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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए मानक विहीन हुआ मिट्टी खनन
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सुल्तानपुर। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए किसानों के खेत में ठेकेदारों ने जबरन खोदाई कर करोड़ों का खेल कर डाला। खोदाई के लिए न किसानों से सहमति ली गई और न हीं उन्हें बदले में भुगतान किया गया।
किसान खोदाई का विरोध करते हुए अधिकारियों की चौखट पर चिल्लाते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। अब बारिश में 30 फिट तक खोदे गए खेत मौत का कुआं बन गए हैं।
बल्दीराय क्षेत्र के दर्जनों गांवों से होकर गुजर रहे लखनऊ-गाजीपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर मिट्टी पटाई के लिए कार्यदायी फर्म ने पेटी ठेकेदारों को कार्य दे दिया। पेटी ठेकेदारों ने पहले तो किसानों को कुछ भुगतान करने की लालच व मामूली खोदाई करने का वास्ता दिया।
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इसके बाद दर्जनों गांवों में मानक विहीन खोदाई कर डाली। बल्दीराय क्षेत्र के जरईकंला व सिकरी में तो ठेकेदारों ने करीब 30 फिट तक किसानों के खेतों में जबरन खोदाई कर डाली।
मानक विहीन खोदाई करके फर्म ने किसानों के खेत को तालाब बना दिया। पीड़ित किसान जबरन खोदाई करने के विरोध में अधिकारियों की चौखट पर अपनी फरियाद करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
स्थिति यह है कि 30 फिट तक खोदाई से किसानों के खेत मौत का कुआं बन गए हैं। बारिश होते ही उसमें लबालब पानी भर गया है। खुदाई के लिए कार्यदायी फर्म ने किसानों से सहमति भी नहीं ली। साथ ही ग्राम समाज की भूमि पर खनन के लिए खनन विभाग की मंजूरी भी नहीं ली। इसके बाद भी रातों दिन खनन होता रहा।
मानक विहीन खोदाई से जरईकलां व सिकरी के कई छोटे किसान तो तकरीबन बिना भूमि के हो गए हैं। उनके पास पर्याप्त संख्या में फसल उत्पादन के लिए खेत नहीं बचे हैं।
जरईकलां के संपत, पुट्टुर, गनेशी, हितलाल, श्यामबिहारी, राम धीरज, शिवलाल, रमेश, किशोरे समेत दो दर्जन किसान मानक विहीन खोदाई से खेतिहर कहलाने लायक नहीं रह गए हैं।
खनन विभाग के मुताबिक किसी भी भूमि पर छह फिट से अधिक मिट्टी की खोदाई नहीं की जा सकती है। छह फिट से अधिक खोदाई मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
खोदाई के लिए संबंधित से सहमति लेनी आवश्यक होती है। किसान की भूमि पर संबंधित किसान व सरकारी भूमि पर खनन विभाग से मंजूरी लेनी पड़ती है। बल्दीराय क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए ऐसा कुछ नहीं हुआ।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने कहा कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में मानक विहीन खोदाई का प्रकरण आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।
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किसान खोदाई का विरोध करते हुए अधिकारियों की चौखट पर चिल्लाते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। अब बारिश में 30 फिट तक खोदे गए खेत मौत का कुआं बन गए हैं।
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बल्दीराय क्षेत्र के दर्जनों गांवों से होकर गुजर रहे लखनऊ-गाजीपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर मिट्टी पटाई के लिए कार्यदायी फर्म ने पेटी ठेकेदारों को कार्य दे दिया। पेटी ठेकेदारों ने पहले तो किसानों को कुछ भुगतान करने की लालच व मामूली खोदाई करने का वास्ता दिया।
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इसके बाद दर्जनों गांवों में मानक विहीन खोदाई कर डाली। बल्दीराय क्षेत्र के जरईकंला व सिकरी में तो ठेकेदारों ने करीब 30 फिट तक किसानों के खेतों में जबरन खोदाई कर डाली।
मानक विहीन खोदाई करके फर्म ने किसानों के खेत को तालाब बना दिया। पीड़ित किसान जबरन खोदाई करने के विरोध में अधिकारियों की चौखट पर अपनी फरियाद करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी।
स्थिति यह है कि 30 फिट तक खोदाई से किसानों के खेत मौत का कुआं बन गए हैं। बारिश होते ही उसमें लबालब पानी भर गया है। खुदाई के लिए कार्यदायी फर्म ने किसानों से सहमति भी नहीं ली। साथ ही ग्राम समाज की भूमि पर खनन के लिए खनन विभाग की मंजूरी भी नहीं ली। इसके बाद भी रातों दिन खनन होता रहा।
मानक विहीन खोदाई से जरईकलां व सिकरी के कई छोटे किसान तो तकरीबन बिना भूमि के हो गए हैं। उनके पास पर्याप्त संख्या में फसल उत्पादन के लिए खेत नहीं बचे हैं।
जरईकलां के संपत, पुट्टुर, गनेशी, हितलाल, श्यामबिहारी, राम धीरज, शिवलाल, रमेश, किशोरे समेत दो दर्जन किसान मानक विहीन खोदाई से खेतिहर कहलाने लायक नहीं रह गए हैं।
खनन विभाग के मुताबिक किसी भी भूमि पर छह फिट से अधिक मिट्टी की खोदाई नहीं की जा सकती है। छह फिट से अधिक खोदाई मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
खोदाई के लिए संबंधित से सहमति लेनी आवश्यक होती है। किसान की भूमि पर संबंधित किसान व सरकारी भूमि पर खनन विभाग से मंजूरी लेनी पड़ती है। बल्दीराय क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए ऐसा कुछ नहीं हुआ।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन हर्षदेव पांडेय ने कहा कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में मानक विहीन खोदाई का प्रकरण आने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।