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कोरोना संक्रमण काल में पस्त हुई मनरेगा
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सुल्तानपुर। पंचायत चुनाव के साथ कोरोना संक्रमण का असर मनरेगा पर भी पड़ा है। संक्रमण की वजह से सिर्फ 566 प्रधानमंत्री आवास पर ही मनरेगा का कार्य संचालित हो रहा है। इसमें छह हजार मजदूर काम कर रहे हैं। काम सुस्त होने से गांवों में बेरोजगारी बढ़ी है।
कोरोना संक्रमण के दौर में मनरेगा भी पस्त हो गई है। पहले कोरोना संक्रमण व बाद में चुनाव से मनरेगा सिर्फ प्रधानमंत्री आवास तक सीमित रह गई है। फरवरी से जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने से मनरेगा का कार्य धीरे-धीरे सुस्त होता गया। इस बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण व बाद में निर्वाचन कार्यक्रमों की घोषणा के बाद मनरेगा का कार्य और सुस्त हो गया है।
अधिकारियों के चुनाव व कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लग जाने से मनरेगा प्रधानमंत्री आवास निर्माण तक ही सिमट गई। आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में मनरेगा का कार्य जिले से सिर्फ 566 प्रधानमंत्री आवास तक ही सीमित रह गया है। 979 ग्राम पंचायतों वाले जिले में 566 आवासों के निर्माण में करीब छह हजार जॉब कार्डधारक कार्य कर रहे हैं।
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गांवों में मनरेगा का कार्य तकरीबन ठप होने से जॉब कार्डधारकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से जॉब कार्डधारकों के सामने अब परिवार का खर्च चलाने की समस्या सामने आ रही है।
1.46 लाख हैं सक्रिय जॉब कार्डधारक
जिले में मौजूदा समय में करीब एक लाख 46 हजार सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। पंचायतों में कार्य की उपलब्धता पर जॉब कार्डधारक काम पर जाते हैं। इस कार्य नहीं होने से ये बेरोजगार हो गए हैं।
पंचायत चुुनाव की वजह से कार्य में कुछ सुस्ती आई है। ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना पहले से तैयार है। मस्टररोल निकालने का निर्देश ब्लॉकों को दिया गया है। जल्द कार्य बढ़ा दिया जाएगा।
- विनय श्रीवास्तव, उपायुक्त, मनरेगा
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कोरोना संक्रमण के दौर में मनरेगा भी पस्त हो गई है। पहले कोरोना संक्रमण व बाद में चुनाव से मनरेगा सिर्फ प्रधानमंत्री आवास तक सीमित रह गई है। फरवरी से जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत होने से मनरेगा का कार्य धीरे-धीरे सुस्त होता गया। इस बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण व बाद में निर्वाचन कार्यक्रमों की घोषणा के बाद मनरेगा का कार्य और सुस्त हो गया है।
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अधिकारियों के चुनाव व कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लग जाने से मनरेगा प्रधानमंत्री आवास निर्माण तक ही सिमट गई। आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में मनरेगा का कार्य जिले से सिर्फ 566 प्रधानमंत्री आवास तक ही सीमित रह गया है। 979 ग्राम पंचायतों वाले जिले में 566 आवासों के निर्माण में करीब छह हजार जॉब कार्डधारक कार्य कर रहे हैं।
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गांवों में मनरेगा का कार्य तकरीबन ठप होने से जॉब कार्डधारकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से जॉब कार्डधारकों के सामने अब परिवार का खर्च चलाने की समस्या सामने आ रही है।
1.46 लाख हैं सक्रिय जॉब कार्डधारक
जिले में मौजूदा समय में करीब एक लाख 46 हजार सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। पंचायतों में कार्य की उपलब्धता पर जॉब कार्डधारक काम पर जाते हैं। इस कार्य नहीं होने से ये बेरोजगार हो गए हैं।
पंचायत चुुनाव की वजह से कार्य में कुछ सुस्ती आई है। ग्राम पंचायतों में कार्ययोजना पहले से तैयार है। मस्टररोल निकालने का निर्देश ब्लॉकों को दिया गया है। जल्द कार्य बढ़ा दिया जाएगा।
- विनय श्रीवास्तव, उपायुक्त, मनरेगा