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तबले की थाप पर थिरके पांव
Amarujala Bureau
Updated Sun, 22 Jan 2017 10:41 PM IST
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लोगों ने सराहा
- फोटो : अमर उजाला
लोक नृत्य एवं गायन का अपना महत्व है। आधुनिकता के दौर में ये विधाएं विलुप्त होती जा रही हैं। इसे संजोने एवं आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह बात लंभुआ उप जिलाधिकारी डॉ. रमेश कुमार शुक्ल ने पं. राम नरेश त्रिपाठी सभागार में आयोजित तीन दिवसीय लोक नृत्य के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
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पं. राम नरेश त्रिपाठी सभागार में अशोक एवं त्रिपुरारी महराज शिक्षा पारंपरिक कथक नाट्य सांस्कृतिक केंद्र की ओर से तीन दिवसीय मंच प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। शनिवार की देर शाम तक चले कार्यक्रम में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। प्रशिक्षु कलाकार वर्षा एवं पल्लवी ने कथक नृत्य, रेखा यादव व हेमा यादव ने लोक गीत, आशी एवं आशीष मिश्र ने ठुमरी, विनीत तिवारी ने भोजपुरी गायन तथा प्रशांत तिवारी ने गजल प्रस्तुत की।
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प्रशिक्षक शिवदत्त महराज ने ठुमरी-कथक नृत्य एवं गजल प्रस्तुत किया। इस मौके पर सिविल जज अरुण कुमार यादव, राज बाबू, अनिल कुमार सेठ, पं. कृष्ण दत्त महराज, अशोक त्रिपाठी, चेतना सिंह, आलोक महराज, अंबरीश मिश्रा समेत कई लोग मौजूद रहे।
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