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प्रशिक्षित हाथों में पहुंच गए साढ़े 14 हजार लाइसेंसी असलहे
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8. डीएम रवीश गुप्ता।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। जिले में जारी करीब साढ़े 14 हजार शस्त्र लाइसेंस के हथियार प्रशिक्षित हाथों में पहुंच गए हैं। पूर्व में प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं होने से अधिकांश असलहे अप्रशिक्षित हाथों में रहे। वर्ष 2014 में नियमों में बदलाव के बाद प्रत्येक लाइसेंसधारकों के लिए प्रशिक्षण आवश्यक किए जाने के बाद नवीनीकरण में यह व्यवस्था लागू कर दी गई। नतीजा हुआ कि असलहे धीरे-धीरे प्रशिक्षित हाथों में पहुंच गए।
वर्ष 2014 के पहले असलहा लाइसेंस लेने के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं होने की वजह से महिलाओं के साथ पुरुषों ने बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के हथियारों का लाइसेंस हथिया लिया था। एसबीबीएल, डीबीबीएल से लेकर रिवॉल्वर व रायफल तक के लाइसेेंस शामिल हैं। ये लाइसेंस जानमाल की सुरक्षा के मामूली आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट लगते लाइसेंस जारी किए गए हैं। जिले में जारी 14,567 लाइसेंसों में 507 महिलाओं के नाम हैं। शेष लाइसेंस पुरुषों के नाम जारी किए गए हैं। करीब चार सौ महिलाएं और करीब नौ हजार पुरुष ऐसे हैं जिन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था के अभाव में लाइसेंस लिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 के बाद लाइसेंस जारी करने के नियमों में हुए बदलाव में प्रशिक्षण जरूरी कर दिया गया है। ट्रेनिंग के साथ ही पुलिस विभाग की ओर से प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रशिक्षण अनिवार्य होने के बाद महिलाओं की ओर से नए लाइसेंस के लिए किए जा रहे आवेदन में काफी कमी आ गई है। पुरुषों की संख्या में कमी नहीं आई है। साथ ही पूर्व में जारी लाइसेंसधारकों को नवीनीकरण के समय प्रशिक्षण प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य कर दिए जाने से अप्रशिक्षित हाथों में असलहे नहीं रह गए हैं। तीन वर्ष में नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रभावी होने से सात वर्ष के दौरान करीब साढ़े 14 हजार लाइसेंसधारकों में सभी ने प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र लगा दिया है।
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घर के पुरुष कर रहे इस्तेमाल
महिलाओं को जारी अधिकतर असलहों का इस्तेमाल उनके घर के पुरुष ही करते हैं। पूर्व में असलहे के शौकीन लोगों ने अपने नाम लाइसेंस बनवाने के बाद घर की महिलाओं के नाम भी लाइसेंस निर्गत करवा लिए। शायद यही वजह है कि प्रशिक्षण जरूरी होने के बाद महिला आवेदकों की संख्या तेजी से घटी है। हालांकि पुराने ने प्रशिक्षण प्रमाण पत्र लगाकर नवीनीकरण करवा लिया है।
शासन ने 2014 के बाद शस्त्र लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था अनिवार्य कर दिया है। पूर्व के लाइसेंसधारकों के लिए नवीनीकरण के समय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। अब बिना प्रशिक्षण वालों को नया लाइसेंस नहीं दिया जा रहा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पुराने लाइसेंसधारकों का नवीनीकरण किया जा रहा है। जिले में अब कोई लाइसेंसधारक बिना प्रशिक्षण के नहीं रह गया है। - रवीश गुप्ता, जिला मजिस्ट्रेट।
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वर्ष 2014 के पहले असलहा लाइसेंस लेने के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं होने की वजह से महिलाओं के साथ पुरुषों ने बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के हथियारों का लाइसेंस हथिया लिया था। एसबीबीएल, डीबीबीएल से लेकर रिवॉल्वर व रायफल तक के लाइसेेंस शामिल हैं। ये लाइसेंस जानमाल की सुरक्षा के मामूली आवेदन पर पुलिस रिपोर्ट लगते लाइसेंस जारी किए गए हैं। जिले में जारी 14,567 लाइसेंसों में 507 महिलाओं के नाम हैं। शेष लाइसेंस पुरुषों के नाम जारी किए गए हैं। करीब चार सौ महिलाएं और करीब नौ हजार पुरुष ऐसे हैं जिन्होंने प्रशिक्षण व्यवस्था के अभाव में लाइसेंस लिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2014 के बाद लाइसेंस जारी करने के नियमों में हुए बदलाव में प्रशिक्षण जरूरी कर दिया गया है। ट्रेनिंग के साथ ही पुलिस विभाग की ओर से प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है।
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प्रशिक्षण अनिवार्य होने के बाद महिलाओं की ओर से नए लाइसेंस के लिए किए जा रहे आवेदन में काफी कमी आ गई है। पुरुषों की संख्या में कमी नहीं आई है। साथ ही पूर्व में जारी लाइसेंसधारकों को नवीनीकरण के समय प्रशिक्षण प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य कर दिए जाने से अप्रशिक्षित हाथों में असलहे नहीं रह गए हैं। तीन वर्ष में नवीनीकरण की प्रक्रिया प्रभावी होने से सात वर्ष के दौरान करीब साढ़े 14 हजार लाइसेंसधारकों में सभी ने प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र लगा दिया है।
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घर के पुरुष कर रहे इस्तेमाल
महिलाओं को जारी अधिकतर असलहों का इस्तेमाल उनके घर के पुरुष ही करते हैं। पूर्व में असलहे के शौकीन लोगों ने अपने नाम लाइसेंस बनवाने के बाद घर की महिलाओं के नाम भी लाइसेंस निर्गत करवा लिए। शायद यही वजह है कि प्रशिक्षण जरूरी होने के बाद महिला आवेदकों की संख्या तेजी से घटी है। हालांकि पुराने ने प्रशिक्षण प्रमाण पत्र लगाकर नवीनीकरण करवा लिया है।
शासन ने 2014 के बाद शस्त्र लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था अनिवार्य कर दिया है। पूर्व के लाइसेंसधारकों के लिए नवीनीकरण के समय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। अब बिना प्रशिक्षण वालों को नया लाइसेंस नहीं दिया जा रहा। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पुराने लाइसेंसधारकों का नवीनीकरण किया जा रहा है। जिले में अब कोई लाइसेंसधारक बिना प्रशिक्षण के नहीं रह गया है। - रवीश गुप्ता, जिला मजिस्ट्रेट।