फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Four police personnel including Kotwal face guilty in ASP investigation

एएसपी की जांच में चांदा कोतवाल समेत चार पुलिस कर्मी दोषी

Mon, 01 Jul 2019 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2019 11:48 PM IST
विज्ञापन
Four police personnel including Kotwal face guilty in ASP investigation
सुल्तानपुर। जिले में एक बार फिर पुलिस की किरकिरी हुई है। करीब 13 माह पूर्व मामूली विवाद में हुई बुजुर्ग की हत्या के मामले में विसरा नष्ट होने के बावजूद विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।
विज्ञापन

डीआईजी के आदेश पर अमेठी के एएसपी ने जांच करके तत्कालीन कोतवाल समेत चार पुलिस कर्मियों को दोषी करार दिया है। मामले को लेकर पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है। मामला चांदा कोतवाली के गोपीनाथपुर गांव से जुड़ा है।
विज्ञापन

चांदा कोतवाली क्षेत्र के गोपीनाथपुर गांव निवासी बसंत अग्रहरि के बेटे अभिषेक की 29 मई 2018 को गांव के ही केतन शर्मा ने पिटाई कर दी थी।
मारपीट की शिकायत करने के लिए अभिषेक के बाबा अशर्फीलाल केतन शर्मा के घर गए थे जहां पर केतन शर्मा ने भाई के साथ मिलकर अशर्फीलाल के साथ मारपीट। इससे अशर्फीलाल की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

चांदा कोतवाली पुलिस ने घटना का मुकदमा दर्ज करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा था। मौत का कारण स्पष्ट न होने पर विसरा जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया था।
जांच अधिकारी ने सुरक्षित विसरा को समय से विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा। इस दौरान विसरा ही नष्ट हो गया। घटना की विवेचना कर रहे एसआई शशिकांत पटेल ने धारा 304 घटा कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर दिया था।
बसंत अग्रहरि ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों के साथ ही हाईकोर्ट में की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी अयोध्या ने एएसपी अमेठी को सौपी थीं।
एएसपी अमेठी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व विवेचक शशिकांत पटेल ने मृतक अशर्फीलाल का बिना विसरा परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त किए ही अभियोग का निस्तारण कर दिया।
साथ ही बिना प्रमाणित साक्ष्य के विसरा नष्ट हो जाने का उल्लेख अभियोग दैनिकी में करते हुए कोर्ट उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई, जिसके लिए दरोगा शशिकांत पटेल को दोषी माना गया है।
पिछले साल 24 सितंबर को हेड मुहर्रिर रमापति यादव ने बिना पुष्टिकारक प्रमाण का उल्लेख किए ही रोजनामचा आम में विसरा नष्ट होने का जिक्र कर दिया है, जिसके लिए एएसपी ने उन्हें भी दोषी माना है।
मृतक का विसरा कांस्टेबल इस्लामुद्दीन की ओर से विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी में दाखिल करने ले जाया गया। पर, संबंधित कांस्टेबल ने वाराणसी जाने संबंधित अपनी रवानगी तक चांदा कोतवाली के अभिलेख में नहीं दर्ज कराई गई। न ही वापसी का जिक्र ही कोतवाली के रिकॉर्ड में है।
इसके लिए कांस्टेबल इस्लामुद्दीन को दोषी माना गया है। चांदा कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह ने अभियोग के निस्तारण में कोई दिशा-निर्देश तक नहीं दिया, सिर्फ जांच अधिकारी शशि कांत पटेल की अभियोग दैनिकियों का अग्रसारण कर दिया गया।

एएसपी के मुताबिक यह तत्कालीन एसएचओ के शिथिल पर्यवेक्षण का द्योतक है। इसके लिए तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह (अब नगर कोतवाल) को दोषी माना गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed