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मैन पॉवर की कमी से नहीं संचालित हो सका एल-टू हॉस्पिटल
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सुल्तानपुर। जिले में 10 वेंटिलेटर उपलब्ध होने के बाद भी एल-टू हॉस्पिटल का संचालन नहीं शुरू हो सका। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने एक अस्पताल को कोविड केयर सेंटर के लिए चयन जरूर किया है लेकिन मानव संसाधन की कमी आड़े आ रही है। चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में सिर्फ कोविड केयर सेंटर का ही संचालन जिले में किया जा रहा है।
शासन ने कोरोना से लड़ने के लिए प्रत्येक जिले में एल-टू व एल-थ्री हॉस्पिटल संचालित करने का निर्देश दिया है। सोमवार को जिले के दौरे पर आए सूबे के स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह ने एल-टू हॉस्पिटल संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में पांच से 10 वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की बात कही थी।
शासन व स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के तहत जिले में मौजूदा समय में 10 वेंटिलेटर की उपलब्धता हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसमें दो ट्रॉमा सेंटर, चार जिला अस्पताल में मौजूद हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए चार वेंटिलेटर करीब एक माह पहले शासन ने भेजा था। पर, इसका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका।
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इसके पीछे मानव संसाधन की कमी बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में पर्याप्त संख्या में एनेस्थीसिया समेत अन्य चिकित्सक व कर्मचारी नहीं हैं, जिन्हें एल-टू हॉस्पिटल में रखा जाय। चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी से जिले में एल-टू हॉस्पिटल का संचालन अभी तक नहीं हो सका है। इसकी वजह से गंभीर कोरोना मरीजों को गैर जनपद के एल-टू हॉस्पिटलों में इलाज के लिए भेजा जा रहा है।
कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए प्रशासन के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने पांच कोविड केयर सेंटर का चयन किया है। इन पांचों सेंटरों में करीब एक हजार मरीज रखने की व्यवस्था है। इसमें केएनआईटी, केएनआई फरीदीपुर, रामरती डिग्री कॉलेज, बिरसिंहपुर हॉस्पिटल व विश्वनाथ कॉलेज कलान अखंडनगर शामिल है। फिलहाल अभी केएनआई फरीदीपुर के ही कोविड केयर सेंटर में मरीजों को रखा जा रहा है।
एल-वन हॉस्पिटल के तौर पर स्वास्थ्य विभाग ने कुड़वार व मोतिगरपुर सीएचसी का भी चयन किया है। कुछ दिनों तक कुड़वार के एल वन हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती भी किया गया। बाद में उसे बंद करके कोविड केयर सेंटर में मरीजों को रखा जाने लगा।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि एल-टू हॉस्पिटल के रूप में बिरसिंहपुर स्थित 100 बेड के अस्पताल का चयन किया है। मानव संसाधन की कमी से उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। जिले में वेंटिलेटर समेत अन्य सामानों की पर्याप्त व्यवस्था है।
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शासन ने कोरोना से लड़ने के लिए प्रत्येक जिले में एल-टू व एल-थ्री हॉस्पिटल संचालित करने का निर्देश दिया है। सोमवार को जिले के दौरे पर आए सूबे के स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह ने एल-टू हॉस्पिटल संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में पांच से 10 वेंटिलेटर उपलब्ध कराने की बात कही थी।
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शासन व स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के तहत जिले में मौजूदा समय में 10 वेंटिलेटर की उपलब्धता हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसमें दो ट्रॉमा सेंटर, चार जिला अस्पताल में मौजूद हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए चार वेंटिलेटर करीब एक माह पहले शासन ने भेजा था। पर, इसका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका।
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इसके पीछे मानव संसाधन की कमी बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में पर्याप्त संख्या में एनेस्थीसिया समेत अन्य चिकित्सक व कर्मचारी नहीं हैं, जिन्हें एल-टू हॉस्पिटल में रखा जाय। चिकित्सकों व कर्मचारियों की कमी से जिले में एल-टू हॉस्पिटल का संचालन अभी तक नहीं हो सका है। इसकी वजह से गंभीर कोरोना मरीजों को गैर जनपद के एल-टू हॉस्पिटलों में इलाज के लिए भेजा जा रहा है।
कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए प्रशासन के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने पांच कोविड केयर सेंटर का चयन किया है। इन पांचों सेंटरों में करीब एक हजार मरीज रखने की व्यवस्था है। इसमें केएनआईटी, केएनआई फरीदीपुर, रामरती डिग्री कॉलेज, बिरसिंहपुर हॉस्पिटल व विश्वनाथ कॉलेज कलान अखंडनगर शामिल है। फिलहाल अभी केएनआई फरीदीपुर के ही कोविड केयर सेंटर में मरीजों को रखा जा रहा है।
एल-वन हॉस्पिटल के तौर पर स्वास्थ्य विभाग ने कुड़वार व मोतिगरपुर सीएचसी का भी चयन किया है। कुछ दिनों तक कुड़वार के एल वन हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती भी किया गया। बाद में उसे बंद करके कोविड केयर सेंटर में मरीजों को रखा जाने लगा।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि एल-टू हॉस्पिटल के रूप में बिरसिंहपुर स्थित 100 बेड के अस्पताल का चयन किया है। मानव संसाधन की कमी से उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। जिले में वेंटिलेटर समेत अन्य सामानों की पर्याप्त व्यवस्था है।