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Sultanpur News: सीएचसी के कई कमरों पर ताले, मरीज करते रहे इंतजार
Thu, 01 Oct 2026 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:54 AM IST
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सीएचसी में बंद चिकित्साधिकारी कक्ष। संवाद
करौंदीकला। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार दोपहर 12:55 बजे ओपीडी में मरीज मौजूद दिखे, लेकिन टीकाकरण कक्ष, माइनर ओटी, ड्राई रूम और चिकित्साधिकारी ड्यूटी कक्ष के दरवाजों पर ताले लटके मिले। कई मरीज ओपीडी के बाहर डॉक्टरों के आने का इंतजार करते दिखाई दिए।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रिंकी मौर्या और डॉ. सोनम मरीज देखती मिलीं। डॉ. संजय दूबे और डॉ. देवेंद्र की ओपीडी के बाहर मरीज इंतजार कर रहे थे। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। नेत्र, बाल रोग, हड्डी रोग, सर्जरी, न्यूरो और नेत्र परीक्षण अधिकारी की तैनाती नहीं है। आरबीएसके टीम नहीं है। अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से डॉक्टर की सलाह के बाद मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। सर्जन की तैनाती न होने से दुर्घटना या ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल रेफर किया जाता है।
दवा-जांच दोनों का खर्च मरीज की जेब से
हिंदुआबाद की रीता उपाध्याय ने बताया कि महीनों से बुखार और पेट दर्द की शिकायत है। डॉक्टर को दिखाने के बाद बाहर से महंगी दवा लेने को कहा गया।ताहिरपुर की मंसा देवी दवा लेने पहुंचीं, लेकिन उन्हें अस्पताल की दवा के बजाय बाहर से दवा लेने की सलाह मिली। राम प्रवेश को पेट दर्द पर अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सीएचसी में सुविधा नहीं होने से निजी केंद्र पर जांच करानी होगी।
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वर्जन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि डॉ. संजय दूबे रात में आकस्मिक ड्यूटी पर थे, जिस कारण वे दिन में मौजूद नहीं थे। बाहर से दवा लिखने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी।
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दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रिंकी मौर्या और डॉ. सोनम मरीज देखती मिलीं। डॉ. संजय दूबे और डॉ. देवेंद्र की ओपीडी के बाहर मरीज इंतजार कर रहे थे। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। नेत्र, बाल रोग, हड्डी रोग, सर्जरी, न्यूरो और नेत्र परीक्षण अधिकारी की तैनाती नहीं है। आरबीएसके टीम नहीं है। अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं होने से डॉक्टर की सलाह के बाद मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। सर्जन की तैनाती न होने से दुर्घटना या ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल रेफर किया जाता है।
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दवा-जांच दोनों का खर्च मरीज की जेब से
हिंदुआबाद की रीता उपाध्याय ने बताया कि महीनों से बुखार और पेट दर्द की शिकायत है। डॉक्टर को दिखाने के बाद बाहर से महंगी दवा लेने को कहा गया।ताहिरपुर की मंसा देवी दवा लेने पहुंचीं, लेकिन उन्हें अस्पताल की दवा के बजाय बाहर से दवा लेने की सलाह मिली। राम प्रवेश को पेट दर्द पर अल्ट्रासाउंड की सलाह दी गई। सीएचसी में सुविधा नहीं होने से निजी केंद्र पर जांच करानी होगी।
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वर्जन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि डॉ. संजय दूबे रात में आकस्मिक ड्यूटी पर थे, जिस कारण वे दिन में मौजूद नहीं थे। बाहर से दवा लिखने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी।