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Sultanpur News: हाई रिस्क बच्चों की सुनने की क्षमता की जांच कराएं
Thu, 08 May 2025 01:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 08 May 2025 01:18 AM IST
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सुल्तानपुर। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की नई बिल्डिंग में बुधवार को नवजात बच्चों में सुनने की जांच कराने के महत्व विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें हाई रिस्क बच्चों में सुनने की क्षमता और बहरेपन के बारे में जानकारी दी गई।
नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंबर केसरवानी ने कहा कि हाई रिस्क बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों के सुनने की क्षमता की जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि नवजात बच्चों में जन्म के समय कई तरह की जांचे करानी होती हैं।
बताया कि इन्हीं जांच में नवजात के माता-पिता को उसके सुनने की जांच भी करानी चाहिए। खासकर जो हाई रिस्क बच्चे एनआईसीयू (नवजात गहन देखभाल इकाई) में रहे हों, समय से पहले पैदा हुए हों, जिनका वजन कम हो, ऐसे बच्चों की सुनने की जांच आवश्यक है।
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आगे बताया कि समय पर जांच न कराई गई तो बाद में बीमारी पकड़ में आती है और कभी-कभी तो बहरेपन का खतरा भी होता है। समय से जांच एवं उपचार से बहरेपन व न बोलने की समस्या को दूर किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. पवन सिंह, डॉ. आरपी द्विवेदी, डॉ. सुजीत, डॉ. संजय सिंह, डॉ. वीर विक्रम सिंह, डॉ. ऋचा तिवारी, डॉ. शाश्वत मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंबर केसरवानी ने कहा कि हाई रिस्क बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों के सुनने की क्षमता की जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि नवजात बच्चों में जन्म के समय कई तरह की जांचे करानी होती हैं।
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बताया कि इन्हीं जांच में नवजात के माता-पिता को उसके सुनने की जांच भी करानी चाहिए। खासकर जो हाई रिस्क बच्चे एनआईसीयू (नवजात गहन देखभाल इकाई) में रहे हों, समय से पहले पैदा हुए हों, जिनका वजन कम हो, ऐसे बच्चों की सुनने की जांच आवश्यक है।
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आगे बताया कि समय पर जांच न कराई गई तो बाद में बीमारी पकड़ में आती है और कभी-कभी तो बहरेपन का खतरा भी होता है। समय से जांच एवं उपचार से बहरेपन व न बोलने की समस्या को दूर किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. पवन सिंह, डॉ. आरपी द्विवेदी, डॉ. सुजीत, डॉ. संजय सिंह, डॉ. वीर विक्रम सिंह, डॉ. ऋचा तिवारी, डॉ. शाश्वत मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।