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किसानों की फसल चौपट कर रहे छुट्टा मवेशी
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सुल्तानपुर। जिले के किसानों की फसल छुट्टा गोवंशों से बर्बाद हो रही है। रतजगा करने के बाद भी किसान अपनी फसल इन मवेशियों से नहीं बचा पा रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से छुट्टा मवेशियों को पकड़वाए जाने की मांग की है।
रबी के सीजन में खेतों में इस समय अधिकांश किसानों ने आलू, मटर, सरसों की बोआई कर ली है। इसके अलावा अपने पशुओं को चारा खिलाने के लिए खेतों में बरसीम की बोआई भी की है।
पहले किसान वनरोज व जंगली सुअर से परेशान रहते थे। अब वनरोज, जंगली सुअर के साथ ही आवारा मवेशियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के सभी विकास खंड क्षेत्रों में आवारा पशुओं को रखने के लिए गो-आश्रय केंद्र खोले गए हैं। इसके बाद भी गांव के खेत खलिहान में आवारा मवेशी घूमते रहते हैं।
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खेतों में तैयार होने से पहले ही ये मवेशी फसल चट कर जा रहे हैं। गेहूं की बोआई के बाद जब अंकुर निकलने लगता है तो झुंड में जाकर आवारा पशु उसे खा लेते हैं। साथ ही पैर के नीचे आने से फसल नष्ट हो जाती है।
पहले से ही वनरोज के आतंक से परेशान किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि इस समस्या से कैसे निजात मिले। गो-आश्रय स्थलों से भी मवेशी खेतों की ओर निकल ले रहे हैं।
इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। रात-रात भर जागने के बाद भी किसान अपनी फसल बचा नहीं पा रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से छुट्टा गोवंशों से निजात दिलाए जाने की मांग की है।
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रबी के सीजन में खेतों में इस समय अधिकांश किसानों ने आलू, मटर, सरसों की बोआई कर ली है। इसके अलावा अपने पशुओं को चारा खिलाने के लिए खेतों में बरसीम की बोआई भी की है।
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पहले किसान वनरोज व जंगली सुअर से परेशान रहते थे। अब वनरोज, जंगली सुअर के साथ ही आवारा मवेशियों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के सभी विकास खंड क्षेत्रों में आवारा पशुओं को रखने के लिए गो-आश्रय केंद्र खोले गए हैं। इसके बाद भी गांव के खेत खलिहान में आवारा मवेशी घूमते रहते हैं।
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खेतों में तैयार होने से पहले ही ये मवेशी फसल चट कर जा रहे हैं। गेहूं की बोआई के बाद जब अंकुर निकलने लगता है तो झुंड में जाकर आवारा पशु उसे खा लेते हैं। साथ ही पैर के नीचे आने से फसल नष्ट हो जाती है।
पहले से ही वनरोज के आतंक से परेशान किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि इस समस्या से कैसे निजात मिले। गो-आश्रय स्थलों से भी मवेशी खेतों की ओर निकल ले रहे हैं।
इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। रात-रात भर जागने के बाद भी किसान अपनी फसल बचा नहीं पा रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से छुट्टा गोवंशों से निजात दिलाए जाने की मांग की है।