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30 साल बाद आए मजरूह सुल्तानपुरी के बेटे और बहू
Amar ujala Bureau
Updated Sat, 21 Jan 2017 10:02 PM IST
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गांव वालों ने किया स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
अपनी लेखनी के दम पर देश और दुनिया में सुल्तानपुर का नाम रोशन करने वाले मजरूह सुल्तानपुरी के बेटे-बहू को 30 वर्ष बाद अपने पैतृक गांव गंजेहड़ी की याद खींच लाई। जिले के लोगों ने दोनों का खूब स्वागत किया। बुद्धिजीवियों ने गांव में कार्यक्रम आयोजित कर दोनों को सम्मानित भी किया।
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30 वर्षों बाद अपने पैतृक गांव गजेहड़ी पहुंचे मजरूह सुल्तानपुरी के छोटे बेटे अंदलीब सुल्तानपुरी व बहू नजमा सुल्तानपुरी का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। गांव के पूर्व प्रधान मतीन खान के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, लेखकों एवं शायरों ने दोनों को अपनी रचनाएं व अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। अंदलीब ने भी मजरूह की किताब रचनाकारों एवं कवियों को भेंट की। समारोह को संबोधित करते हुए साहित्यकार कमल नयन पांडेय ने कहा कि मजरूह सुल्तानपुरी के बेटे-बहू ने 30 वर्ष बाद पिता की सरजमीं पर पहुंचकर गजेहड़ी का मान बढ़ाया है।
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मजरूह के बेटे अंदलीब सुल्तानपुरी ने कहा कि अब्बा ने शेरो-शायरी में ऊंचा मुकाम हासिल कर गजेहड़ी व सुल्तानपुर का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है। उनका जन्म मुंबई में हुआ था। उन्हें 30 साल बाद गांव आने का सौभाग्य मिला है। वे और उनके पुत्र फरजान सुल्तानपुरी बॉलीवुड से जुड़े हैं। पिता की याद में गजेहड़ी में कुछ अच्छा काम किया जाएगा। गौरतलब है कि मजरूह के दो पुत्र एरम व अंदलीब सुल्तानपुरी तथा तीन बेटियां नौगुुल, नौबहार व सबा हैं। बड़े बेटे एरम का देहांत हो चुका है जबकि अंदलीब का परिवार मुंबई में ही बस गया है। स्वागत समारोह में डॉ. धर्मपाल सिंह, जाहिल सुल्तानपुरी, डॉ. राजीव श्रीवास्तव, डॉ. सादिक अली, हबीब अजनबी, डीएम मिश्र, मो. इलियास खां, इसरार खां, अलिफ फहमी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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