जाता है। इसके साथ ही लाभार्थी को आवास निर्माण के लिए 90 दिन की मनरेगा मजदूरी उपलब्ध कराई जाती है। इस तरीके से करीब एक लाख 40 हजार रुपये पीएम आवास के निर्माण पर शासन की ओर से धनराशि खर्च की जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में करीब तीन हजार से अधिक अपात्र सूची में मिल चुके हैं। चौपाल व जांच के माध्यम से सूची को दुरुस्त किया जा रहा है। अपात्रों का नाम सूची से कटवाने की प्रक्रिया चल रही है। आवास का लाभ पात्रों को ही दिया जाएगा।
-राम उदरेज यादव, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण