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गोमती नदी की कटान की जद में आए तराई इलाके के तीन गांव
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सुल्तानपुर। लगातार हो रही बारिश से गोमती नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना पानी बढ़ने नदी में कटान तेज हो गई है। इसकी वजह से नदी के किनारे स्थित तराई क्षेत्र के तीन गांव कटान की जद में आ गए हैं।
जलस्तर बढ़ने व कटान से नदी के किनारे स्थित करीब एक दर्जन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। अभी तक तीन गांवों की करीब तीन बीघा भूमि नदी में समा चुकी है।
जिले में पांच दिनों से रोजाना हो रही बारिश से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से नदी में कटान तेज हो गई है। इस बार नदी की कटान धनपतगंज क्षेत्र के करीब दर्जन भर गांवों की ओर बड़ी तेजी से हो रही है।
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तीन दिनों से गोमती नदी की कटान से तराई क्षेत्र का बगीवा, कोलिया व जासरपुर जद में आ गया है। इन गांवों की करीब तीन बीघा किसानों की भूमि गोमती नदी में अभी तक समा चुकी है। लगातार कटान व जलस्तर बढ़ने से किनारे स्थित कृषि भूमि के साथ गांवों को भी खतरा मंडराने लगा है। कटान को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
गोमती नदी में जलस्तर बढ़ने व कटान तेज होने के साथ तराई क्षेत्रों में बारिश से जलभराव की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। हालांकि अभी गोमती नदी का जलस्तर थोड़ा नीचे रहने से मायंग के पास स्थित औदहा, जज्जौर के खेतों में भरा पानी धीरे-धीरे नदी में गिर रहा है।
इसे देखते हुए ग्रामीणों की आस अभी खेत खाली होने को लेकर बंधी है लेकिन नदी का जलस्तर ऊपर आते ही जलभराव की भीषण समस्या उत्पन्न होने के आसार प्रबल हो गए हैं।
बारिश से अभी तक औदहा, जज्जौर के खेतों में पानी भर गया है। सेवरहा की पुलिया पानी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हो गई है। इसकी वजह से चार पहिया वाहनों का आवाजाही बंद हो गई है।
क्षेत्र के दर्जन भर गांव गोमती नदी के तराई में स्थित हैं। तराई में गांव होने की वजह से नदी का जलस्तर थोड़ा सा बढ़ते ही ये गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। कई बार बाढ़ की चपेट में आने से ग्रामीणों का सब कुछ नष्ट हो चुका है।
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जलस्तर बढ़ने व कटान से नदी के किनारे स्थित करीब एक दर्जन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। अभी तक तीन गांवों की करीब तीन बीघा भूमि नदी में समा चुकी है।
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जिले में पांच दिनों से रोजाना हो रही बारिश से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से नदी में कटान तेज हो गई है। इस बार नदी की कटान धनपतगंज क्षेत्र के करीब दर्जन भर गांवों की ओर बड़ी तेजी से हो रही है।
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तीन दिनों से गोमती नदी की कटान से तराई क्षेत्र का बगीवा, कोलिया व जासरपुर जद में आ गया है। इन गांवों की करीब तीन बीघा किसानों की भूमि गोमती नदी में अभी तक समा चुकी है। लगातार कटान व जलस्तर बढ़ने से किनारे स्थित कृषि भूमि के साथ गांवों को भी खतरा मंडराने लगा है। कटान को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
गोमती नदी में जलस्तर बढ़ने व कटान तेज होने के साथ तराई क्षेत्रों में बारिश से जलभराव की भी समस्या उत्पन्न हो गई है। हालांकि अभी गोमती नदी का जलस्तर थोड़ा नीचे रहने से मायंग के पास स्थित औदहा, जज्जौर के खेतों में भरा पानी धीरे-धीरे नदी में गिर रहा है।
इसे देखते हुए ग्रामीणों की आस अभी खेत खाली होने को लेकर बंधी है लेकिन नदी का जलस्तर ऊपर आते ही जलभराव की भीषण समस्या उत्पन्न होने के आसार प्रबल हो गए हैं।
बारिश से अभी तक औदहा, जज्जौर के खेतों में पानी भर गया है। सेवरहा की पुलिया पानी के तेज बहाव से क्षतिग्रस्त हो गई है। इसकी वजह से चार पहिया वाहनों का आवाजाही बंद हो गई है।
क्षेत्र के दर्जन भर गांव गोमती नदी के तराई में स्थित हैं। तराई में गांव होने की वजह से नदी का जलस्तर थोड़ा सा बढ़ते ही ये गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। कई बार बाढ़ की चपेट में आने से ग्रामीणों का सब कुछ नष्ट हो चुका है।