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ग्राम पंचायतों से नहीं वापस हुआ 32.31 करोड़ रुपया
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सुल्तानपुर। शासन के निर्देश के बाद भी ग्राम पंचायतों ने शौचालय मद का 32.31 करोड़ रुपया जिले के खाते में नहीं वापस किया। धनराशि वापस न करके ग्राम पंचायतों की ओर से पैसा खर्च करने के लिए धड़ाधड़ चेक काटे जा रहे हैं। समय सीमा बीतने के बाद भी धनराशि ग्राम पंचायतों में ही डंप रहने से शौचालय का पैसा लाभार्थियों के खाते में सीधे भेजने की शासन की मंशा को झटका लगा है।
केंद्र सरकार के पत्र पर प्रमुख सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह ने शौचालय मद की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था को अंजाम देने के लिए निर्देश जारी किया था।
पांच जून को जारी निर्देश में प्रमुख सचिव पंचायतीराज ने 25 जून के बाद ग्राम पंचायतों में शौचालय मद की बची धनराशि को जिले के खाते में वापस करने का आदेश दिया था। ग्राम पंचायतों से धनराशि वापस होने के बाद उसे सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजा जाना है।
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प्रमुख सचिव के पत्र के बाद मिशन निदेशक पंचायतीराज ने भी सभी जिलों को रिमाइंडर जारी किया था। प्रमुख सचिव के निर्देश के क्रम में जिला पंचायतराज अधिकारी ने ग्राम पंचायतों में बचे करीब 32.31 करोड़ रुपया शौचालय मद का 30 जून तक वापस करने का निर्देश दिया था।
प्रमुख सचिव व मिशन निदेशक के निर्देश के बाद भी जिले में ग्राम पंचायतों ने अभी तक धनराशि जिले के खाते में वापस नहीं की। धनराशि वापस करने के बजाय ग्राम पंचायतों की ओर से धड़ाधड़ चेक काटकर पैसा खर्च करने की कोशिश चल रही है।
ग्राम पंचायतें धनराशि वापस करने के बजाय उससे आनन-फानन में खर्च करने की फिराक में लगी हैं। समयसीमा बीतने के बाद अभी तक करीब 32.31 करोड़ रुपया ग्राम पंचायतों से वापस नहीं होने पर शासन की मंशा को झटका लगा है।
लाभार्थियों को प्रसाधन निर्माण के लिए मिलने वाली धनराशि उनके बैंक खाते में ऑनलाइन पहुंचने की प्रक्रिया थम गई है। इसकी वजह से ग्राम पंचायतों में चल रहे प्रसाधन के निर्माण में सुस्ती आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए शासन की ओर से लाभार्थियों को 12 हजार रुपया दिए जाने का प्रावधान है। शासन के निर्देश के बाद भी अधिकांश लाभार्थियों को यह धनराशि नहीं मिल पाती है। प्रधान व सेक्रेटरी लाभार्थियों को धनराशि न देकर स्वयं प्रसाधन का निर्माण करवा रहे हैं।
कोरम पूरा करने के लिए लाभार्थियों को चेक देकर उनसे पैसा वापस ले लिया जाता है। इसे देखते हुए शासन ने लाभार्थियों के खाते में सीधे ऑनलाइन धनराशि भेजने की व्यवस्था कर दी है।
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केंद्र सरकार के पत्र पर प्रमुख सचिव पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह ने शौचालय मद की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था को अंजाम देने के लिए निर्देश जारी किया था।
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पांच जून को जारी निर्देश में प्रमुख सचिव पंचायतीराज ने 25 जून के बाद ग्राम पंचायतों में शौचालय मद की बची धनराशि को जिले के खाते में वापस करने का आदेश दिया था। ग्राम पंचायतों से धनराशि वापस होने के बाद उसे सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजा जाना है।
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प्रमुख सचिव के पत्र के बाद मिशन निदेशक पंचायतीराज ने भी सभी जिलों को रिमाइंडर जारी किया था। प्रमुख सचिव के निर्देश के क्रम में जिला पंचायतराज अधिकारी ने ग्राम पंचायतों में बचे करीब 32.31 करोड़ रुपया शौचालय मद का 30 जून तक वापस करने का निर्देश दिया था।
प्रमुख सचिव व मिशन निदेशक के निर्देश के बाद भी जिले में ग्राम पंचायतों ने अभी तक धनराशि जिले के खाते में वापस नहीं की। धनराशि वापस करने के बजाय ग्राम पंचायतों की ओर से धड़ाधड़ चेक काटकर पैसा खर्च करने की कोशिश चल रही है।
ग्राम पंचायतें धनराशि वापस करने के बजाय उससे आनन-फानन में खर्च करने की फिराक में लगी हैं। समयसीमा बीतने के बाद अभी तक करीब 32.31 करोड़ रुपया ग्राम पंचायतों से वापस नहीं होने पर शासन की मंशा को झटका लगा है।
लाभार्थियों को प्रसाधन निर्माण के लिए मिलने वाली धनराशि उनके बैंक खाते में ऑनलाइन पहुंचने की प्रक्रिया थम गई है। इसकी वजह से ग्राम पंचायतों में चल रहे प्रसाधन के निर्माण में सुस्ती आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण के लिए शासन की ओर से लाभार्थियों को 12 हजार रुपया दिए जाने का प्रावधान है। शासन के निर्देश के बाद भी अधिकांश लाभार्थियों को यह धनराशि नहीं मिल पाती है। प्रधान व सेक्रेटरी लाभार्थियों को धनराशि न देकर स्वयं प्रसाधन का निर्माण करवा रहे हैं।
कोरम पूरा करने के लिए लाभार्थियों को चेक देकर उनसे पैसा वापस ले लिया जाता है। इसे देखते हुए शासन ने लाभार्थियों के खाते में सीधे ऑनलाइन धनराशि भेजने की व्यवस्था कर दी है।