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Sultanpur News: हाईकोर्ट ने बहाल किया ग्राम प्रधान का अधिकार, नहीं मिला चार्ज
Sun, 22 Dec 2024 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 22 Dec 2024 12:37 AM IST
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मोतिगरपुर(सुल्तानपुर)। स्थानीय ब्लॉक की खनुहट ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखकर शिकायतकर्ता की अपील को खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की एकल खंडपीठ ने ग्राम प्रधान के खिलाफ वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को समाप्त करने के आदेश को कठोर और साक्ष्यहीन मानते हुए उन्हें बहाल किया था। बावजूद इसके डीपीआरओ ने प्रधान को उसके अधिकार को वापस करने का आदेश जारी नहीं किया गया है।
खनुहट गांव के आशुतोष पांडेय ने प्रधान और पंचायत सचिव पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास मिट्टी की फर्जी पटाई दिखाकर 82,700 के गबन का आरोप लगाया था। डीएम के निर्देश पर ग्राम प्रधान को निलंबित कर सचिव के खिलाफ कार्रवाई के करने के निर्देश दिए गए थे। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान विजय प्रकाश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने बीते 25 नवंबर ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को बहाल करने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की थी लेकिन चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की डबल बेंच ने इसे स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए 16 दिसंबर को अपील खारिज कर दी थी। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी डीपीआरओ की ओर से ग्राम प्रधान की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों को बहाल करने में हीलाहवाली की जा रही है।
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खनुहट गांव के आशुतोष पांडेय ने प्रधान और पंचायत सचिव पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास मिट्टी की फर्जी पटाई दिखाकर 82,700 के गबन का आरोप लगाया था। डीएम के निर्देश पर ग्राम प्रधान को निलंबित कर सचिव के खिलाफ कार्रवाई के करने के निर्देश दिए गए थे। इसके खिलाफ ग्राम प्रधान विजय प्रकाश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने बीते 25 नवंबर ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को बहाल करने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की थी लेकिन चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की डबल बेंच ने इसे स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए 16 दिसंबर को अपील खारिज कर दी थी। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी डीपीआरओ की ओर से ग्राम प्रधान की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों को बहाल करने में हीलाहवाली की जा रही है।
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